
कभी चंबल के डांग और बीहड़ में आतंक का पर्याय रहे पूर्व इनामी दस्यु जगन गुर्जर की अंतिम संस्कार के अगले दिन भी पूरे गांव में चर्चा है। ग्रामीणों को अजमेर जेल में जगन गुर्जर के साथ घटी घटना गले नहीं उतर रही। गांव भक्तीपुरा के ग्रामीण रामदीन ने कहा कि हट्टा-कट्टा व्यक्ति और वह जगन गुर्जर जिसने डांग में सैकड़ों पुलिसकर्मियों से मुठभेड़ की और उसकी एक साधारण और कमजोर सा युवक विष्णु सिंह गलाघोंट कर हत्या कर दे, यह नहीं हो सकता।
इसी तरह माधौ ने कहा कि जेल में जो भी घटा उसकी पूरी जांच होनी चाहिए। राजस्थान पुलिस से नहीं बल्कि मामले की सीबीआइ जांच हो। कई लोग नाराज भी दिखे। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से षड्यंत्र से की गई हत्या है। जगन को अकेला तो कोई मार ही नहीं सकता।
माधौ ने कहा कि जगन गुर्जर के भाई पप्पू गुर्जर को अलग क्यों कर दिया, फिर सीसीटीवी कैमरे पर ट्यूथपेस्ट कैसे आ गया, कुछ तो बैरक में उस दिन हुआ था, जिसे छिपाया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार भी मामले को छिपा रही है।
पूर्व दस्यु जगन गुर्जर के अंतिम संस्कार में 1 जुलाई को बड़ी संख्या में समाज के लोग पहुंचे और जगन के घर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर डांग के पथरीले इलाके में अंतिम संस्कार हुआ। अंतिम संस्कार में अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से पैरोल पर पप्पू गुर्जर और धौलपुर जेल से लाल सिंह और पान सिंह भी शामिल हुए। तीनों भाइयों की जगन के अंतिम दर्शन के लिए लाया गया तो बड़े भाई लाल सिंह के आंसू झलक गए, जिस पर छोटे भाई पप्पू ने उन्हें ढांढ़स बंधाया।
इस दौरान पप्पू ने हाथ ऊपर कर भीड़ को शांत किया। तीनों भाइयों के पहुंचने पर भीड़ जगन की देह के पास पहुंचने का प्रयाय कर रही थी, जिस पर पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। तीनों भाइयों को पुलिस दाह-संस्कार की तैयारी होने पर भारी सुरक्षा बल के साथ लेकर पहुंची और भाई को अंतिम नमन कर पुलिस तीनों को वापस लेकर रवाना हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने जगन को अंतिम विदाई दी। लोग एक-एक करके आते गए और चिता पर कंडा डाल नमन कर आगे बढ़ते गए। कई लोग दाह-संस्कार के बाद भी पहुंचे।
जगन के घर से बाबू महाराज का मंदिर (थान) करीब एक किलोमीटर दूर है और मंदिर पर उसके पिता भगत थे और जगन की खासी आस्था थी और वह मंदिर पर घंटा चढ़ा कर अपनी भक्ति भी जताता था। हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से हमेशा इससे इनकार किया जाता रहा है।
लेकिन साल 1998 से 2000 के बीच जब जगन गुर्जर का नाम डांग में खौफ की तरह गूंजता था। पुलिस ने घेराबंदी की और फिर उसने लगातार बहती वारदातों के बाद बाबू महाराज मंदिर पर ही तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ और सीओ बाड़ी केसर सिंह शेखावत के समक्ष आत्म समर्पण किया था।