
धौलपुर. जिस चंबल नदी में डॉल्फिन समेत अन्य जलीव जीव विचरण करते हैं, अगर उसका पानी गंदा होने लगे तो फिर परिणाम आप खुद सोच सकते हैं। ऐसा ही देश की स्वच्छ नदियों में गिनी जाने वाले चंबल नदी के साथ हो रहा है। धौलपुर नगर परिषद क्षेत्र से सटी चंबल नदी में लम्बे समय से शहर के गंदे नाले का पानी गिर रहा है।
पानी भी थोड़ा बहुत नहीं, मानो कोई छोटी से माइनर नहर हो। नदी में यह पानी सागरपाडा, राजघाट समेत एक अन्य स्थान से पानी नदी के स्वच्छ जल में गिर रहा है। एक नाला पुराने पुल की तरफ और लिफ्ट प्लांट के पास से बीहड़ में होकर आता है। खास बात ये है कि शहर के गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए तगावली और सागरपाडा के पास एसटीपी प्लांट स्थापति हैं लेकिन इसके बाद भी चंबल नदी में गंदा पानी गिरना सवाल खड़े करता है। जबकि नदी से पानी धौलपुर शहर और भरतपुर जिले की भूमिगत पेयजल लाइन से सप्लाई हो रहा है। विशेष बात ये है कि यह पूरा क्षेत्र चंबल घडिय़ाल सेंचुरी अंतर्गत आता है।
एसटीपी प्लांट का चल रहा कार्य, बिना ट्रीटमेंट फेंक रहे पानी
शहर में अमृत 2.0 योजना के तहत तगावली स्थित पुराने एसटीपी प्लांट के पास ही नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण हो रहा है। यह ट्रीटमेंट प्लांट शहर के विस्तार लेने और आने वाले समय में सीवरेज से अधिक पानी प्लांट तक पहुंचने को ध्यान में रखते हुए निर्माण हो रहा है। प्लांट में चौबीस घंटे में 10 एमएलडी पानी ट्रीट हो सकेगा। लेकिन अभी तक करीब 90 फीसदी से अधिक कार्य हो पाया है। करीब 70 करोड़ की लागत से बना तगावली स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडशन कार्य पूर्ण होने पर सीवरेज पानी का ट्रीटमेंट हो पाएगा। अभी गंदा पानी ही पंप से बाहर फेंका जा रहा है जो आसपास भर रहा है। उधर, पुराना एसटीपी प्लांट एनजीटी के नियमों पर पूर्व में खरा नहीं उतर रहा था। जस पर इस प्लांट को अब एसबीआर तकनीक के अनुसार बनाया जा रहा है, जो अधिक पानी को अधिक शुद्धता के साथ बाहर फेंकेगा।
नदी पर संकट के बादल...
चंबल नदी उत्तर भारत की सबसे शुद्ध नदी और प्रदूषण मुक्त नदी गिनती होती है। भारत की जल शक्ति मंत्रालय और विभिन्न पर्यावरण रिपोर्टों के अनुसार मेघालय की उमंगोट नदी देश की सबसे स्वच्छ नदी पहले स्थान पर है। उसके बाद बाद संभवतया यह दूसरी नदी है। यह उत्तर भारत की स्वच्छ नदी में से एक है। राजस्थान में चंबल नदी चित्तौडगढ़़ जिले से प्रवेश कर कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करौली होते हुए धौलपुर बीहड़ किनारे-किनारे यूपी के आगरा जिले में प्रवेश कर जाती है। यह इटावा में यमुना नदी में जाकर मिल जाती है।
चंबल जीवनदायनी, 150 डॉल्फिन
जलीय जीवों के लिए चंबल नदी वर्तमान में जीवनदायनी से कम नहीं है। गत फरवरी 2026 में चंबल नदी में एक जलीय जीव सर्वेक्षण के अनुसार राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में कई जलीय जीवों की अच्छी उपस्थिति रही। इसमें घडिय़ाल की संख्या 2,938, मगरमच्छ का आंकड़ा हजारों में, डॉल्फिन 140-155 तक, इंडियन स्कीमर (पक्षी) 789 और कछुए समेत अन्य जलीवों की मौजूदगी है।
तीन राज्यों में फैली चंबल सेंचुरी
चंबल से जुड़े इलाके राजस्थान, एमपी व यूपी के आते हैं। इन तीनों राज्यों की सीमाओ को छूते हुए करीब 500 किलोमीटर के दायरे में फैली है। सबसे अधिक एरिया 435 किलोमीटर मध्यप्रदेश की सीमा में आता है। वैसे तो चंबल नदी असंख्य जलीय जीवों का बसेरा है, लेकिन राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य सेंचुरी में घडिय़ाल की संख्या सबसे अधिक है।
गंदे पानी से यह बढ़ रहा संकट
1. चंबल नदी में दो तरफ से गंदा पानी जा रहा है। इसमें पुराना शहर और सागरपाडा की तरफ से गंदा पानी तेज बहाव के साथ नदी के पानी में घुल रहा है। सागरपाडा की तरफ से आ रहा नाले का गंदा और मल-मूत्र का पानी नवीन ब्रिज से आगे घाट की तरफ नदी में जा रहा है।
2.एमपी की तरफ से आ रही चंबल नदी देश की साफ पानी वाली नदियों में गिनती है। देश की एकमात्र नदी है जिसमें डॉल्फिन तक उछलकूद करती नजर आ जाएगी। डॉल्फिन भी साफ पानी में रहना पसंद करती हैं। इसके अलावा मगरमच्छ, घडिय़ाल, कछुआ समेत अन्य जलीय जीव यहां निवास करते हैं। ऐसे में गंदे पानी के नदी में जाने से उन पर संकट मंडरा रहा है।
3.चंबल नदी से धौलपुर के साथ भरतपुर जिला समेत आसपास इलाके में पेयजल की सप्लाई होती है। नदी में गंदा पानी गिरने से यह लोगों की सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकता है। वहीं, चंबल नदी में राजाखेड़ा, मनियां और धौलपुर के कई गांवों में पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट प्लांट से आने वाले दिनों में पानी जाएगा।
- चंबल नदी में वैसे से घरेलू या सामान्य गंदा पानी जाना ही नहीं चाहिए। अगर जा रहा है कि फिर नगर परिषद सीधे तौर पर जिम्मेदार है। फिर इनके एसटीपी प्लांट क्या कर रहे हैं। गंदा पानी अगर लो लाइन एरिया का है तो पम्पिंग स्टेशन लगाकर पानी को एसटीपी प्लांट तक छोडऩा चाहिए। बिना ट्रीटमेंट के पानी को छोडऩा तय गाइड लाइंस के विरुद्ध है।
- उमेश कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल भरतपुर
- नदी में पानी जा रहा है तो यह गंभीर मामला है। मैं खुद विजिट कर आगे कार्रवाई करुंगा। बस्ती का पानी आ रहा है तो रुकवाने का प्रयास होगा। इस संबंध में नगर परिषद प्रशासन से वार्ता करेंगे।
- तेजस पाटिल, उप वन संरक्षक चंबल सेंचुरी धौलपुर
- तगावली के पास जो पुरानी एसटीपी प्लांट था, उसे अब 10 एमएलडी का किया जा रहा है। यह करीब एक माह में शुरू हो जाएगा। चंबल नदी की तरफ जो गंदा पानी जा रहा है, उसे एसटीपी प्लांट में डाला जाएगा। गंदे पानी को रोकने के पूरे प्रयास जारी है
।- विष्णु परमार, आयुक्त नगर परिषद धौलपुर