धौलपुर

Dholpur: वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य सेवाएं, नर्सिंग ऑफिसर के भरोसे मरीज

dholpur, सरमथुरा उपखंड में चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर आ गई हैं। ब्लॉक में पांच पीएचसी व एक सीएचसी में विशेषज्ञों सहित कुल 18 चिकित्सक पद स्वीकृत हैं, लेकिन 11 चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं।

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dholpur, सरमथुरा उपखंड में चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर आ गई हैं। ब्लॉक में पांच पीएचसी व एक सीएचसी में विशेषज्ञों सहित कुल 18 चिकित्सक पद स्वीकृत हैं, लेकिन 11 चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं।

सरमथुरा ब्लॉक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरमथुरा सहित आंगई, बरौली, गौलारी, झिरी व बड़ागांव में पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित हैं, इनमें सात विशेषज्ञ समेत 11 चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं। सामुदायिक अस्पताल सरमथुरा चिकित्सकों की कमी के कारण बदहाली के दौर से गुजर रहा है।

आलम यह है कि अस्पताल में एनेस्थीसिया के अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद खाली हैं। अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन, नेत्ररोग सहित दो वरिष्ठ चिकित्सकों की कमी है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को सामान्य उपचार ही मिल पा रहा है। समस्या बढऩे पर रोगियों को जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार सामुदायिक अस्पताल सरमथुरा में प्रतिदिन करीब आठ सौ रोगियों का उपचार किया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बरौली व गौलारी चिकित्सकों के अभाव में नर्सिंग ऑफिसर के भरोसे संचालित है। अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने के कारण मरीज संतुष्ट नहीं है, जबकि दोनों अस्पतालों में प्रतिदिन 40 से 50 मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं। इसी प्रकार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आंगई में दो चिकित्सकों के पद स्वीकृत होने के बाद एक चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है, जबकि आंगई व बरौली अस्पतालों में सबसे अधिक प्रसव होते हैं।

सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं से वंचित मरीज

सरमथुरा ब्लॉक में संचालित अस्पतालों में चिकित्सकों के अभाव में सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं से मरीज वंचित हैं। सामान्य बीमारी के अलावा अन्य बीमारी से ग्रसित मरीजों को अस्पताल में उपचार के अभाव में रेफर कर दिया जाता है। जिसके कारण मरीजों को आर्थिक व मानसिक प्रताडऩा झेलनी पड़ती है।

नवीन अस्पताल भवन की भूमि पर विवाद

कस्बा में अस्पताल की नवीन बिल्डिंग मूर्तिरूप धारण कर चुकी है। कस्बा के बाड़ी रोड पर करोड़ों की राशि खर्च कर 2.70 हेक्टेयर भूमि पर अस्पताल भवन का निर्माण किया गया है। विडंबना यह है कि अस्पताल की भूमि का विवाद पीछा नहीं छोड़ रहा है। अस्पताल भूमि पर विवाद के कारण शिफ्टिंग में देरी हो रही है, जबकि अस्पताल का नवीन भवन पूरी तरह तैयार है। लोगों का मानना है कि नवीन भवन में अस्पताल संचालित होने से स्वास्थ्य सेवाओं में इजाफा व बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

ब्लॉक में संचालित अस्पतालों में चिकित्सकों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित बनी हुई हैं, सरमथुरा सहित पांचों सीएचसी में 18 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन 11 पद रिक्त पड़े हैं, अस्पताल के नवीन भवन की भूमि पर विवाद होने के कारण चारदीवारी नहीं हो सकी है, जिसके कारण अस्पताल शिफ्टिंग में देरी हो रही है।

- डॉ.जीएल मीणा, बीसीएमओ सरमथुरा

Published on:
03 Jun 2026 07:24 pm