
कुख्यात डकैत Jagan Gurjar का अंतिम संस्कार धौलपुर जिले के बाड़ी उपखंड क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव भवुतीपुरा में संपन्न हुआ। जगन गुर्जर को उसके बेटे आसाराम ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में भाई लाल सिंह, पान सिंह और पप्पू भी शामिल हुए, जिन्हें पुलिस सुरक्षा के बीच हथकड़ी लगाकर लाया गया। अंतिम विदाई के इन भावुक पलों के दौरान जगन गुर्जर परिवार के बेहद करीबी रिश्तेदारों को ही चिता के बिल्कुल नजदीक रहने की अनुमति दी गई थी। अंतिम संस्कार को देखने के लिए भवुतीपुरा और उसके आस-पास के गांवों से 5,000 से अधिक लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी। पुलिस ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्मशान घाट के चारों तरफ सख्त घेराबंदी की हुई थी। सुबह जब कड़ी सुरक्षा में जगन गुर्जर का शव गांव पहुंचा, तो वहां से लेकर चंबल नदी के किनारे श्मशान घाट तक का पूरा इलाका भारी पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया।
जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार की खबर सुनकर आस-पास के दर्जनों गांवों से भारी संख्या में लोग और उसके समर्थक भवुतीपुरा पहुंचने लगे थे। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए भारी पुलिस फ़ोर्स तैनात रही। आम जनता की भीड़ को चिता के पास जाने से पूरी तरह रोक दिया गया था। केवल अधिकृत ग्रामीणों और परिवार के बेहद करीबी लोगों को ही बैरिकेड्स के अंदर जाने की अनुमति दी गई।
अंतिम संस्कार के बाद मीडिया से बात करते हुए जगन के भाई पप्पू गुर्जर ने कई गंभीर आरोप लगाए। पप्पू गुर्जर ने हत्या की साजिश करने के आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी विष्णु अकेले हत्या नहीं कर सकता, इसके पीछे ज़रूर और भी लोग शामिल होंगे।
इधर अंतिम संस्कार के दौरान जगन गुर्जर के पुत्र आसाराम ने कहा कि उसके पिता की हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
चंबल के बीहड़ों और भवुतीपुरा गांव की संवेदनशीलता को देखते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए थे। अंतिम संस्कार के दौरान पूरे इलाके में 500 से अधिक पुलिसकर्मियों और आरएसी की विशेष टुकड़ियों को तैनात किया गया था। किसी भी असामाजिक तत्व या संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखने के लिए पूरे श्मशान घाट और चंबल किनारे के बीहड़ी रास्तों की ड्रोन कैमरों के जरिए एरियल निगरानी की जा रही थी।
इस पूरे हत्याकांड में कानूनी मोर्चे पर भी एक बड़ी हलचल सामने आई है। अंतिम संस्कार स्थल पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जगन गुर्जर के बेटों द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर अजमेर जेल प्रशासन और उस बैरक में बंद साथी कैदियों के खिलाफ हत्या (IPC/BNS की संबंधित धाराएं) और आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज कर लिया गया है।
सीसीटीवी मरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगाकर इस वारदात को अंजाम देने के सनसनीखेज पहलू को लेकर उच्च स्तरीय न्यायिक जांच भी शुरू कर दी गई है। चंबल किनारे अंतिम संस्कार संपन्न होने के बाद भी एहतियात के तौर पर पूरे भवुतीपुरा क्षेत्र में पुलिस बल को तैनात रखा गया है।
जगन गुर्जर के परिवार की एक मुख्य मांग यह भी थी कि जेल में बंद उसके भाई पप्पू गुर्जर को अंतिम विदाई में शामिल होने का मौका दिया जाए। प्रशासन ने इस मांग को स्वीकार करते हुए पप्पू गुर्जर को विशेष पैरोल मंजूर की। पप्पू गुर्जर को कड़ी पुलिस कस्टडी के बीच उसके पैतृक गांव भवुतीपुरा लाया गया ताकि वह अपने भाई जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल हो सके। इस दौरान गांव में सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद रखी गई है।
मृतक जगन गुर्जर का सभी परिजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। विशेष तौर से अलग-अलग जेलों में बंद जगन के तीन भाई भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। बता दें कि एक भाई पप्पू गुर्जर अजमेर जेल से धौलपुर, पजबकि दो अन्य भाई धौलपुर जेल से पहुंच।
जगन गुर्जर के बेटे आसाराम ने जेल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए गहरा आक्रोश जताया है। आसाराम का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। परिजनों के भारी विरोध के बाद प्रशासन ने जिन मुख्य मांगों को लिखित में माना है, वे इस प्रकार हैं:
जगन गुर्जर हत्याकांड की पूरी तरह से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
जगन गुर्जर के परिवार के सदस्यों और जेल में बंद उसके भाई पप्पू गुर्जर को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
लापरवाही बरतने वाले जेल अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मामले की गंभीरता और बढ़ते आक्रोश को देखते हुए एसपी सिटी हिमांशु जांगिड़ और प्रशासन की टीम ने परिजनों से लंबी बातचीत की। आखिरकार काफी मशक्कत के बाद प्रशासन और पीड़ित परिवार के बीच एक लिखित सहमति बनी। इस लिखित समझौते के बाद ही परिजन धरने से उठे और मेडिकल बोर्ड द्वारा जगन गुर्जर के शव का पोस्टमार्टम किया जा सका। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद देर रात शव को परिजनों के सुपुर्द कर धौलपुर के लिए रवाना किया गया।
जगन गुर्जर की हत्या की खबर मिलते ही उसके परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण अजमेर पहुंच गए थे। अजमेर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय (JLN) की मोर्चरी के बाहर परिजनों और ग्रामीणों ने करीब 30 घंटे तक जोरदार धरना प्रदर्शन किया। परिजनों का साफ कहना था कि जब तक प्रशासन उनकी मांगें लिखित में नहीं मानता, तब तक वे शव का पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे। इस गतिरोध के कारण अस्पताल परिसर में भारी तनाव बना रहा और पुलिस को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े।
Ajmer High Security Jail की सुरक्षा व्यवस्था पर इस घटना ने बहुत बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। जगन गुर्जर जिस हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद था, वहां लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे के लेंस पर वारदात से ठीक पहले टूथपेस्ट लगा दिया गया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हत्या की लाइव रिकॉर्डिंग न हो सके और जेल प्रशासन को भनक न लगे।
शुरुआती अंदरूनी जांच और खुफिया जानकारी के अनुसार, बैरक के अंदर जगन गुर्जर का तौलिये से गला दबाकर इस हत्या को अंजाम दिया गया है। इस पूरी साजिश और वारदात के पीछे भरतपुर के एक अन्य चर्चित हत्याकांड के आरोपी का नाम सामने आ रहा है, जो उसी जेल में बंद है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि हाई सिक्योरिटी जोन में टूथपेस्ट और इस तरह की वारदात को अंजाम देने की प्लानिंग कैसे की गई और इसमें जेल स्टाफ की क्या भूमिका थी।