शहर से सटे तीर्थराज मचकुंड पर गुरुवार को जोड़ मेले का आयोजन हुआ। यहां मचकुड स्थित गुरुद्वारे पर मेले में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न इलाकों से सिख समाज के लोग यहां पहुंचे।
धौलपुर. शहर से सटे तीर्थराज मचकुंड पर गुरुवार को जोड़ मेले का आयोजन हुआ। यहां मचकुड स्थित गुरुद्वारे पर मेले में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न इलाकों से सिख समाज के लोग यहां पहुंचे। श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे में मत्था टेककर प्रसादी पाई।
गुरुद्वारे के संत ठाकुर सिंह महाराज ने बताया कि सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद साहब 4 मार्च 1612 में मचकुंड आए थे। उन्होंने 5 मार्च को यहां पर शेर का शिकार किया था। इसके बाद 6 मार्च को मचकुंड से ग्वालियर गए थे। इसी की याद में गुरुद्वारा शेर शिकार मचकुंड पर प्रतिवर्ष जोड़ मेले का आयोजन 6 मार्च को किया जाता है। जिस मेले में भाग लेने के लिए देशभर के सिख समुदाय के लोग पहुंचते हैं। मेले के दौरान गुरुद्वारा पर शब्द कीर्तन के साथ लंगर का आयोजन हुआ। गुरुद्वारा को लेकर मान्यता है कि 4 मार्च 1612 को सिक्खों के छठें गुरू हरगोविन्द सिंह ग्वालियर से जाते समय यहां ठहरे थे। उस समय मचकुंड के आसपास घना जंगल था। गुरु हरगोविन्द सिंह ने अपनी तलवार से एक ही वार से शेर का शिकार किया था। इसलिए इस गुरुद्वारे को शेर शिकार गुरूद्वारा कहा जाता है।