धौलपुर. करीब 15 साल पुराने फायरिंग जानलेवा हमले के मामले में विशिष्ट न्यायालय डकैती प्रभावित क्षेत्र धौलपुर ने फैसला सुनाते हुए एक डकैत को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उसे 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। मामला 19 जून 2011 का है। जहां बसई डांग के […]
धौलपुर. करीब 15 साल पुराने फायरिंग जानलेवा हमले के मामले में विशिष्ट न्यायालय डकैती प्रभावित क्षेत्र धौलपुर ने फैसला सुनाते हुए एक डकैत को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उसे 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। मामला 19 जून 2011 का है। जहां बसई डांग के तत्कालीन थाना प्रभारी व पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर फायरिंग की थी, जिसमें थाना प्रभारी कैलाश चंद मीणा बाल बाल बच गए थे।
लोक अभियोजक सतीश शर्मा ने बताया कि बसई डांग के तत्कालीन थाना प्रभारी कैलाश चंद मीणा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया था कि डकैत केदार गुर्जर व उसके साथियों के चचोखर के जंगल में छिपे होने की सूचना मिली थी। सूचना पर चचोखर के जंगल में पहुंचेए जहां डकैत केदार गुर्जर व उसके साथियों से सरेंडर करने को कहा गया। लेकिन डकैतों ने खुद को घिरता देख फायरिंग शुरू कर दीए जिसमें गोली लगने वे बाल बाल बच गए।
मुठभेड़ के बाद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करते हुए कोर्ट में चालान पेश किया गया। इसी प्रकरण में लंबी न्यायिक प्रक्रिया एवं साक्ष्यों के परीक्षण के बाद डकैती कोर्ट के न्यायाधीश राकेश गोयल ने मामले में दोषी मानते हुए डकैत केदार गुर्जर पुत्र फेरन गुर्जर निवासी भोला का पुरा बाड़ी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उसे 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास और भुगतना पड़ेगा।