
खाद के कट्टे लेकर जाता किसान
Dholpur,राजाखेड़ा. सरकार सहित जिला प्रशासन उर्वरकों का स्टॉक प्रचूर मात्रा में होने का दावा करते रहे हैं। लेकिन जमीनी हालात बिल्कुल इसके उलट है । जहां अन्नदाताओं को एक-एक यूरिया के कट्टे के लिए दिन में ही नहीं रात में भी संघर्ष करना पड़ रहा है और इसके लिए उसे निर्धारित दामों के विपरीत बड़ी कीमत देनी पड़ रही है। फिर भी खाद् तो नहीं लंबी कतारों में खड़े रहकर खाली हाथ लौट जाना उसकी मजबूरी बन चुकी है।जिसके कारण कम मानसून के संघर्ष में उसकी समस्याएं दोगुनी हो रही है और फसल की बढ़ोत्तरी पर बड़ा संकट खड़ा हो रहा है।
उपखंड के मरेना कस्बे में देर रात्रि किसानों को एक खाद बीज की दुकान पर लोगों को चुपचाप खाद की अघोषित बिक्री होती दिखाई दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में किसान वहां एकत्रित हो गए और यूरिया की मांग करने लगे ।पहले तो व्यापारी ने यूरिया नहीं होना किसानों को बताया जब किसान अंदर घुसने लगे तो उसने प्रति कट्टा 350 रुपए मांगे जो निर्धारित दर 267 से काफी ज्यादा था।ऐसे में वहां हुड़दंग शुरू हो गया जो दुकान बन्द होने के बाद ही रुक पाया, लेकिन अधिकांश किसान बिना यूरिया मिले ही निराश लौट आए। लोगों का आरोप है कि ऐसा क्या कारण था कि विक्रेता रात दस बजे दुकान खोलकर चुपचाप चुनिंदा लोगों को यूरिया बेच रहा था, जबकि उसे दिन में पूरा स्टॉक कृषि विभाग में दर्ज करवा कर पोस् मशीन से विक्रय क्यों नहीं करते।
कभी भी माहौल बिगाड़ने का डर
यूरिया की कमी, व्यापारियों की कालाबाजारी ओर उसके बीच फसल खराब होने का डर किसानों के धैर्य को तोड़ रहा है। जो कभी भी माहौल को बिगाड़ सकता है। 4 दिन पूर्व राजाखेड़ा मुख्यालय पर आछेलाल की गड़ी के किसानों की एक बड़े खाद व्यापारी से भिड़ंत हो गई थी और माहौल तनावपूर्ण हो गया था, लेकिन सतर्क पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यापारी और एक किसान को हिरासत में ले लिया और माहौल बिगड़ने से बचा लिया, लेकिन जिला और उपखंड प्रशासन अभी इन घटनाओं की गंभीरता नहीं समझ रहा कि अन्नदाता अंदर से आंदोलित हैं और अपनी पीड़ा का समाधान चाहता है।
Updated on:
27 Jul 2026 07:08 pm
Published on:
27 Jul 2026 07:08 pm
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