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Dholpur: सिलेंडर के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा खाने का बजट, घर से लेकर होटल, रेस्टोरेंटों का खाना 15 प्रतिशत हुआ महंगा

धौलपुर. घरेलू गैस सिलेंडर सहित कॉमर्शियल सिलेंडर के बढ़ते दामों ने घरों से लेकर होटल, रेस्टोरेंटों की थाली का बजट बिगाड़ दिया है। हालात यह हैं कि रेस्टोरेंट और होटलों में मिलने वाला खाना 10 से 15 प्रतिशत तक महंगा हो गया। तो वहीं घरेलू गैस के बढ़ते दामों ने ग्रहणियों का भी बजट गड़बड़ा दिया है।

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Dholpur news

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धौलपुर. घरेलू गैस सिलेंडर सहित कॉमर्शियल सिलेंडर के बढ़ते दामों ने घरों से लेकर होटल, रेस्टोरेंटों की थाली का बजट बिगाड़ दिया है। हालात यह हैं कि रेस्टोरेंट और होटलों में मिलने वाला खाना 10 से 15 प्रतिशत तक महंगा हो गया। तो वहीं घरेलू गैस के बढ़ते दामों ने ग्रहणियों का भी बजट गड़बड़ा दिया है। ही ही में जारी रेटिंग एजेंसी क्रिसल की रिपोर्ट में भी थाली के दामों के बढऩे पर चिंता जताई गई है।

घरेलू और कॉमर्शियल गैस की कीमत बढऩे से सीधे तौर पर जनमानस की जेब पर असर पड़ रहा है। घरेलू गैस वृद्धि से जहां रसोइयों का बजट गड़बड़ा गया है तो वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढऩे से रेस्टोरेंट, कैफे और ढाबा मालिकों की लागत बढ़ गई है, जिसकी भरपाई करने के लिए वे अपनी मेन्यू में व्यंजनों की कीमतें बढ़ा रहे हैं। नतीजतन, बाहर का खाना काफी महंगा हो गया है। इसमें 10 से लेकर 15 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। देखा जाए तो राजस्थान में पिछले तीन महीने में घरेलू 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर के दाम कुल 89 रुपए तक बढ़ चुके हैं और आज इसकी कीमत 961.50 रुपए तक हो चुकी है। तो वहीं गत दिनों कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 42 रुपए का इजाफा हुआ है अब इसकी कीमत 3175 रुपए हो चुकी है।

समोसा 15 रुपए और भटूरा 40 रुपए प्लेट

कॉमर्शिलय सिलेंडरों के दाम पिछले छह माहों में निरंतर बढऩे के कारण होटल, रेस्टोरेंट से लेकर चाय-नाश्ता के ठपरी चलाने वालों के व्यवसाय पर भारी पड़ रहा है। जिस कारण संचालकों को खान पान से लेकर नाश्ता तक को महंगा करना पड़ा है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की मानें तो यहां खाने की थाली में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। गत तीन माह पहले होटल और रेस्टोरेंटों पर मिलने वाले व्यंजन की एक प्लेट 250 रुपए में आती थी आज वह 270 रुपए तक की हो चुकी है। ऐसा ही चाय और नाश्ता की दुकानों पर भी पड़ा है। जहां 10 रुपए में मिलने वाला समोसा आज 15 रुपए में बिक रहा है तो वहीं 30 रुपए में मिलने वाली छोले भटूरे की प्लेट अब 40 रुपए में मिल रही है।

जिले में कॉमर्शिलय सिलेंडर 3175 रुपए का

अब बात करें घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि की तो जब खाड़ी युद्ध प्रारंभ हुआ तब राज्य भर में सिलेंडरों की किल्तत होने से मारामारी तक देखने को मिली, हालांकि स्थिति में अभी थोड़ा सुधार जरूर देखने को मिला है, लेकिन दामों में बेतहाशा वृद्धि ने आम आमी की कमर तोड़ कर रख दी है। राजस्थान में पिछले तीन महीने में घरेलू 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर के दाम कुल 89 रुपए बढ़े हैं। 7 मार्च को सिलेंडर 60 महंगा हुआ था। 7 जून को इसमें 29 की और बढ़ोतरी की गई। तो वहीं होटलों, रेस्टोरेंट्स और ढाबों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलो वजनी नीले यानी कॉमर्शिलय सिलेंडर में भी गत दिन 42 रुपए की वृद्धि की गई है। जो वर्तमान में धौलपुर जिले में 3175 रुपए में मिल रहा है। कॉमर्शिलय के बढ़े दामों ने व्यवसायिक संस्थानों की लागत और बढ़ गई है।

छह माह में छह बार बढ़े दाम

घरेलू गैस सिलेंडर की अपेक्षा कॉमर्शियल सिलेंडर के दामों ज्यादा इजाफा देखा गया है। जानकारी के अनुसार बीते छह माह में कॉमर्शियल सिलेंडर पर कंपनियों ने अब तक 6 बार से ज्यादा बार कीमतों में बढ़ोतरी की है। 31 दिसंबर तक 1608 रुपए में जो सिलेंडर मिलता था, जो अब 1 जून तक बढकऱ 3175 रुपए का हो गया। जनवरी में कंपनियों ने 111 रुपए, फरवरी में 49.50, मार्च में 141.50 रुपए, अप्रेल में 195 रुपए, मई में 993 और अब जून में 42 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की। यही कारण है कि होटल, रेस्टोरेंट से लेकर चाय नाश्ते की दुकानों पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पहले की तरह अब सिलेंडर ही उपलब्ध नहीं हो रहे तो वहीं लगातार बढ़ते दामों ने हमारे सामने संकट खड़ा कर दिया है। मजबूरन हमें थाली और विभिन्न व्यंजनों के दामों में इजाफा करना पड़ा।

क्या बोले विशेषज्ञ...

रूस-यूके्रन और अमेरिका-ईरान के युद्ध का असर महंगाई के रूप में देखने को मिल रहा है। यही कारा है कि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने व परिवहन लागत बढऩे के कारण यह वृद्धि की गई है। तेल कंपनियों का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण उन्हें गैस की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसकी भरपाई के लिए कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया है। जानकारों का मानना है कि आगामी दिनों में अगर युद्ध नहीं रुका और यह जारी रहा तो हालात और भी बदतर हो सकते हैं। तो वहीं भारत सरकार और राज्य सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी सहित गैस का पर्याप्त संग्रहण है।