धौलपुर

लोकार्पण के बाद भी नहीं मिल रहा नीर, आखिर कब चंबल का जल बदलेगा धौलपुर की तस्वीर

dholpur. चंबल नदी से जल लिफ्ट कर सुदूर क्षेत्रों में पहुंचाने बहुप्रतीक्षित धौलपुर लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना के 6 वर्ष बाद भी लोगों को पानी नहीं मिल सका। 23 नवंबर 2017 को प्रारंभ हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 772.52 करोड़ रुपए की लागत स्वीकृत थी जो अब तक बढकऱ 1100 करोड़ से अधिक हो चुकी है और तेजी से कार्य पूर्णता की ओर बढऩे के दावे पिछले दो वर्ष से किए जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री ने इसका लोकार्पण भी कर दिया पर अभी तक यह आमजन के लिए सपना ही बना हुआ है। अधीक्षण अभियंता जल संसाधन वृत्त धौलपुर राजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि परियोजना के माध्यम से 39980 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे धौलपुर एवं राजाखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों की संैपऊ, मनियां, धौलपुर और राजाखेड़ा तहसीलों के 256 गांव सीधे लाभान्वित होंगे। यह परियोजना मानसून में व्यर्थ बहने वाले पानी का सदुपयोग कर बाढ़ जैसी स्थितियों को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी। साथ ही फव्वारा सिंचाई पद्धति को लागू करने वाली यह प्रदेश की अग्रणी परियोजनाओं में शामिल है जो कृषि क्षेत्र में नई दिशा देगी।

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- बहुप्रतीक्षित धौलपुर लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना

dholpur. चंबल नदी से जल लिफ्ट कर सुदूर क्षेत्रों में पहुंचाने बहुप्रतीक्षित धौलपुर लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना के 6 वर्ष बाद भी लोगों को पानी नहीं मिल सका। 23 नवंबर 2017 को प्रारंभ हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 772.52 करोड़ रुपए की लागत स्वीकृत थी जो अब तक बढकऱ 1100 करोड़ से अधिक हो चुकी है और तेजी से कार्य पूर्णता की ओर बढऩे के दावे पिछले दो वर्ष से किए जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री ने इसका लोकार्पण भी कर दिया पर अभी तक यह आमजन के लिए सपना ही बना हुआ है।

अधीक्षण अभियंता जल संसाधन वृत्त धौलपुर राजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि परियोजना के माध्यम से 39980 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे धौलपुर एवं राजाखेड़ा विधानसभा क्षेत्रों की संैपऊ, मनियां, धौलपुर और राजाखेड़ा तहसीलों के 256 गांव सीधे लाभान्वित होंगे। यह परियोजना मानसून में व्यर्थ बहने वाले पानी का सदुपयोग कर बाढ़ जैसी स्थितियों को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगी। साथ ही फव्वारा सिंचाई पद्धति को लागू करने वाली यह प्रदेश की अग्रणी परियोजनाओं में शामिल है जो कृषि क्षेत्र में नई दिशा देगी।

6 वर्ष की देरी के बाद भी अभी तक सपना

इस योजना के लिए आंदोलन का आगाज राजाखेड़ा से किया गया, क्योंकि सर्वाधिक कृषि और पेयजल संकट इसी क्षेत्र में था। एक दशक के आंदोलन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने इसकी स्वीकृति जारी की गई, जब ईसके वर्क ऑर्डर 13 नवंबर 2017 को जीवीपीआर इंजीनियर्स लिमिटेड हैदराबाद को जारी किए गए तब इसकी लागत 892 करोड़ होनी थी और 22 मई 2020 तक इस परियोजना को पूर्ण किया जाना था। जिसके बाद अगले आठ वर्ष तक कंपनी को इसका परिचालन करना था जिसकी लागत 25 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष अलग थी, लेकिन 2020 तक इसका निर्माण पूर्ण होना तो दूर प्रारंभिक अवस्था मे ही लटका रहा जिससे इसकी लागत बढकऱ 1100 करोड़ तक पहुंच गई। पर सरकार ने कंपनी पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की न ही इन कंपनियों से कार्य करवाने के जिम्मेदार जल संसाधन विभाग के अधिकारियों पर ही कोई कार्रवाई हुई जिनके उचित सुपरविजन न मिलने से कंपनी को देरी का मौका मिला व सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बल्कि भाजपा के बाद कांग्रेस सरकार ने भी अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना कालीतीर के वर्क ऑर्डर भी इसी फर्म को 15 मई 2023 को जारी कर दिए। जिस कंपनी पर कार्रवाई की जानी थी उसी को अगली परियोजना कार्य सौंपकर उसे पुरुस्कृत ही कर दिया वहीं कालीतीर के शीघ्र पूरे होने पर भी प्रश्न चिह्न लग गया। जिसके चलते हलक अब तक तर नहीं हो पा रहे वहीं कृषि जल संकट से पैदावार पर भी बेहद विपरीत असर आ रहा है।

पेयजल संकट को ध्यान में रखते हुए पानी अब तक सपना

परियोजना के कुल जल का 10 प्रतिशत हिस्सा पेयजल के लिए आरक्षित किया गया है। इससे राजाखेड़ा एवं मनियां तहसीलों के 190 गांवों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा है जो इन क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लेकिन अभी इस दिशा में कोई विशेष कार्य नहीं हो पाया है। परियोजना के तहत 225 किलोमीटर लंबाई में डीआई एवं एमएस पाइपलाइन का अंडरग्राउंड नेटवर्क तथा 1445 किलोमीटर लंबाई में एचडीपीई पाइपलाइन का वितरण नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। साथ ही, 30 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है, जिससे परियोजना को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

दो वर्ष में ये हुआ कार्य

विगत दो वर्षों में लगभग 261 करोड़ रुपए व्यय कर पाइपलाइनए इंटेक स्ट्रक्र, एमबीआर एवं 132 केवी जीएसएस जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। 108 डिग्गियों में से 48 डिग्गियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है वहीं सोलर पावर प्लांट का लगभग 70 प्रतिशत कार्य भी पूरा कर लिया गया है। गुरुवार को अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जल संसाधन संभाग भरतपुर डीके अग्रवाल ने कंपनी प्रतिनिधियों के साथ परियोजना का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि शेष कार्य तीव्र गति से जारी है और आगामी 3 माह में परियोजना को पूर्ण कर लिया जाएगा। हालांकि जमीनी स्तर पर इसके आसार अभी कम ही नजर आ रहे है।

Published on:
23 Apr 2026 07:31 pm
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