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Dholpur: निजी विद्यालय छीन रहे… ‘लाडो’ का अधिकार

धौलपुर. शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता और निजी विद्यालयों की उठधर्मी से हजारों छात्राओं को लाडो योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। गत दो सत्रों में रुचि नहीं दिखाने के बाद नवीन सत्र में निजी विद्यालय छात्राओं को योजना का लाभ दिलाने फिक्रमंद कतई नहीं हैं।

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धौलपुर. शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता और निजी विद्यालयों की उठधर्मी से हजारों छात्राओं को लाडो योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। गत दो सत्रों में रुचि नहीं दिखाने के बाद नवीन सत्र में निजी विद्यालय छात्राओं को योजना का लाभ दिलाने फिक्रमंद कतई नहीं हैं। यही कारण है कि अभी तक इस सत्र शिक्षा विभाग को केवल 299 छात्राओं के आवेदन ही प्राप्त हुए हैं, जबकि राजकीय स्कूलों में अध्ययनरत 2651 छात्राओं ने योजना का लाभ लेने आवेदन किया है।

अपार आईडी कार्य हो या फिर लाडो प्रोत्साहन योजना या फिर कोई और राजकीय योजना...निजी विद्यालयों की इनमें कोई रुचि नहीं रहती है। फिर चाहे राजकीय कार्य में बाधा हो या फिर विद्यार्थियों को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ न मिल सके। शहर से लेकर जिले भर में संचालित निजी विद्यालय का हाल भी यही है। जिन्होंने शिक्षा को धंधा बना सिर्फ अपनी जेबें भरने पर ही ध्यान दिया जाता है, अगर ऐसा नहीं होता तो वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी यानी अपार और लाडो योजना में यह निजी स्कूल बढ़ चढकऱ अपनी भूमिका निभाते, लेकिन ऐसा है बिल्कुल भी नहीं। यही कारण है कि छात्राओं के प्रोत्साहन को चलाई गई लाडो योजना से निजी विद्यालयों में पढऩे वाली हजारों छात्राएं योजना से वंचित हैं। योजना को लेकर 2024, 2025 सत्रों के बाद नवीन सत्र यानी 2026-27 में भी यह निजी विद्यालय कोई रुचि नहीं दिखा रहे। पिछले दो सत्रों में निजी विद्यालयों की ओर से केवल 309 छात्राएं हीं इस योजना से जुड़ सकीं तो वहीं इस सत्र अभी तक 299 छात्राओं का आवेदन किया गया है।

राजकीय स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर

लाडो प्रोत्साहन योजना का छात्राओं को लाभ दिलाने राजकीय विद्यालयों का कार्य निजी विद्यालयों की अपेक्षा काफी बेहतर है। जानकारी के अनुसार गत दो सत्रों में जिले भर के राजकीय स्कूलों में पढऩे वाली 3656 छात्राएं इस योजना से जुडकऱ लाभान्वित हो रही हैं तो वहीं नवीन सत्र 2026 में भी जिले भर के राजकीय विद्यालयों ने बेहतर कार्य करते हुए अभी तक 2651 छात्राओं के आवेदन शिक्षा विभाग को प्राप्त हुए हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि गर्मियों के छुट्टियों के बाद अधिक से अधिक पात्र छात्राओं को योजना से जोडऩे का कार्य किया जाएगा।

शिक्षा विभाग नहीं करता निजी विद्यालयों पर सख्ती

निजी विद्यालयों की अलग ही कहानी है। उन्हें सरकार की कोई योजनाओं से कोई वास्ता नहीं होता। मगर सबसे बड़ी बात यह है कि अपनी मनमर्जी करने वाले इन निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार सख्ती के साथ पेश आकर कड़ाई से पालन नहीं कराते, विभाग की कार्रवाई केवल नोटिस तक ही सीमित रह जाती है। यही कारण है कि यह निजी विद्यालयों में पढऩे वाले बच्चों की अपार आइडी कार्य भी 50 प्रतिशत तक पूर्ण नहीं हो सका है, तो वहीं दो सालों 309 छात्राएं और इस सत्र अभी तक 299 छात्राओं ने लाडो के आवेदन किया गया है।

इन छात्राओं को मिलता योजना का लाभ

लाडो प्रोत्साहन योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल है। योजना का लाभ उन छात्राओं को मिलेगा, जिनका जन्म सरकारी या अधिकृत चिकित्सा संस्थान में हुआ हो और जो राजस्थान राज्य की मूल निवासी हों। इसके अलावा, छात्रा ने सरकारी या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में नियमित अध्ययन किया हो। सभी टीकाकरण समय पर पूर्ण किए हों। सभी लाभ जनआधार से ही मिलेंगे। बालिका की माता का राजस्थान की मूल निवासी होना आवश्यक है। तीसरी किश्त कक्षा 1 में प्रवेश के बाद से लाभ लेने के लिए संतान की संख्या का कोई बंधन नहीं रखा गया है।

सात किश्तों में मिलती योजना की राशि

राज्य सरकार ने लाडो प्रोत्साहन योजना की शुरुआत 1 अगस्त 2024 में की थी। योजना का लक्ष्य छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें प्रोत्साहन करना है। जिससे अधिक से अधिक बालिकाएं शिक्षा से जुड़ सकें। देखा जाए तो पहले इस योजना में केवल सरकारी स्कूलों की बालिकाएं ही पात्र थीं, लेकिन, सरकार ने बाद में योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसें निजी विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं को भी जोड़ दिया। ताकि हर बच्ची को समान अवसर मिल सके। छात्रा के जन्म पर 2500 रुपए, 1 वर्ष एवं टीकाकरण पूरा होने पर 2500 रुपए, प्रथम कक्षा में प्रवेश पर 4000 रुपए, कक्षा 6 में प्रवेश पर 5000 रुपए, 10वीं कक्षा में प्रवेश पर 11 हजार रुपए, कक्षा 12 में प्रवेश पर 25000 रुपए और स्नातक पूर्ण होने व 21 वर्ष की आयु पर एक लाख रुपए की राशि का प्रावधान है।