धौलपुर

5 हजार 575 लाभार्थियों के पोषाहार पर संकट के बादल

जिले के5 हजार 575 लाभार्थियों को पोषाहार से वंचित रहना पड़ सकता है। क्योंकि इन लाभार्थियों का अभी तक एफआरएस (चेहरा पहचान प्रणाली) नहीं हो सका है। केन्द्र सरकार ने1जुलाई से पोषाहार वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने इस योजना को लागू किया है। हालांकि जिले भर में अभी तक 90 फीसदी से ज्यादा लाभार्थियों का एफआरएस हो चुका है।

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धौलपुर. जिले के5 हजार 575 लाभार्थियों को पोषाहार से वंचित रहना पड़ सकता है। क्योंकि इन लाभार्थियों का अभी तक एफआरएस (चेहरा पहचान प्रणाली) नहीं हो सका है। केन्द्र सरकार ने1जुलाई से पोषाहार वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने इस योजना को लागू किया है। हालांकि जिले भर में अभी तक 90 फीसदी से ज्यादा लाभार्थियों का एफआरएस हो चुका है।

आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मिलने वाले पोषाहार को लेकर केंद्र सरकार की एफआरएस (चेहरा पहचान प्रणाली) 1 जुलाई से लागू हो चुकी है। योजना के तहत पोषाहार का लाभ लेने वाले लाभार्थियों को सत्यापन चेहरा पहचान प्रणाली के माध्यम से किया जाना है। योजना को लागू करने के पीछे केंद्र सरकार पोषाहार वितरण में पारदर्शिता लाना चाहता है, जिससे पोषाहार का लाभ सही लाभार्थी तक पहुंच सके। योजना के लागू होने के बाद लाभार्थी की पहचान फोटो से होगी। आंगनबाड़ी केंद्रों पर जिसकी फोटो मैच करेगी उसे पोषाहार मिलेगा, नहीं तो इस सुविधा से उसे वंचित होना पड़ेगा। एफआरएस (चेहरा पहचान प्रणाली) के लागू होने पर योजना की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी।

एफआरएस नहीं तो पोषाहार नहीं

जिले में कुछ लाभार्थियों की छंटनी करने के बाद 59हजार 465 लाभार्थी जिले में हैं जो पोषाहार योजना का लाभ ले रहे थे। इनमें गर्भवती महिलाएं, धात्री महिलाएं और 6 माह से लेकर 3 साल तक के बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से अभी तक ५३ हजार 890 लाभार्थियों ने अपना एफआरएस (चेहरा पहचान प्रणाली) करा लिया है। तो शेष 5 हजार575 लाभार्थी एफआरएस (चेहरा पहचान प्रणाली) नहीं कराने से अब पोषाहार से वंचित रह सकते हैं। इसके अलावा जिले भर में एफआरएस और ई-केवाइसी 51हजार679 लाभार्थियों की हो चुकी है। पोषाहार योजना के तहत गर्भवती, धात्री महिलाओं और बच्चों को फोर्टिफाइड न्यूट्री मीठा दलिया, मूंग दाल चावल खिचड़ी, गेहूं का दलिया उपलब्ध कराया जाता है।

तीन ब्लॉकों में 90 प्रतिशत एफआरएस

महिलाए एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों को देखें तो जिले भर के छह ब्लॉकों में 90.62 प्रतिशत लाभार्थियों का एफआरएस हो चुका है। इन ब्लॉकों में सबसे ज्यादा एफआरएस बसेड़ी में 97.03 प्रतिशत हो चुके हैं, इसके अलावा राजाखेड़ा में 92.23 बाड़ी में 91.70, सरमथुरा में 89.74, सैंपऊ में 87.77 और सबसे कम धौलपुर ब्लॉक में86.41 प्रतिशत लाभार्थियों के एफआरएस यानी (फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम) हो चुका है। जिन लाभार्थियों ने अभी तक एफआरएस नहीं कराया है विभाग उनके भी एफआरएस कराने पर कार्य कर रहा है।

कार्यकर्ताओं को आ रही परेशानियां

एफआरएस (चेहरा पहचान प्रणाली) कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं शहर से लेकर देहतों तक घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रही हैं। हालांकि कुछ जगह एफआरएस कराने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसमें लाभार्थियों का आधार कार्ड अपडेट नहीं होना, मोबाइल नंबर अटैच नहीं होना, देहात इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या होने से ओटीपी नहीं मिल पाना, इसके अलावा मोबाइल नम्बर गलत दर्ज होना आदि समस्याएं कार्यकर्ताओं के समक्ष आ रही हैं। जिस कारण भी कई लाभार्थियों का एफआरएस अभी तक नहीं हो पा रहा है।

ऐसे लें योजना का लाभ

:: सबसे पहले पंजीकरण और ई-केवाईसी कराना होगा।

:: आधार कार्ड और चेहरे का सत्यापन कराना होगा।

:: पोषण ट्रैकर ऐप के जरिए लाभार्थियों को पोषाहार देने से पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता फोटो लेंगी।

:: फोटो मैच होने पर मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा।

:: ओटीपी को बताने के बाद ही पोषाहार दिया जाएगा।

:: लाभार्थियों को खुद आंगनबाड़ी केंद्र पर जाकर ही पोषाहार लेना होगा।

यह आ रही परेशानी

:: मोबाइल नम्बर जुड़ा हुआ नहीं होना

:: आधार कार्ड का अपडेट नहीं होना

:: ओटीपी के लिए नेटवर्क की समस्या

:: मोबाइल नम्बर का गलत होना

जिले भर में लाभार्थियों का एफआरएस कराया जा रहा है। अभी तक ९० फीसदी एफआरएस हो चुका है। शेष लाभार्थी भी एफआरएस कराने को आगे आएं जिससे उन्हें पोषाहार योजना का लाभ मिल सके।

-धीरेन्द्र सिंह, उप निदेशक महिला एवं बाल विकास

Published on:
11 Aug 2025 07:12 pm
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