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Dholpur: संवरी विरासत…30 साल बाद फिर धडक़ने लगीं घण्टाघर की धडक़नें

लगभग 30 साल बाद धौलपर के एतिहासिक घण्टाघर में लगी घड़ी की धडक़नें फिर धडक़ने लगी हैं। नगर परिषद के सहयोग से फिर एतिहासिक घण्टा घर का पुराना स्वरूप लौटने जा रहा है। जिसको लेकर नगर परिषद ने 6 लाख की लागत से घड़ी के कलपुर्जे मंगा इसको दुरुस्त कराया।
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Dholpur news

ऐतिहासिक घंटाघर में लगाई गई घड़ी

धौलपुर. लगभग 30 साल बाद एतिहासिक घण्टाघर में लगी घड़ी की धडक़नें फिर धडक़ने लगी हैं। जिसकी गूंज शहवासियों को फिर सुनाई देगी। यह घड़ी 1995 से बंद पड़ी हुई थी, जिसे नगर परिषद ने मशक्कत कर नया रूप दिया गया। हालांकि इससे पहले भी घडिय़ों को सही करने की कोशिश की गईं थीं, लेकिन मटेरियल नहीं मिलने से घडिय़ों टन-टन खामोस ही रही।

धौलपुर का घंटाघर जिसे स्थानीय रूप से निहाल टावर कहा जाता है। राजस्थान के धौलपुर शहर में टाउन हॉल रोड पर स्थित 150 फीट ऊंची एक ऐतिहासिक आठ मंजिला इमारत है। इसे भारत के सबसे ऊंचे घंटाघरों में गिना जाता है, जिसका निर्माण कार्य राजा निहाल सिंह ने 1880 में शुरू किया था और 1910 में महाराजा राम सिंह के समय पूरा हुआ था। इतिहासकार बताते हैं कि इस पर लगी 600 किलोग्राम वजनी घड़ी को 150 से पहले इंग्लैण्ड से मंगवाया गया था। घड़ी की ध्वनि को लगभग 8 किमी तक सुना जा सकता था, लेकिन समय के साथ घडिय़ों की सुई की रफ्तार भी थम गई। एतिहासिक घड़ी होने के कारण इसके कलपुर्जे नहीं मिलने के कारण घड़ी का स्वरूप भी धीरे-धीरे बदल गया। लेकिन समय की मार ने इस घड़ी को फिर खामोश कर दिया और लगभग30 सालों से धौलपुर की शान घंटा घर की सुइयां का समय अवरुद्ध हो गया।

जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और नगर परिषद के सहयोग से फिर एतिहासिक घण्टा घर का पुराना स्वरूप लौटने जा रहा है। जिसको लेकर नगर परिषद ने जहां 6 लाख की लागत से घड़ी के कलपुर्जे मंगा इसको दुरुस्त कराया। घड़ी को दुरुस्त करने के लिए दिल्ली से ही मेकेनिकों को बुलाया गया और 2 से3 दिनों में घड़ी को नया स्वरूप दिया गया और चारों ओर इन घडिय़ों को लगाया गया है। इसके अलावा घण्टाघर की चारों ओर स्टील की रेलिंग व फेंसिंग भी कराई गई है। नई दिल्ली से बैटरी और लाइट से चलने वाली विशाल घडिय़ों से अब घण्टाघर आबाद हो रहा है।

परिषद की मानें तो जल्द ही घण्टाघर का संवारा जाएगा। जिसके लिए उसकी रंगाई पुताई और चारों तरफ से रेलिंग भी लगाई जाएगी साथ ही स्थल को सुंदर बनाने के लिए पौधों के गमले लगा घण्टाघर को शहर का सेल्फी प्वाइंट बनाया जाएगा। घण्टाघर में जगमगाती रोशनी भी की जाएगी जो रात्रि में लोगों का मन मोह लेगी।

घण्टाघर में लगी घडिय़ों को दुरुस्त करा दिया गया है। परिषद स्थल को सेल्फी प्वाइंट बनाने पर कार्य कर रहा है। जिसके लिए ऐतिहासिक इमारत की डेंटिंग पेंटिंग से लेकर रेलिंग और लाइटिंग भी की जाएगी। आने वाले दिनों में घण्टाघर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।

विष्णु परमार, नगर आयुक्त

जिला प्रशासन और नगर परिषद के सहयोग से सालों से बंद ऐतिहासिक घण्टाघर की घडिय़ां फिर प्रारंभ हो गई हैं। यह शहरवासियों के लिए सुखद बात है। यह एतिहासिक धरोहरें शहरवासियों की विशेष पूंजी होती हैं जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन और नगर परिषद का कदम सराहनीय है।

अरविंद शर्मा, इतिहासकार