धौलपुर

Jagan Gurjar: राजस्थान-MP में जगन गुर्जर के नाम से कांपते थे बीहड़, 1998-2001 तक चंबल में था आतंक, अब डांग दस्यु विहीन

Chambal Dacoit Jagan Gurjar: 1998 से 2001 के बीच दहशत फैलाने वाले जगन ने बाबू महाराज मंदिर में पहला सरेंडर किया था और अब पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार धौलपुर के डांग और बीहड़ पूरी तरह दस्यु विहीन हैं।
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Jul 03, 2026
chambal Dakait Jagan Gurjarr
बाबू महाराज मदिंर के पीछे बीहड़ का वो इलाका जहां पप्पू गुर्जर और पुलिस के बीच तत्कालीन SP मृदुल कच्छावाह के वक्त एनकांटर हुआ था, जिसमें जगन का भाई पप्पू भाग निकला था और इनसेट में जगन गुर्जर (फोटो: पत्रिका)

Patrika Exclusive: राजस्थान समेत UP और MP तक फैले चंबल क्षेत्र में कई सालों तक बीहड़ में बंदूक और बागियों (दस्युओं) की वारदातों से पुलिस थानों में सैकड़ों एफआइआर दर्ज हुई और आतंक बढ़ा तो पुलिस ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया और कई एनकाउंटर हुए जिसमें कई नामी दस्यु मारे गए तो जांबाज पुलिसकर्मी शहीद हुए। प्रदेश के पूर्वी राजस्थान के छोटे से जिले धौलपुर के बीहड़ भी दस्युओं से अछूते नहीं रहे।

कई दस्युओं की पनाहगाह रहे बीहड़ अब डकैत विहीन है। इसकी गवाही पुलिस रेकॉर्ड भी देता है। SP विकास सांगवान कहते है कि आधिकारिक तौर पर वर्तमान में कोई सक्रिय दस्यु नहीं है, जो है वह न्यायिक अभिरक्षा में जेल की चारदीवारी के भीतर हैं। वहीं चंबल के बीहड़ और डांग में जिसके नाम का खौफ था और राजस्थान और एमपी में दहशत थी, वह भी अब डांग में शांत हो गया।

पूर्व इनामी दस्यु जगन गुर्जर भी अब कहानी बन गया। लेकिन जगन गुर्जर ने लम्बे समय तक बीहड़ और डांग में अपनी दहशत रखी और गिरोह कब फायरिंग कर जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता था। जिले में साल 1998 से 2001 के बीच पूर्व दस्यु जगन गुर्जर गिरोह धौलपुर समेत करौली, भरतपुर के बयाना उपखंड और पड़ोसी प्रदेश MP के मुरैना जिले में भारी आतंक था। उस वक्त सरकार की ओर से सख्ती से निपटने के निर्देश थे। जिस पर तत्कालीन एसपी गोविंद गुप्ता से शुरुआत हुई और फिर बीजू जॉर्ज जोसेफ ने डांग और बीहड़ों में पुलिस का मजबूती से अहसास कराया और फिर दस्युओं और पुलिस टीम के बीच भागम-भाग का दौर शुरू हुआ।

पुलिस की डांग और बीहड़ में लगातार कॉम्बिंग और भारी दबाव के चलते पहली दफा पूर्व दस्यु जगन गुर्जर ने आज के सोने का गुर्जा थाना क्षेत्र के बाबू महाराज मंदिर (थान) पर तत्कालीन SP बीजू जॉर्ज जोसेफ के समक्ष सरेंडर किया। इस सरेंडर के पीछे पुलिस की मजबूत टीम और तत्कालीन बाड़ी सीओ केसर सिंह शेखावत का भी अहम किरदार रहा। जो बाद में धौलपुर एसपी भी रहे।

पूर्व दस्यु ने चार बार किया आत्मसमर्पण

2001तत्कालीन धौलपुर एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के समक्ष
30 जनवरी 2009करौली के देवनारायण मेले में
19 अगस्त 2018तत्कालीन भरतपुर रेंज आइजी मालिनी अग्रवाल के समक्ष
फरवरी 2022करौली पुलिस के समक्ष

यूं बना दबाव… करौली में दिनेश और MP के मुरैना में भी थे सख्त पुलिस 'कप्तान'

बता दें कि उस समय धौलपुर, करौली जिले और मुरैना पुलिस दस्युओं के आतंक से परेशान थी। जिस पर तीनों जिलों के तत्कालीन एसपी में धौलपुर से बीजू जॉर्ज जोसेफ, करौली में एमएन दिनेश और पड़ोसी जिले मुरैना के पुलिस कप्तान ने अपनी टीम के साथ मंत्रणा की और फिर साफ संदेश दिया कि दस्युओं की गतिविधियों पर सख्ती से लगाम लगानी होगी। जिस पर इन जिलों की तरफ मिले इनपुट पर नियमित कॉम्बिंग शुरू की गई। टीमें बीहड़ों में रहती थी और दो दिन बाद दूसरी टीम मोर्चा संभालती थी। जिससे दस्युओं के पसीने छूटने लगे और एनकाउंटर में कुछ मारे गए। जिस पर दबाव की रणनीति काम आई और जगन ने सरेंडर कर दिया। लेकिन इससे पहले पुलिस और गिरोह के बीच कई दफा आमने-सामने खूब फायरिंग हुई लेकिन भौगोलिक स्थिति का दस्युओं को फायदा भी मिला।

कई किलोमीटर तक किया पीछा… तो फिर किया सरेंडर

डांग में 1998 से 2001 के बीच अलग-अलग दस्युओं का आतंक था। आए दिन फायरिंग और धमकाने की कहानी आम हो चलीं थी। जिस पर साल 2000 में पुलिस ने डांग और बीहड़ में सख्ती से कॉम्बिंग शुरू की गई। यह सर्च ऑपरेशन एक दिन में करीब 40 से 50 किलोमीटर तक चलता था। पुलिस टीम के लगातार पीछा करने और इस दौरान दस्यु हरिओम और राम लखन के एनकाउंटर में मारे जाने से अन्य पर दबाव बना। जिसमें जगन गुर्जर भी शामिल था।

पुलिस टीम ने बीहड़ों में घेराबंदी करने से रातों की नींद उड़ने लगी। सूत्रों के अनुसार पूर्व दस्यु जगन ने तत्कालीन बाड़ी सीओ शेखावत तक मैसेज भिजवाया। मध्यस्थता पर जगन ने अपने गांव भवूतीपुरा के पास बाबू महाराज मंदिर पर आने की बात कही। तत्कालीन एसपी जोसेफ व बाड़ी सीओ दल-बल के साथ पहुंचे और यहां अचानक से जगन पहुंचा और सरेंडर कर दिया। यह पहला सरेंडर था। साल 2018 में भी घेराबंदी करने पर जगन ने तत्कालीन आइजी मालिनी अग्रवाल के समक्ष बयाना थाने में सरेंडर किया। उस वक्त भरतपुर में एसपी शेखावत थे।

मुख्यधारा से जोड़ने पर दिया जोर

उधर, पुलिस प्रशासन ने दस्यु गिरोहों को उनके मध्यस्थों के जरिए हथियार डालने और मुख्यधारा में शामिल होने का भी संदेश भिजवाने का कार्य जारी रखा। इसमें इलाके के राजनेताओं और कुछ व्यक्तियों का सहयोग भी लिया गया। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरेंडर कर मुख्यधारा में आए, नहीं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। जिसका कुछ असर भी दिखा। जगन का पहला सरेंडर इसी का परिणाम था। जगन के सरेंडर में मुख्य किरदार तत्कालीन सीओ बाड़ी शेखावत को उस समय के डीजीपी शांतनु कुमार ने प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया था।

जिले में वर्तमान में हमारे रिकॉर्ड अनुसार अब कोई दस्यु नहीं है। जो हैं वह जेलों में बंद है लेकिन सक्रिय और बाहर कोई नहीं है। पुलिस सूची में केवल इनामी बदमाश हैं, जिनके खिलाफ भी पुलिस लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई करती है।
विकास सांगवान, पुलिस अधीक्षक धौलपुर

जगन पर राजस्थान व एमपी में कुल दर्ज केसों की 128

केस में बरी78
ट्रायल में16
दोष सिद्ध08
जमानत खारिज01
जांचाधीन06
अन्य मामले10
MP में दर्ज मामले09
Updated on:
03 Jul 2026 07:50 am
Published on:
03 Jul 2026 07:41 am