5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुंदरता, और वास्तुकला की मूरत…शान-ए- तालाबशाही

लाल पत्थरों से सुसज्जित ऐतिहासिक इमारत, निहारने आते दूर दराज से लोग 1622 में जहांगीर ने अपने बेटे शाहजहां के लिए कराया था निर्माण dholpur, बाड़ी शहर से कुछ दूरी स्थित तालाबशाही अपनी सुंदरता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। जिसे निहारने दूर-दूराज से पर्यटक खिंचे चले आते हैं। इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण लाल […]

2 min read
Google source verification
सुंदरता, और वास्तुकला की मूरत...शान-ए- तालाबशाही An epitome of beauty and architecture...Shaan-e- Talabshahi

लाल पत्थरों से सुसज्जित ऐतिहासिक इमारत, निहारने आते दूर दराज से लोग

1622 में जहांगीर ने अपने बेटे शाहजहां के लिए कराया था निर्माण

dholpur, बाड़ी शहर से कुछ दूरी स्थित तालाबशाही अपनी सुंदरता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। जिसे निहारने दूर-दूराज से पर्यटक खिंचे चले आते हैं। इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया था। झील किनारे बना यह महल हिंदू-मुस्लिम कला का एक अनूठा संगम है। इसे वर्तमान में सरकारी गेस्ट हाउस के रूप में उपयोग लिया जा रहा है।

इतिहासकार बताते हैं कि इसका निर्माण जहांगीर ने अपने बेटे शाहजहां के लिए कराया था। आजादी से पहले धौलपुर के राजा उदयभान सिंह इन ऐतिहासिक ईमारतों का रख रखाव करते थे, जिन्होंने बाद में भारत सरकार को दान कर दिया। गर्मियों में यह झील प्रवासी पक्षियों का मुख्य केंद्र बन जाता है। यहां सात समुंदर पार से आए विदेशी पक्षी मेहमान यहां की रौनक को और चार चांद लगा देते हैं। बाड़ी शहर से लगभग 6किमी दूर यह इमारत राष्ट्रीय राजमार्ग 11बी पर स्थित है। लाल पत्थर से बना यह महल अपनी अद्भुत वास्तुकला के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। कहा जाता है कि 1622 में मुगल सम्राट जहांगीर ने अपने बेटे शाहजहां के लिए इस महल का निर्माण अपने सेनापति सुलहखान के माध्यम से करवाया था। शाहजहां का शिकार और आनंद महल, शाहजहां तालाब शाही महल और झील का उपयोग शिकार के दौरान आराम करने और आनंद महल के रूप में करते थे। यह महल पूरी तरह से लाल पत्थरों से निर्मित है, और दीवारों पर बनी नक्काशी इसे और भी आकर्षक बनाती है। महल के अंदर पुराने समय का एक टैंक भी रखा हुआ है, जिसका उपयोग राजा-महाराजाओं के लिए गर्म पानी की व्यवस्था के लिए किया जाता था। वर्तमान में समय उक्त पर्यटन स्थल का संरक्षण नहीं होने से यह अब रामभरोस बना हुआ है।

झील किनारे बनीं राजा-रानी की कुर्सी

तालाब शाही झील के किनारे पर राजा-रानी नाम से कुर्सियां बनी हुई हैं। जहां से राजा और रानी झील के खूबसूरत दृश्य का आनंद लिया करते थे, स्थानीय लोगों का मानना है कि ये कुर्सियां विशेष रूप से राजा और रानी के बैठने के लिए बनाई गई थीं। ऐतिहासिक तालाबशाही 6 किलोमीटर तक फैली हुई है।

क्या कहते हैं स्थानीय निवासी

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले यह सार्वजनिक निर्माण विभाग के देखरेख में था। यहां से कुछ ऐतिहासिक वस्तुओं को विभाग वाले ले गए। उन्हीं ऐतिहासिक वस्तुओं लिए पर्यटक आते थे, अब इमारत के अंदर ऐसी कोई भी सामग्री नहीं है, जिसे अब लोग देख सकें। पुरातत्व विभाग वस्तुओं को पुन: यहां रखे और ठीक संरक्षण हो तो फिर से इस स्थल को जीवित किया जा सकता है, जिससे यहां फिर चार चांद लग जाएंगे। हर घर शिक्षा टीम के संस्थापक रोहित मीणा ने कहा कि इस इमारत को पर्यटक स्थल घोषित करना आज के समय की आवश्यकता है। जिससे न केवल इसकी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और बेरोजगारों के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।