धौलपुर

यहां गुरूवार को नहीं करते यात्रा

रोडवेज पर भारी 'गुरूवार-हर गुरुवार को गिर जाती है रोडवेज की आय-कम लोग करते हैं यात्रा
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Feb 06, 2019
dholpur news dholpur
यहां गुरूवार को नहीं करते यात्रा

यहां गुरूवार को नहीं करते यात्रा
-रोडवेज पर भारी 'गुरूवारÓ
-हर गुरुवार को गिर जाती है रोडवेज की आय
-कम लोग करते हैं यात्रा
धौलपुर. इसे वर्षों पुरानी मान्यता कहें या अंधविश्वास, लेकिन राजस्थान के अंतिम छोर पर दो प्रदेशों की सीमाओं पर बसे धौलपुर जिले में हर गुरुवार को रोडवेज की आय गिर जाती है। इसे रोडवेज अधिकारी भी सहर्ष स्वीकारते हैं, लेकिन इसका कोई समाधान उनके पास नहीं है। इतना ही नहीं इसकी पुष्टि रोडवेज के आंकड़े भी करते हैं।
यह कहते हैं आंकड़े
नवम्बर माह में पांच गुरुवार आए थे। इस दौरान एक नवम्बर गुरुवार को जहां यात्री भार 60 था, वहीं दो नवम्बर से लेकर सात नवम्बर तक क्रमश: 67,72,73,84,82 व 73 रहा। इसी प्रकार 8 नवम्बर गुरुवार को यात्री भार फिर से घटकर 62 पर पहुंच गया। जबकि 9 नवम्बर से लेकर 14 नवम्बर तक क्रमश: 92, 91, 88, 97, 89 व 81 रहा। इसके बाद अगले गुरुवार 15 नवम्बर पर नजर डालें तो यात्री भार 79 पहुंचा, जबकि सप्ताह के अन्य दिनों में यह संख्या हर दिन 85 से ऊपर रहीं। वहीं 22 नवम्बर गुरुवार को 77 तो 29 तारीख गुरुवार को 64 पर ही टिक गई। जबकि इस माह में दीपावली जैसा बड़ा त्योहार तथा शादियां भी थीं। इसी प्रकार दिसम्बर माह के आंकड़ों पर जाएं तो हर गुरुवार 6, 13, 20 तथा 27 तारीख को सप्ताह में सबसे कम यात्री भार रहा, जबकि अन्य दिनों में दस से पन्द्रह प्रतिशत अधिक यात्री भार रहा। यह स्थिति मात्र दो माह की नहीं, हर माह के गुरुवार की है।
परिचालक भी गुरुवार को तलाशते हैं अवकाश का मौका
परिचालकों की कमी की चलते वैसे तो उन्हें यदा-कदा ही अवकाश मिल पाता है, लेकिन गुरुवार को अवकाश लेने का मौका तलाशते हैं। इस कारण वे अधिकारियों को भी कम यात्री भार का हवाला देते हुए अवकाश देने का आग्रह करते नजर आते हैं। जिसे कई बार अधिकारी भी स्वीकार कर लेते हैं।
यह कारण बताते हैं रोडवेजकर्मी
तीन प्रदेशों उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश तथा राजस्थान की सीमा पर स्थित धौलपुर में ही यह मान्यता दिखाई पड़ती है। रोडवेजकर्मियों का कहना है कि यात्री इस दिन को अमांगलिक मानते हैं। साथ ही इस दिन महिलाएं भी कम यात्रा करती हैं। इस कारण किसी को पति साथ यात्रा करनी है तो वह गुरुवार को नहीं जाती हैं। वहीं कई यात्री इसे सप्ताह का चौथा दिन भी मानती हैं। चौथ का दर्जा दे देने के कारण भी यात्रा का वर्जित मानते हंै। लोगों का कहना है कि धौलपुर भले ही राजस्थान में हैं, लेकिन यहां पर राजस्थान की कम तथा उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश की परम्पराओं का अधिक निर्वहन करते हंै। जिससे तीनों प्रदेशों की परम्पराओं व मान्यताओं का असर दिखाई पड़ता है। यहां की भाषा में भी तीनों राज्यों का पुट नजर आता है।
क्या कहते हैं परिचालक
यह सही है गुरुवार को यात्री भार कम रहता है। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं इस दिन यात्रा नहीं करती हैं। वहीं इस दिन मृतक परिवार या पीहर नहीं जाने की परम्परा के चलते यात्री भार कम हो जाता है।
प्रतापसिंह, परिचालक, धौलपुर डिपो
क्या कहते हैं पण्डित
यहां पुरानी मान्यता चली आ रही है। लेकिन गुरुवार को यात्रा करना कतई अमांगलिक नहीं है। गुरुवार को यात्रा करना शुभ माना जाता है। लोग को अंधविश्वास में नहीं रहना चाहिए।
कृष्णदास, महंत, लाडली जगमोहन मंदिर, मचकुण्ड, धौलपुर।
इनका कहना है
बिल्कुल, हर गुरुवार को करीब 40 से 50 प्रतिशत यात्री भार घट जाता है। यह पुरानी मान्यता है। इसका कारण तो स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस दिन को यहां पर अमांगलिक माना जाता है। वहीं परिचालक भी अवकाश लेने का प्रयास करते हैं, लेकिन उन्हें अवकाश नहीं दिया जाता है।
महेश शर्मा, प्रबंधक प्रशासन, धौलपुर डिपो।

Published on:
06 Feb 2019 09:54 pm