
धौलपुर. शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने अब ठेकेदार नगर परिषद को सफाई कर्मचारी उपलब्ध कराएंगे। दरअसल परिषद ने सीएलसी टेंडर पद्धति को खत्म कर यह कार्य ठेकेदारों को सौंप दिया है। जिसके लिए शहर के चार जोनों का वाकायदा ठेका किया गया और जिसके वर्कओर्डर भी जारी कर दिए गए हैं। यह ठेकेदार परिषद की मांग के अनुसार सफाई कर्मचारी उपलब्ध कराएंगे।
शहर की सफाई व्यवस्था किसी से छुपी नहीं। चहुंओर फैली गंदगी और जगह-जगह लगते कचरे के ढेर शहर की आवोहवा को खराब कर रहे हैं तो वहीं बीमारी और शहर की बदरंग छंटा को और बदहाल करने पर उतारू हैं। परिषद ने शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने कई कदम भी उठाए। जिनमें डोर टू डोर कचरा संग्रहण से लेकर रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था भी लागू की थी, लेकिन इन सबका परिणाम शून्य ही निकला। गंदगी और सड़ते कचरे के कारण मच्छरों व मक्खियों का प्रकोप बढ़ता है, जिससे स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि अब परिषद सफाई व्यवस्था को लेकर एक और प्रयोग करने जा रहा है। इसके तहत चार जोनों की सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता को ठेकेदार के माध्यम से कराने टेंडर जारी किए गए हैं। इस कड़ी में परिषद ने उन 95 सफाई कर्मचारियों को भी रिलीव कर दिया जो सीएलसी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कार्य कर रहे थे। अब यह सफाई कर्मचारी ठेकेदारों के माध्यम से ही कार्य करेंगे। ठेकेदार इनको सीएलसी के तहत 287 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से वेतन और 3 प्रतिशत ईएसआई और 25 प्रतिशत पीएफ का भी भुगतान करेगा। इसके अलावा चार जोन (गुलाब बाग, कोठी क्षेत्र, जिरोली और शहर) के ठेकेदार परिषद की मांग के अनुसार सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता भी कराएंगे।
लगभग 160 सफाई कर्मचारियों की जरूरत
नगर परिषद में संसाधनों के साथ सफाई कर्मचारियों का भारी टोटा है। परिषद में लगभग 250 सफाई कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। जिनमें से ९५ सीएलसी के तहत कार्यरत थे जो अब ठेकेदार की तरफ से परिषद को उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे अब शेष कर्मचारी परिषद के अधीन कार्य कर रहे हैं, जबकि अभी भी शहर की सफाई व्यवस्था को देखते हुए परिषद को प्रत्येक जोन के हिसाब से 160 सफाई कर्मचारियों की और जरूरत है, जिससे सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके। इसके अलावा सफाई में उपयोग होने वाले संसाधनों के अभाव का भी एक मुख्य कारण है जिससे अव्यवस्थाएं फैल रही हैं। शहर के 80 कचरा प्वाइंटों पर परिषद की ओर से केवल 8 ट्रेक्टर और केवल 3 लोडर लगा रखे हैं, तो वहीं एक ट्रेक्टर पर 2 ही सफाई कर्मचारियों को तैनात किया गया है। देखा जाए तो 80 कचरा प्वाइंटों से कचरा उठान के लिए इससे ज्यादा कर्मी और संसाधनों की आवश्यकता होती है और यही कारण है कि शहर में दोपहर तक सडक़ों से कचरा उठाया जा रहा है।
संसाधनों का भारी अभाव...टिपर, ट्रेक्टर पड़े खराब
यही हालत शहर में घर-घर से कचरा उठान को लेकर देखी जा रही हैं। जहां संचालित होने वाली टिपरों के खराब होने से अब घरों से कचरा उठना लगभग बंद सा हो गया है। जानकारी के अनुसार परिषद ने लगभग 20 ऑटो टिपर प्रारंभ की थीं, जो घर-घर से कचरा उठाने का कार्य करती थीं, लेकिन देख-रेख के अभाव के कारण आज केवल 3 ऑटो टिपर ही घर-घर से कचरा उठाने का कार्य कर रही हैं, शेष 17 ऑटो टिपर परिषद के परिसर में कबाड़ा हो रही हैं। इसके अलावा परिषद के 2 डंपर भी खराब हालत में पड़े हुए हैं। शहर की अव्यवस्थित होती सफाई व्यवस्था के बाद भी परिषद अभी तक इन संसाधनों को दुरुस्त तक नहीं करा पाई है। यही कारण है कि शहर की सफाई व्यवस्था दिन-प्रतिदिन बेहाल होती जा रही है। लोग घरों से निकलने वाले कचरे को सडक़ों या फिर अन्यंत्र जगहों पर फेंकने को मजबूर हो रहे हैं। यही नहीं गत दिनों सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने रात्रिकालीन सफाई भी प्रारंभ की गई थी, जो कुछ दिनों तक ठीक ठाक रही, लेकिन जमीनीस्तर पर मॉनिटरिंग और कर्मचारियों का अभाव के कारण परिषद की यह योजना भी ठण्डी हो गई और शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर परिषद की कार्यप्रणाली को उजागर करते हैं।