
जिला स्थापना दिवस विशेष: विकास की नई इबारत लिख रहा हमारा धौलपुर
41 साल का हुआ जिला: कुछ पाया, काफी हासिल करना बाकी
- 15 अप्रेल 1982 को धौलपुर बना था प्रदेश का 27वां जिला
- मेडिकल कॉलेज, नया अस्पताल और हवाई पट्टी से बढ़ रहा नए जमाने की ओर
धौलपुर. राजस्थान राज्य के जिले के रूप में धौलपुर आज अपना 41वां स्थापना दिवस मना रहा है। 15 अप्रेल 1982 को राज्य के 27वें जिले के रूप में धौलपुर को मान्यता दी गई थी। तब भरतपुर जिले से अलग कर चार तहसीलों धौलपुर, राजाखेड़ा, बाड़ी और बसेड़ी को शामिल कर धौलपुर जिले की रचना की गई थी। समय के साथ-साथ अब 41 सालों में धौलपुर जिले का खासा विस्तार हो गया है। 7 तहसील तथा 6 उपखण्ड कार्यालय बन गए हैं। धौलपुर जिले का लेकर राज्य की राजनीति में हमेशा दबदबा रहा है। प्रदेश की राजनीति में धौलपुर का डंका भी खूब बजा है। पूर्व मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व वित्त एवं गृह मंत्री प्रद्युम्न सिंह तथा पूर्व मंत्री बनवारी लाल शर्मा जैसे राजनेता समय-समय पर धौलपुर जिले का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। धौलपुर जिले में इन्फ्रास्टक्चर के क्षेत्र में खूब प्रगति हुई है। हाइवे व आंतरिक सडक़ों का जाल बिछ गया है। अस्पताल व स्कूल खुले हैं। जिले में प्रशासनिक इकाइयों का भी तेजी से विकास हुआ। ग्राम पंचायतें, तहसील, पंचायत समिति सहित अन्य कार्यालयों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में अन्य जिलों की अपेक्षा अच्छी स्थिति में हैं। हालांकि पेयजल समस्या, डांग क्षेत्र का विकास और औद्योगिक विस्तार समस्या के रूप में कायम हैं।
जिले में प्रशासनिक इकाइयां
- जिला कलक्टर कार्यालय धौलपुर
- अतिरिक्त जिला कलक्टर दौसा
6 उपखण्ड कार्यालय: धौलपुर, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा, सैंपऊ और राजाखेड़ा
7 तहसील: धौलपुर, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा, सैंपऊ, राजाखेड़ा और मनियां
6 पंचायत समितियां: धौलपुर, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा, सैंपऊ और राजाखेड़ा
5 नगर निकाय: नगर परिषद धौलपुर तथा नगरपालिका बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा और राजाखेड़ा
कुल ग्राम पंचायतें: 188
धौलपुर का परिचय
धौलपुर राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित है। जिला भरतपुर की चार तहसीलों धौलपुर, राजखेड़ा, बाड़ी और बसेड़ी को मिला कर बनाया गया। यह राजस्थान के भरतपुर जिले और उत्तर में उत्तर प्रदेश, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में करौली जिले और पूर्व में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से घिरा है। जिला सडक़ों और रेलवे से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मध्य रेलवे के मुंबई-आगरा मार्ग की ब्रॉडगेज लाइनें जिला मुख्यालय धौलपुर से होकर गुजरती हैं। देश के सबसे लंबे नेशनल हाइवे में शुमार एनएच 44 भी जिला मुख्यालय से होकर गुजरता है। धौलपुर जिले का कुल क्षेत्रफल 3,034 वर्ग किलोमीटर है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 12,06,516 थी जिसमें 6,53,647 पुरुष और 5,52,869 महिलाएं शामिल हैं।
फोटो... आंदोलन हुए तो झुके हुक्मरान
60 और 70 के दशक में सोशलिस्ट पार्टी के नेतृत्व में धौलपुर को जिला बनाने की मांग को उठाया गया। इसके बाद 1981 में धौलपुर के कई राजनेताओं ने एक बैनर के तले आकर जिले की मांग को लेकर आन्दोलन शुरू कर दिया। क्रमिक अनशन किया गया। आखिरकार सरकार को धौलपुरवासियों के आगे झुकना पड़ा और इसे जिला बनाने की मांग को स्वीकार करना पड़ा। अंतत: 15 अप्रेल 1982 को धौलपुर को जिला घोषित किया गया। धौलपुर प्रदेश का 27वां जिला बना।
फोटो.. इन्फ्रास्ट्रक्चर का खूब विकास
जिले के आधारभूत ढांचे में पिछले कुछ सालों में काफी विकास हुआ है। जिले को मेडिकल कॉलेज, नया अस्पताल, हवाई पट्टी और नर्सिंग कॉलेज जैसे संस्थान मिले हैं। वहीं, शहर में टाउन हॉल का भी निर्माण जारी है।
फोटो... आरएमएस है शान
देश के कुल पांच राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल में से एक धौलपुर में होना जिले के लिए गर्व की बात है। अन्य चार स्कूल चैल, अजमेर, बेंगलूरु और बेलगांव में स्थित हैं।
वन संपदा से भरपूर
धौलपुर जिला वन संपदा से भी भरपूर है। यहां वन विहार वन्यजीव अभयारण्य, रामसागर वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य हैं। इन अभयारण्यों में चीतल, सांभर, लकड़बग्घा, भालू, घडिय़ाल और डॉल्फिन जैसे कई जीव पाए जाते हैं। इसके साथ ही जिले में प्रदेश का पांचवा टाइगर रिजर्व विकसित करने की तैयारी की जा रही है।
कालीतीर बनेगी जिले की लाइफलाइन
चंबल से पानी लिफ्ट कर पार्वती बांध आंगई तक पहुंचाने की करीब 700 करोड़ की कालीतीर परियोजना जिले की लाइफलाइन बनेगी। राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा के प्रयायों से इस परियोजना को मंजूरी मिली है। इससे पार्वती नदी में पूरे साल पानी रहेगा। पार्वती नदी में जगह-जगह एनीकट बनाकर पानी को रोका जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों और अन्य लोगों को सिंचाई और पेयजल की कमी नहीं रहेगी।