
धौलपुर. जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को पोषाहार उपलब्ध कराने वाली मिड-डे-मील और पन्नाधाय बाल गोपाल योजना बजट के अभाव में उधारी के सहारे चल रही हैं। जिले के सरकारी शिक्षण संस्थानों को महीनों से बजट नहीं मिलने से विद्यालयों की रसोई व्यवस्था पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
शिक्षकों ने पत्रिका को बताया कि मिड-डे मील की कन्वर्जन कॉस्ट कई स्कूलों में मई से, जबकि कुछ स्कूलों में अप्रेल से बकाया है। वहीं, पन्नाधाय बाल गोपाल दूध योजना का बजट भी अप्रेल से जारी नहीं हुआ है। दूसरी ओर, करीब ढाई हजार कुक-कम-हेल्पर मानदेय के इंतजार में हैं। दीपावली का त्योहार आने वाला है लेकिन स्कूलों में हजारों बच्चों का पेट भरने बाली कुक महिलाएं पिछले कई महीनों से मेहनताना नहीं मिलने से बेहद परेशान हैं ।प्राप्त जानकारी के जिले के प्राथमिकए उच्च प्राथमिकए माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के साथ संस्कृत विद्यालयों और मदरसों सहित 1,179 सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक करीब सवा लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में बजट भुगतान में देरी का सीधा असर बच्चों के लिए संचालित पोषाहार व्यवस्था पर पड़ रहा है।
कन्वर्जन कॉस्ट के लिए महीनों से इंतजार
राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष हरी सिंह गुर्जर ने बताया कि मिड-डे मील के तहत भोजन तैयार कराने के लिए विद्यालयों को मिलने वाली कन्वर्जन कॉस्ट का भुगतान कई स्कूलों में मई सेए जबकि कुछ स्कूलों में अप्रैल से लंबित है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद बकाया राशि नहीं मिलने से पोषाहार प्रभारियों को खाद्य सामग्री और रसोई की अन्य आवश्यकताओं के लिए अपने वेतन या उधारी का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने के लिए कई विद्यालयों में शिक्षकों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है।
अप्रेल से अटका दूध योजना का बजट
पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत विद्यार्थियों को दूध उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक बजट भी अप्रैल से विद्यालयों को नहीं मिला है। इसके चलते दूध वितरण व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाली चीनीए गैस सिलेंडर सहित अन्य आवश्यक खर्चों के भुगतान में परेशानी आ रही है। वहींए करीब ढाई हजार कुक-कम-हेल्पर का मानदेय भी लंबित होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित होने के बावजूद बजट उपलब्ध नहीं होने से रसोई संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे कार्मिकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। शिक्षक संगठन का कहना है कि बच्चों को नियमित पोषाहार उपलब्ध कराने के लिए सरकार को दोनों योजनाओं का बजट समय पर जारी करना चाहिए।
पोर्टल परिवर्तन से प्रभावित हुई भुगतान प्रक्रिया
शिक्षक नेता चंद्र शेखर शर्मा ने बताया कि पहले मिड.डे मील से संबंधित भुगतान पीडी अथवा एसएनए पोर्टल के माध्यम से किए जाते थे। अब भुगतान व्यवस्था एसएन, स्पर्श पोर्टल पर स्थानांतरित कर दी गई है। पोर्टल परिवर्तन के बाद जिले के सरमथुरा और सैंपऊ ब्लॉक के 326 स्कूल का डेटा पोर्टल से लापता है । जिस से इन स्कूलों खातों की प्रविष्टि और आवश्यक डेटा अपडेट करने की प्रक्रिया के कारण भुगतान प्रभावित हो रहा है।
स्कूलों को मिड.डे मील की कन्वर्जन कॉस्ट अप्रेल-मई से और पन्नाधाय बाल गोपाल योजना का बजट अप्रेल से बकाया है। बजट के अभाव में विद्यालयों को 6 माह से उधारी के सहारे पोषाहार व्यवस्था संचालित करनी पड़ रही है। डीईओ एलीमेंट्री को ज्ञापन भेजकर लंबित भुगतान तत्काल जारी करने, कुक-कम.हेल्पर का बकाया मानदेय चुकाने तथा योजनाओं के लिए समयबद्ध बजट आवंटन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
- राजेश शर्मा, पूर्व प्रदेश महामंत्री, राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
- बिल बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। जल्दी सभी का पेमेंट जल्द ही हो जाएगा और बिल का कार्य पूरे होने के बाद ही बिल सभी के हो जाएंगे
हंसराज मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक