धौलपुर

शिक्षा विभाग की टेंशन…आखिर कैसे बढ़े स्कूलों में नामांकन?

धौलपुर. राजकीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सर्वे, प्रवेशोत्सव के बावजूद भी अभी तक जिले भर के 774 प्रारंभिक राजकीय स्कूलों में 4989 बच्चों का ही नामांकन हो सका है। हालांकि अभी भी नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ है। यह प्रक्रिया तीन चरणों में की जा रही है। शिक्षा विभाग ने इस बार 15 प्रतिशत नामांकन वृद्धि का लक्ष्य दिया है। राजकीय स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की चुनौती अभी से नहीं अपितु पिछले कुछ सालों से बनी हुई है। जिसके मुख्य कारणों में शिक्षकों की कमी, जर्जर होते स्कूल भवन, शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर धारणा, अंग्रेजी माध्यम का आकर्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में भी निजी स्कूलों का प्रसार है। जिन कारणों को विभाग अभी तक दूर करने में नाकाम ही साबित हुआ है। हालांकि कुछ मामलों में जरूर शिक्षा विभाग ने सहूलितें प्रदान की हैं, लेेकिन जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग न होना और बजट का अभाव होना समस्या को और बढ़ा रहा है।

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-राजकीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाना शिक्षा विभाग के लिए बना चुनौती

-इस सीजन अभी तक जिले के 774 स्कूलों में 4989 बच्चों का नामांकन

-घर-घर जाकर शिक्षकों ने किया बच्चों का सर्वे, जोड़े जाएंगे शिक्षा से

धौलपुर. राजकीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। सर्वे, प्रवेशोत्सव के बावजूद भी अभी तक जिले भर के 774 प्रारंभिक राजकीय स्कूलों में 4989 बच्चों का ही नामांकन हो सका है। हालांकि अभी भी नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ है। यह प्रक्रिया तीन चरणों में की जा रही है। शिक्षा विभाग ने इस बार 15 प्रतिशत नामांकन वृद्धि का लक्ष्य दिया है।

राजकीय स्कूलों में नामांकन बढ़ाने की चुनौती अभी से नहीं अपितु पिछले कुछ सालों से बनी हुई है। जिसके मुख्य कारणों में शिक्षकों की कमी, जर्जर होते स्कूल भवन, शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर धारणा, अंग्रेजी माध्यम का आकर्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में भी निजी स्कूलों का प्रसार है। जिन कारणों को विभाग अभी तक दूर करने में नाकाम ही साबित हुआ है। हालांकि कुछ मामलों में जरूर शिक्षा विभाग ने सहूलितें प्रदान की हैं, लेेकिन जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग न होना और बजट का अभाव होना समस्या को और बढ़ा रहा है।

इस बार भी 15 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य

राजकीय स्कूलों के पिछले दो सालों के नामांकन की बात करें तो यह घटा ही है, जबकि विभाग हर साल 10 प्रतिशत नामांकन बढ़ाने का टारेगट देता है। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार 2024 में जहां प्रारंभिक स्कूलों में टोटल 56 हजार 850 बच्चों का नामांकन था। जिनमें 27 हजार 456 छात्र तो 29 हजार 349 छात्राएं शामिल थीं। जो 2025 में घटकर 54 हजार 279 रह गया। जिसमें 26048 छात्र तो 28231 छात्राओं का नामांकन था। मौजूदा सत्र में अभी तक जिले के 774 स्कूलों में 4989 बच्चों का नामांकन हो चुका है। जिसमें 2456 छात्र तो 2533 छात्राएं हैं। इनमें अभी तक सबसे ज्यादा नामांकन कक्षा एक में 4787 बच्चों का हुआ है। कक्षा 2 में 100, कक्षा 3 में 37, कक्षा 4 में 19, कक्षा 5 में 12, कक्षा 6 में 21, कक्षा 7 में 6 और कक्षा 8 में 7 बच्चों का नामांकन किया गया है। देखा जाए तो अभी तक यह आंकड़े विभाग के लिए संतोषजनक हैं, क्योंकि स्कूलों में नामांकन वृद्धि अपे्रल के बाद ही प्रारंभ होती है। जिससे इसमें अभी और वृद्धि के आसार हैं।

विभाग को इन समस्याओं को करना होगा दूर

देखा जाए तो राजकीय से अभिभावकों और बच्चों के होते मोहभंग का एक कारण नहीं अपितु कई हैं। जहां निजी स्कूलों की प्रतिस्पर्धा, शिक्षकों की कमी और जो शिक्षक हैं उनको अन्य कार्यों का दायित्व सौंपना, जर्जर होते स्कूल भवन, उचित व्यवस्थाएं तथा 6 वर्ष की आयु सीमा के चलते नामांकन दर में कमी आ रही है। सरकार प्रवेश उत्सव के जरिए इसे दूर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन एक प्रवेश उत्सव के कार्य चलने वाला नहीं। राज्य सरकार को शिक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के साथ बच्चों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा।

- स्कूलों में बच्चों के नामांकन प्रक्रिया अभी प्रारंभ है। बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के लिए शिक्षकों ने घर-घर जाकर सर्वे भी किया है। यह प्रक्रिया जुलाई तक चलेगी। विभाग का एक ही मकसद है बच्चों को शिक्षा की धारा से जोडऩा। जर्जर भवनों के स्थान पर नवीन भवन बनाए जाएंगे।

-आरडी बंसल, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक

सत्र के शुरुआत में ही किताबें और यूनिफार्म का वितरण

निजी स्कूलों की तर्ज पर राजकीय स्कूलों में भी एक अपे्रल से नवीन सत्र प्रारंभ हो चुका है। विभाग का तर्क है कि इससे जहां बच्चों को अतिरक्त समय पढ़ाई के लिए मिलेगा तो नामांकन के लिए भी विभाग को और ज्यादा वक्त मिल सकेगा। जिसके बाद विभाग ने भी नामांकन को बढ़ाने प्रयास भी प्रारंभ कर दिए। जिसका प्रारंभ शिक्षकों के घर-घर जाकर ऐसे बच्चों का सर्वे करना रहा जो किसी कारण शिक्षा से दूर हैं। इसके अलावा प्रवेशोत्सव के साथ बच्चों को शुरुआती दिनों में ही किताबें और यूनिफॉर्म तक वितरित कर दी गईं, लेकिन उसके बाद भी बच्चों को राजकीय स्कूलों की तरफ रुझान होता कम ही दिख रहा है।

कई स्कूल शिक्षक विहीन, 80 प्रतिशत हेडमास्टरों के पद खाली

राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या है। हेडमास्टर यानी वरिष्ठ अध्यापकों की छह सालों से पदोन्नति न होने के कारण जिले भर में 80 से 90 प्रतिशत पद खाली हैं। वर्तमान में व्याख्याताओं के 896 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 594 पदों पर व्याख्यात कार्यरत हैं, जबकि 302 पद पिछले चार सत्रों से खाली चल रहे हैं। स्कूलों में थर्ड ग्रेड के अध्यापक लेवल और लेवल 2 बच्चों का अध्ययन कराते हैं। इसके अलावा विभिन्न विषयों के वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता, वाइस प्रिंसीपल और प्रिंसीपलों के पद खाली होने से नामांकन प्रक्रिया में समस्याएं आना लाजिमी है।

इस सीजन अभी तक बच्चों का हुआ नामांकन

.ब्लॉक स्कूल कक्षा 1 कक्षा 2 कक्षा 3 कक्षा 4 कक्षा 5 कक्षा 6 कक्षा 7 कक्षा 8

धौलपुर 157 1124 23 08 03 04 02 00 02

बाड़ी 139 881 21 09 03 00 03 02 04

बसेड़ी 98 637 15 04 00 03 06 01 01

सरमथुरा 110 524 09 03 03 01 02 00 00

राजाखेड़ा 164 770 13 07 07 02 04 01 00

सैंपऊ 106 851 19 06 03 02 04 02 00

पिछले दो सालों का नामांकन

2024 56 हजार 850

2025 54 हजार 2792026 4 हजार 989

(साल 2026 के मार्च तक आंकड़े)

Published on:
26 Apr 2026 07:00 pm
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