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शहर में जलभराव और सीवरेज बड़ी समस्या, दर्जनों कॉलोनियां अभी तक जलमग्न

– जलभराव और सीवरेज बड़ी समस्या, सैकड़ों कॉलोनियां अभी तक जलमग्न – हजारों रुपए खर्च कर मिट्टी और पत्थर डलवा कर रास्ता बनाया, फिर भी राहत नहीं – बीते दो साल से हालात बेहद गंभीर, रहवासी लड़ रहे जंग धौलपुर. धौलपुर. वर्तमान में शहर का एक बड़ा हिस्सा जलभराव और सीवरेज समस्या से जंग लड़ […]

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शहर में जलभराव और सीवरेज बड़ी समस्या, दर्जनों कॉलोनियां अभी तक जलमग्न Waterlogging and sewerage are major problems in the city, with dozens of colonies still submerged

- जलभराव और सीवरेज बड़ी समस्या, सैकड़ों कॉलोनियां अभी तक जलमग्न

- हजारों रुपए खर्च कर मिट्टी और पत्थर डलवा कर रास्ता बनाया, फिर भी राहत नहीं

- बीते दो साल से हालात बेहद गंभीर, रहवासी लड़ रहे जंग

धौलपुर. धौलपुर. वर्तमान में शहर का एक बड़ा हिस्सा जलभराव और सीवरेज समस्या से जंग लड़ रहा है। हाल ये है कि गंदे पानी में होकर आम आदमी निकल रहा है और फिर सुबह उसकी पानी में होकर काम पर जा रहा है। जबकि नगर परिषद का दावा है कि काफी सुधार हुआ है। सुधार ये हुआ है कि कच्चे नाले खोद कर इस दफा बरसाती पानी निकाला गया गया, जो सुखद था। लेकिन समस्या का समाधान अभी कोसों मील दूर है। वजह नगर परिषद पर नाले पक्के करने तक पैसे नहीं है। राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज रखा है लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। हाल ये है कि धौलपुर से विकास की फाइलें जयपुर जाकर लटक जाती हैं। गत दिनों काफी हो-हल्ला होने के बाद शहरी क्षेत्र में सीसी सडक़ों की फाइल बाहर निकल कर आई। वहीं, नगर परिषद के अधिकारी हो या प्रशासन के हो...एक ही जवाब है प्रस्ताव भेज रखे हैं, बजट मिलने पर कार्य शुरू करवाया जाएगा। लेकिन बजट कब मिलेगा...कोई पता नहीं। वर्तमान में कई सैकड़ों कॉलोनियों में जलभराव और सीवरेज की समस्या है। एक संस्था का दावा है कि शहर की करीब 66 कॉलोनियों में वर्तमान में हालात खराब हैं।

राजधानी में रहते हैं लोग...धौलपुर हिस्सा नहीं

अब तो लोगों में इस हद तक नाराजगी है कि वह कहते हैं राजधानी जयपुर में ड्रेनेज सिस्टम सुधार के लिए बजट में 500 करोड़, अजमेर को 200 करोड़ की राशि के प्रस्ताव स्वीकृत करने का आश्वासन दिया है। क्या धौलपुर राजस्थान का हिस्सा नहीं है क्या...। वहीं, बजट में बजट में 320 करोड़ रुपए से भरतपुर, अलवर, बांसवाड़ा, कोटा, चूरू, पाली और नागौर के नगरीय क्षेत्रों में ड्रेनेज के कार्य करने का प्रस्ताव किया गया है। 40 करोड़ रुपए खर्च करते हुए जिला स्तरीय निकायों में ड्रेनेज पर खर्च करने का प्रावधान वित्तीय वर्ष 2026 से मार्च 2027 तक के लिए प्रावधान किया गया है।

हाइवे किनारे नाले तक नहीं बन सके...

कॉलोनियों तो डूब ही रही हैं लेकिन शहर में होकर गुजर रहे हाइवे 44, एनएच 11बी और एनएच 123 किनारे के नाले अभी तक अधूरे पड़े हैं। नगर परिषद कहती है कि एनएचएआई बनाएगी तो हाइवे एजेंसी कहती है कि यह कार्य नगर परिषद का है। एक दूसरे के पाले में काफी वक्त से गेंद फेंकी जा रही है। हालात विकट होने पर जिला कलक्टर की कड़ी चेतावनी के बाद ही एनएचएआई की एजेंसियां नींद से जागती हैं। इससे पूर्व हाइवे 44 स्थित किनारे अतिक्रमण को हटवाया गया लेकिन उसके बाद भी जलभराव की समस्या जस की तस है। सर्विस लेन आज भी पानी में जलमग्न हैं। हालांकि, एक हिस्से से पानी निकाला गया है लेकिन इसको राहत नहीं कह सकते।

डे्रेनेज सिस्टम सुधारने को भेज रखे हैं 260 करोड़ के प्रस्ताव

शहर की सैकड़ों की कॉलोनियों ड्रेनेज सिस्टम सुधारने के लिए नगर परिषद प्रशासन ने पूर्व में करीब 260 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है। हालांकि, अभी एक धेला भी पैसा नहीं मिला है। हालांकि, हाल में पेश हुए बजट में कुछ राशि का जिक्र है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह किस मद में खर्च होगी।

एनजीटी के आदेश की भी पालना नहीं...

जलभराव समस्या को लेकर स्थाई लोक अदालत धौलपुर ने गत 8 जनवरी 2025 को पारित निर्णय एवं एनजीटी के क्षेत्रीय न्यायालय भोपाल की ओर से गत 16 जुलाई 2025 को पारित निर्णय की पालना के निदान के लिए 260 करोड रुपए का प्रस्ताव निदेशक स्वायत्त शासन विभाग जयपुर को 27 जनवरी 2025 को भेजा गया था। जिसको 11 फरवरी 2026 को राजस्थान सरकार घोषित बजट में प्रावधान नहीं हुआ।

क्या कहते हैं आयुक्त कर्मवीर सिंह

- शहर के आउटर में बसी कई कॉलोनी आज भी कृषि भूमि पर हैं। यहां पर जल निकासी के लिए जगह तक नहीं है। पानी छोडऩे पर विवाद होता है। मैंने तीन दफा खोंसला कॉलोनी का जायजा लिया। वहां पर जगह ही नहीं है। लेकिन परिषद रेलवे नाले के पानी को एक नाले के जरिए ओडेला ताल की तरफ पानी निकलवाने का प्लान बना रहा है। इसके लिए जगह अधिग्रहण करनी होगी और मुआवजा देने के बाद नाला निर्माण होगा। जिससे बरसात के दनों में पानी दूसरी तरफ आसानी से निकल सकेगा। तब तक अस्थाई कच्चा नाला खुदवाया है।

- न्यायालय के आदेशों की अवमानना से बचने के लिए प्रशासन की ओर से करोड़ों के प्रस्ताव तो सरकार को भेज दिए। लेकिन अभी तक कोई राशि नहीं मिली है। कॉलोनियांं अभी तक पानी में डूब रही हैं। अगर जल्द कोई प्रयास नहीं हुए तो आगामी मानसून सीजन भारी पड़ सकता है। लोगों के मकान टूट रहे हैं लेकिन सिस्टम को कोई फर्क नहीं है। लोग घरों में कैद होकर रह गए हैे।

- अमित जादौन, सचिव मुस्कान सोसायटी