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Dholpur: जिले में 25 साल बाद भी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर राजकीय भवनों का नामकरण नहीं

5 मार्च 2000 को तत्कालीन सरकार ने जिले के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने और उनके नाम पर राजकीय भवनों का नामकरण करने प्रस्ताव का पारित किया था। जिला प्रशासन सहित राज्य सरकार पिछले 25 सालों से इनको इनका अधिकार नहीं दिला सके हैं। सैनानियों के परिजन इनके नाम पर राजकीय भवनों के नामकरण को लेकर जिला मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं,
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Dholpur news

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों को दिया गया ताम्रपत्र

धौलपुर. देश की स्वतंत्रता में योगदान देने वाले जिले के 15 स्वतंत्रता सेनानी आज अपने ही शहर, जिला और राज्य में भुला दिए गए हैं। जिला प्रशासन सहित राज्य सरकार पिछले 25 सालों से इनको इनका अधिकार नहीं दिला सके हैं। सैनानियों के परिजन इनके नाम पर राजकीय भवनों के नामकरण को लेकर जिला मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन शासन के आदेशों के बावजूद भी अभी तक इनके हाथ खाली हैं।

15 अगस्त, 26 जनवरी सहित राष्ट्रीय दिवसों पर एक ओर जहां हम अपने स्वतंत्रता दिलाने वाले देश के हीरो और स्वतंत्रता सैनानियों को याद कर उन्हें सम्मानित कर उनका अभिनंदन करते हैं, तो वहीं धौलपुर जिले में स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्वतंत्रता सैनानियों की कोई सुध लेने वाला नहीं। दरअसल 5 मार्च 2000 को तत्कालीन सरकार ने जिले के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने और उनके नाम पर राजकीय भवनों का नामकरण करने प्रस्ताव पारित किया था। जिसके बाद जिले के स्वतंत्रता सेनानियों की सूचना भी मांगी गई। आदेशों के बाद जिला स्तरीय अभिशंषा समिति ने 21 सैनानियों के नामों की सूची राज्य सरकार को भेजी। जिसमें से राज्य सरकार ने 5 स्वतंत्रता सेनानियों के नामों की स्वीकृति जारी उनके नाम पर राजकीय भवनों का नामकरण करने के आदेश जारी किए, लेकिन आदेशों के बाद भी जिला प्रशासन सहित संबंधित विभागों के बीच राजकीय भवनों के नामकरण की फाइलें इधर से उधर घूमती रहीं, लेकिन नामकरण नहीं हो सका और अब ना ही जिला प्रशासन और ना ही राज्य सरकार इन सैनानियों की सुध ले रहे और इतने सालों बाद भी स्वतंत्रता सैनानियों के परिजन जिला कलक्ट्रेट के चक्कर लगाते रहे।

कलक्टर के आदेशों तक का पालन नहीं

2024 में वर्तमान जिलाधिकारी श्रीनिधि बीटी के आने के बाद सेनानियों के परिजनों में नामकरण को लेकर उत्साह जागा। परिजनों के डीएम से मुलाकात के बाद वह भी एक्टिव हो गए और उन्होंने राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 5 स्वतंत्रता सेनानियों के नामों पर राजकीय भवनों का नामकरण करने संबंधित विभागों को आदेशित भी किया, लेकिन तत्कालीन विभागों के मुखियाओं ने जिलाधिकारी के आदेशों की पालना करना मुनासिब ही नहीं समझा। यही नहीं जिलाधिकारी के दोबारा स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों की लिस्ट मांगने और जिला स्तरीय अभिशंषा समिति द्वारा स्वीकृत 10 स्वतंत्रता सेनानियों की लिस्ट भी संबंधित विभागों में सिर फुटब्बल होती रही, जबकि इन 15 नामों में 2 शहीद स्वतंत्रता सेनानी भी शामिल हैं, लेकिन 25 साल गुजर जाने के बाद भी इन स्वतंत्रता सैनानियों को इनका अधिकार नहीं मिल सका और इनके परिजन आज भी इधर से उधर भटक रहे हैं।

राजनीतिक रसूख में किया नामकरण

अगर राजनीतिक रसूख है तो कई चीजें आसान हो जाती हैं। इसकी बानगी स्वतंत्रता सेनानियों के राजकीय भवनों के नामकरण मामले में भी देखने को मिली, जब 2002 में चुनावी सभा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तत्कालीन कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव मोहनप्रकाश शर्मा के पिता स्वतंत्रता सेनानी डॉ. मंगल सिंह के नाम से जिला चिकित्सालय के निर्माण की घोषणा कर दी, जबकि राज्य शासन ने पहले उनके नाम से आयुर्वेद चिकित्सालय भवन के नामकरण के आदेश दिए थे। सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन भी तत्काल हरकर में आया और जिला अस्पताल का नाम डॉ. मंगल सिंह कर दिया, लेकिन शेष स्वतंत्रता सैनानी जो राजनीतिक रसूख नहीं रखते वह आज भी अपने नाम को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

शहीद स्मारक पर लगेगी पट्टिका, कार्मिकों की खिंचाई

उधर, मचकुंड रोड स्थित बने शहीद स्मारक पर लम्बे समय बंद पड़ा है। यहां पर साफ-सफाई भी नहीं होती है। स्मारक पर विभिन्न युद्धों में देश पर प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के नामकरण की पट्टिका लगनी थी लेकिन वह नगर परिषद के कार्यालय में गुम हो गई। सूत्रों के अनुसार जिला कलक्टर ने दो दिन पहले कलक्ट्रेट में डील कर रहे शाखा के कार्मिकों को बुलाकर जानकारी ली तो बताया कि आदेश नगर परिषद भेज दिए थे। लेकिन आगे क्या हुआ, इस पर कार्मिक जवाब नहीं दे पाए। डीएम ने कार्यवाहक आयुक्त से जानकारी ली तो उन्हें भी इस आदेश के बारे में पता नहीं था। डीएम ने परिषद की कार्यशैली पर नाखुशी जताते हुए जल्द से जल्द पट्टिका लगाने के निर्देश।

- भवनों पर नामकरण के लिए जयपुर दो दफा फाइल भेजी जा चुकी हैं। उक्त फाइल में तीन फाइल की कम्पलीट हैं, शेष में कुछ कमी बताया। फाइलों को वापस भी भिजवाया था। सभी स्वंतत्रता सैनानी सम्मानीय हैं, जिला स्तर पर पूर्ण प्रयास किया जा रहा है।

- श्रीनिधि बी टी, जिला कलक्टर धौलपुर

2000 में तत्कालीन सरकार ने स्वतंत्रता सैनानियों के नाम से भवनों का नामकरण के आदेश दिए थे। मेरे दादा और पिता दोनों ने ही स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका निभाई थी। पिता के नाम से ताम्र पत्र और उन्हें सरकार के द्वारा पेंशन भी दी जाती थी, लेकिन 25 साल बाद भी उनके और अन्य सैनानियों के नाम से भवनों का नामकरण नहीं हो सका।

-वेदप्रकाश आर्य, स्वतंत्रता सेनानी ओमप्रकाश वर्मा के पुत्र

स्वतंत्रता सैनानी नामकरण प्रस्ताव

टुण्डाराम गुर्जर पीएचसी कंचनपुर

मजबूत सिंह चौराहा बाड़ी बाइपासचमन सिंह बाड़ी से धनौरा रोड

पंचम गिर उमावि बाड़ी कन्हैयालाल राउमा महाराणा धौलपुर

ओमप्रकाश वर्मा नगर परिषद ऑडोटोरियम धौलपुररामदयाल जिला पुस्तकालय धौलपुर

जगदीश प्रसाद उप्रावि. इन्फेन्ट धौलपुरकेदारनाथ विधि कॉलेज धौलपुर

केशव देव सामान्य चिकित्सालय बाड़ीदीनानाथ गुप्ता राबाउमावि बाड़ा हैदरशाह धौलपुर

नरेन्द्र ङ्क्षसह राउमावि सैंपऊजौहरी लाल इन्दु जिला खनिज विभाग भवन

युगलदास शर्मा महिला चिकित्सालय धौलपुरज्वाला प्रसाद जिज्ञासू पीजी कॉलेज धौलपुर