कुछ दिन ही चलकर बंद हुआ निराश्रित गोवंश पकडऩे का कार्य प्रतिदिन जिला अस्पताल पहुंच रहे गोवंश का शिकार 5 से 8 लोग गोवंशों को छोडऩे परिषद नहीं बता सका उचित स्थान धौलपुर.हाइवों से लेकर शहर की सडक़ों पर निराश्रित गोवंशों का तांडव जारी है, जो आए दिन किसी न किसी को अपना शिकार बना […]
कुछ दिन ही चलकर बंद हुआ निराश्रित गोवंश पकडऩे का कार्य
प्रतिदिन जिला अस्पताल पहुंच रहे गोवंश का शिकार 5 से 8 लोग
गोवंशों को छोडऩे परिषद नहीं बता सका उचित स्थान
धौलपुर.हाइवों से लेकर शहर की सडक़ों पर निराश्रित गोवंशों का तांडव जारी है, जो आए दिन किसी न किसी को अपना शिकार बना रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार देखकर भी कोई कदम नहीं उठा रहे। हां कुछ दिन पहले जरूर गोवंशों को पकडऩे का काम चला था, लेकिन उन्हें छोडऩे के लिए पर्याप्त जगह न होने के कारण ठेकेदार ने काम बंद कर दिया।
एक समय मनुष्य गोवंश पर आश्रित था, लेकिन समय के साथ आज गोवंश ही निराश्रित हो गया है। जिस कारण वह दर-दर की ठोकरें और मार खाने को मजबूर है, लेकिन अब यह गोवंश क्षेत्र के लोगों के लिए समस्या का कारण भी बन चुका है। पेट भरने और रहने का कोई ठिकाना नहीं होने के कारण गोवंश ने गली-गली, सडक़-सडक़ से लेकर हाइवों तक को अपना आश्रय स्थल बना लिया है। जिस कारण जहां यातायात प्रभावित होता है तो वहीं वाहन और राहगीर भी इन गोवंशों का शिकार होकर घायल हो रहे हैं। यह समस्या शहर तक ही सीमित नहीं है। अपितु ग्रामीण क्षेत्रों में भी निराश्रित गोवंश की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित गोवंशों के कारण राहगीरों और किसानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सडक़ों पर घूमता गोवंश लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हो रहा है और फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इन निराश्रित पशुओं को गौशाला भेजने की मांग की है।
बिजौली गौशाला गोवंश से फुल
नगर परिषद ने कुछ माह पहले शहर में फिरते निराश्रित गोवंश को पकडऩे के लिए ठेका दिया था। जिसके बाद ठेकेदार ने काम भी प्रारंभ कर दिया था और लगभग 5से7 दिन किए कार्य में ठेकेदार ने 30 से 35 गोवंश को पकडक़र बिजौली गौशाला में भिजवाया गया था, लेकिन गौशाला में जगह नहीं होने के कारण ठेकेदार के सामने गोवंश को छोडऩे की समस्या खड़ी हो गई। जिसके बाद नगर परिषद और न ही प्रशासन गोवंश को छोडऩे के लिए उचित स्थान नहीं बता सका। जिसके बाद ठेकेदार ने कुछ दिनों बाद कार्य बंद कर दिया।
हाइवों पर भी झुण्ड के झुण्ड
शहर में निराश्रित गोवंश की भी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिन्हें शहर के किसी भी कालोनी या मोहल्लों में झुण्ड के झुण्ड में देखा जा सकता है। इसके अलावा, ये पशु खेतों में घुसकर किसानों की फसलों को भी नष्ट कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। तो वहीं नेशनल हाइवे 44 और 11बी पर भी जगह-जगह झुण्ड के रूप में बैठा गोवंश वाहन चालकों को घायल कर रहा है, जबकि कई मामलों में तो लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 5से 7 केस ऐसे सामने आ रहे हैं जो गोवंश का शिकार बने हैं।
गोवंश को पकडऩे के लिए कुछ समय पहले कार्य किया गया था। इस दौरान गोवंश को बिजौली गोशला भेजा गया था। विभाग जल्द ही फिर गोवंश को पकडऩे का कार्य करेगा।
-गुमान ङ्क्षसह सैनी, एक्सइएन नगर परिषद