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धौलपुर. शहर के निजी अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। एक ओर जहां अनट्रेंड स्टॉफ मरीजों का इलाज कर रहा है तो वहीं संचालित 35 (रजिस्टर्ड) निजी अस्पतालों में से केवल 20 ने ही फायर एनओसी ले रखी है। यानी 15 निजी अस्पतालों का संचालन बारूद के ढेर पर किया जा रहा है। यही हाल बड़़े होटल और रेस्टोरेंटों का भी है, जहां आगजनी से बचने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतेजामात कतई नहीं हैं। हालात यह हैं कि शहर में संचालित एक दर्जन से ज्यादा बड़े होटलों में से केवल 6 ने ही अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है। इसके बावजूद ना ही स्वास्थ्य विभाग और ना ही अग्निशमन विभाग इन निजी अस्पतालों और होटलों पर कोई कार्रवाई करते।
राज्य से लेकर देशभर में आए दिन अस्पतालों, होटलों और रेस्टोरेंटों में आगजनी की घटनाएं सामाने आती हैं, जिनमें कई मासूम अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। कुछ दिनों पहले दिल्ली के मालवीय नगर में संचालित एक होटल में आगजनी की घटना में 23 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी तो वहीं जयपुर के एसएमएस अस्पताल में गत वर्ष लगी आग में 8 लोग मारे गए थे, लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदार इन भीषण अग्निकाण्डों से कोई सीख नहीं लेते। शहर में संचालित निजी अस्पतालों सहित होटलों और रेस्टोरेंटों की बात करें तो यहां मामला बहुत गड़बड़ नजर आता है, क्योंकि अकेले शहर में 35 निजी अस्पतालों (स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड) का संचालन किया जा रहा है। जिनमें से केवल 20 निजी अस्पताल संचालकों ने अग्निशमन विभाग से फायर एनओसी का ले रही रखी है और शेष 15 निजी अस्पतालों का संचालन बगैर फायर एनओसी के धड़ल्ले से किया जा रहा है। देखा जाए तो यह 35 निजी अस्पतालों की संख्या वह है जो स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड हैं, जबकि शहर में लगभग 70 से80 निजी अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है, जिनका कोई हिसाब है और ना किताब।
एक भी रेस्टोरेंट पर एनओसी नहीं
निजी अस्पतालों जैसा ही हाल शहर में संचालित होने वाले होटलों और रेस्टोरेंटों का है। जानकारी के अनुसार शहर के प्रमुख हिस्सों में लगभग एक दर्जन से ज्यादा होटल और इतने ही रेस्टोरेंटों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन यहां भी होटल और रेस्टोरेंट संचालन लोगों की जिंदगियों को लेकर कतई फिक्रमंद नहीं है। यही कारण है कि संचालित एक दर्जन से ज्यादा होटलों में से केवल ६ होटल संचालकों ने फायर एनओसी ले हुई है, जबकि शेष होटल बगैर फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। तो वहीं संचालित एक दर्जन रेस्टोरेंटों की बात करें तो इनमें से किसी एक ने भी अग्निशमन विभाग से फायर एनओसी नहीं ली है।
जिम्मेदार विभाग नहीं करते कार्रवाई
शहर के निजी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज के नाम पर जमकर लूटा जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित विशेष इलाज के बड़े-बड़े बोर्ड टांगने वाले यह लूट के केन्द्र सरकार के तय मानकों के हिसाब से संचालित नहीं हो रहे। इन अस्पतालों में जहां अनट्रेंड स्टॉफ कार्य करता है तो रजिस्ट्रेशन से लेकर फायर एनओसी भी इनके पास नहीं होती, जबकि चिकित्सा केन्द्रों में फायर एनओसी हर कीमत पर जरूरी होती है। उसके बाद भी ना ही स्वास्थ्य विभाग और ना ही अग्निशनम विभाग इन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई करता है।
12 अस्पतालों के पंजीकरण किए निलंबित
पिछले कुछ दिनों से निजी अस्पतालों में हो रहीं प्रसूताओं की मौत के बाद जागा स्वास्थ्य प्रशासन ने ऐसे निजी अस्पतालों पर कार्रवाई को लेकर हरकत में आया जो स्वास्थ्य विभाग में बिना पंजीकरण और एनओसी के संचालित हो रहे थे। कई अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने और मरीजों की मौत की घटनाओं के बाद प्रशासन ने औचक निरीक्षण कर करीब 12 अस्पतालों के पंजीकरण निलंबित किए हैं और कई को सीज भी किया गया था।
क्यों जरूरी होती है फायर एनओसी
अग्निशमन विभाग के जानकारों ने बताया कि फायर एनओसी एक दस्तावेज है जो बताता है कि अस्पताल में आग से बचाव के लिए उचित इंतजाम हैं। जैसे अग्निशमन यंत्र, अलार्म और आपातकालीन निकास। फायर एनओसी यह सुनिश्चित करता है कि अस्पताल में आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा हो सके। ऐसी स्थिति में अगर किसी अस्पताल या किसी बिल्डिंग में आगजनी की घटना होती है तो उस पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। इसके बावजूद भी निजी अस्पताल संचालक एनओसी लेने से बचते नजर आते हैं।
जिन निजी अस्पतालों और होटल संचालकों ने फायर एनओसी नहीं ले रखी है उनके खिलाफ नोटिस जारी किया गया है। अगर वह एनओसी नहीं लेंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
-वृषभान सिंह, अग्निशमन प्रभारी, नगर परिषद धौलपुर
अग्नि सुरक्षा के यह मानक- न्यूनतम पांच-पांच फीट के दो दरवाजे होने चाहिए।
- ऊपरी मंजिल पर ओवरहेड टैंक हो, जो पानी से भरा हो।- प्रत्येक मंजिल पर हौज रील का इंतजाम हो।
- जगह-जगह अग्निशमन यंत्र लगे हों।- आपातकालीन संकेतक और फायर अलार्म हों।
- भवन के बेसमेंट में अस्पताल का संचालन न हो।- अग्निशमन विभाग की एनओसी ली हो।
- अग्निशमन, पुलिस और आपातकालीन नंबरों का चस्पा हो।
Published on:
12 Jun 2026 07:08 pm
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