धौलपुर

चंबल जल से बदलेगी जिले के 256 गांवों की तस्वीर

लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना का कार्य अंतिम चरण में – 3 माह में पूर्ण होने की संभावना धौलपुर. बहुप्रतीक्षित धौलपुर लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। परियोजना का कार्य आगामी तीन माह में पूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है। परियोजना के पूर्ण होने पर जिले के किसानों […]

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लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना का कार्य अंतिम चरण में

- 3 माह में पूर्ण होने की संभावना

धौलपुर. बहुप्रतीक्षित धौलपुर लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। परियोजना का कार्य आगामी तीन माह में पूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है। परियोजना के पूर्ण होने पर जिले के किसानों को सिंचाई के पानी और पेयजल मिल सकेगा। उक्त परियोजा गत 23 नवंबर 2017 को प्रारंभ हुई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 772.52 करोड़ रुपए की लागत स्वीकृत है। हालांकि, परियोजना कार्य में देरी होने से इसकी लागत बढ़ गई।

अधीक्षण अभियंता जल संसाधन वृत्त धौलपुर राजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि परियोजना के माध्यम से 39 हजार 980 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे धौलपुर एवं राजाखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों की सैंपऊ, मनियां, धौलपुर और राजाखेड़ा तहसीलों के 256 गांव सीधे लाभान्वित होंगे। यह परियोजना मानसून में व्यर्थ बहने वाले पानी का सदुपयोग कर बाढ़ जैसी स्थितियों को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी। साथ ही फव्वारा सिंचाई पद्धति को लागू करने वाली यह प्रदेश की अग्रणी परियोजनाओं में शामिल हैए जो कृषि क्षेत्र में नई दिशा देगी। वहीं, अतिरिक्त मुख्य अभियंता जल संसाधन संभाग भरतपुर डी के अग्रवाल ने कंपनी प्रतिनिधियों के साथ परियोजना का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि शेष कार्य तीव्र गति से जारी है और आगामी 3 माह में परियोजना को पूर्ण कर लिया जाएगा।

१० फीसदी जल पेयजल को रहेगा

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को ध्यान में रखते हुए परियोजना के कुल जल का 10 प्रतिशत हिस्सा पेयजल के लिए आरक्षित किया गया है। इससे राजाखेड़ा एवं मनियां तहसीलों के 190 गांवों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जो इन क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। परियोजना के तहत 225 किलोमीटर लंबाई में डीआई एवं एमएस पाइपलाइन का अंडरग्राउंड नेटवर्क तथा 1445 किलोमीटर लंबाई में एचडीपीई पाइपलाइन का वितरण नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। साथ ही 30 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है,जिससे परियोजना को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। 108 डिग्गियों में से 48 डिग्गियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वहीं सोलर पावर प्लांट का लगभग 70 प्रतिशत कार्य भी पूरा कर लिया गया है।

Published on:
05 Apr 2026 06:11 pm
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