धौलपुर

पथराने लगीं इंतजार में आंखें

गांव में शांति, दिलों में आग-वादों की नहीं, बदले की मांग -शहादत के 30 घंटों बाद प्रशासन ने की पुष्टि
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Feb 15, 2019
dholpur news dholpur
पथराने लगीं इंतजार में आंखें

पथराने लगीं इंतजार में आंखें
-गांव में शांति, दिलों में आग
-वादों की नहीं, बदले की मांग
-शहादत के 30 घंटों बाद प्रशासन ने की पुष्टि
राजाखेड़ा(धौलपुर). जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले में देश के लिए शहीद हुए जवान भगीरथ पुत्र परसराम के राजाखेड़ा स्थित गांव जैतपुरा में लोगों के शहीद परिवार को ढांढस बंधाने के सारे प्रयास बेमानी साबित हो रहे थे। वीरांगना रंजना देवी बेसुध थी। बेहद गमगीन माहौल में महिलाएं उसे होश में लाने का प्रयास कर रही थीं। सूचना के बाद शहीद के घर लोगों का तांता लगा हुआ है। शहीद भगीरथ 11 फ रवरी की शाम को ही गांव से वापस अपने तैनाती स्थल के लिए रवाना हुआ था, लेकिन सकुशल पहुंचने की सूचना की जगह शहादत की खबरों ने परिवारजनों को झकझोर कर रख दिया। गांव के ग्रामीण सुबह से ही लोग शहीद की पार्थिव देह का इंतजार कर रहे थे। लेकिन देह तो दूर ना तो सीआरपीएफ अधिकारी और ना ही जिला प्रशासन परिजनों और ग्रामीणों को कोई संतुष्टिपूर्ण जवाब दे पा रहे थे। ऐसे में बड़ी संख्या में जमा लोगों में आक्रोश था।
गांव में शांति, दिलों में आग
घटना की सूचना मिलते ही गांव में सन्नाटा छा गया। लोग भगीरथ के घर पर एकत्रित हो गए। दूर-दराज से महिलाएं बिलखती हुई धीरज बंधाने के लिए घर आ रही थीं। जिनमें एक बुजुर्ग महिला तो खुद पर काबू नहीं रख पाई और बेसुध होकर गिर पड़ी। जिसे ग्रामीण चिकित्सालय ले गए। गांव का पुरुष वर्ग शांत तो था लेकिन दिलों में आग भारी हुई थी। लोगों का कहना था कि पाकिस्तान तो दुश्मन देश है उनसे तो उम्मीद ही हमले की है, लेकिन हमारी सरकार का रवैया ज्यादा दुख पहुंचा रहा है। जहां घटना के 30 घंटे बाद भी सरकारी अमला तो दूर एक सिपाही तक नही पहुंच पाया।
पाकिस्तान और आतंकवादियों के प्रति युवाओ में जबरदस्त आक्रोश था। घर से महिलाओं की चीखनें की आवाजें दूर तक गूंजकर लोगों के दिलों को आंदोलित कर रहीं थीं। युवाओ में तो बस एक ही बात थी कि अब बात नही बदले की जरूरत है। पाकिस्तान से सीधा हिसाब होना चाहिए। शहीद के परिवार की एक बुजुर्ग महिला तक आर-आर की लड़ाई की मांग बिलखते हुए कर रही थी। लोगों में बस एक ही चर्चा थी कि इन चीखों और आंसुओं का हिसाब कौन देगा।
परिजन नहीं कर पा रहे बात
शहीद का लालन-पालन करने वाले चाचा जरदान सिंह सदमे से कुछ बोल नहीं पा रहे थे। वहीं उत्तरपदेश पुलिस में तैनात छोटा भाई बलवीर खुद की सुध खो बैठा है। बस एक ही बात मुंह से निकल रही थी कि काश वह भी वहां जाकर भाई का बदला ले पाता।
मासूमों को नहीं पता कि उठ गया पिता का साया
शहीद का तीन वर्षीय पुत्र विनय और डेढ़ वर्ष की पुत्री शिवांगी को तो ये भी नही मालूम कि उनके पिता का साया अब उनके सिर से उठ चुका है। अब वो कंधे उन्हें नहीं मिलेंगे जिन पर बैठा कर पिता उन्हें गांव में घुमाया करते थे। दोनों ही मासूम अलग अपने खेल में व्यस्त थे ।
दोपहर तक नही पहुंचे कोई अधिकारी
शहीद के घर शहादत की पुष्टि करने या ढाढस बंधाने के लिए दोपहर एक बजे तक कोई अधिकारी नही पहुंचा वरन भगीरथ को लापता मानकर ही पुष्टि का प्रयास करते रहे। लेकिन अपराहन पुलिस अधीक्षक मनिया किशोरीलाल एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर ने पहुंच कर परिवार और ग्रामीणों को शहादत की पुष्टि की व राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार की तैयारियां को जांचा।
वोहरा ने बंधाया ढाढस
पूर्व मंत्री प्रधुम्न सिंह व विधायक रोहित वोहरा की ओर से वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रदीप वोहरा दोपहर जैतपुर पहुंचे और शहीद के परिवार को ढांढस बंधाया। साथ ही सरकार की ओर से हर संभव मदद का भी आश्वासन दिया।

Published on:
15 Feb 2019 07:49 pm