एक और खाद्य सुरक्षा योजना से अपात्रों के स्वेच्छा से नाम हटवाने के लिए सरकार तारीख पर तारीख बढ़ा रही है। जिससे अपात्रों को स्वयं नाम हटवाने का समय मिल सके। वहीं, दूसरी और प्रशासनिक जांच में दोषी पाए गए अपात्रों से वसूली कि जगह प्रशासन नोटिस नोटिस खेल कर खानापूत्र्ति कर रहा है। जिससे इस योजना में बड़ी संख्या में भरे पड़े फर्जी परिवारों के हौंसले भी बुलंद होते जा रहे है।
- गिवअप अभियान की लगातार बढ़ा रहे तारीख, कार्रवाई कुछ नहीं
- खाद्य सुरक्षा योजना में अपात्रों को हटाने का मामला
घौलपुर. एक और खाद्य सुरक्षा योजना से अपात्रों के स्वेच्छा से नाम हटवाने के लिए सरकार तारीख पर तारीख बढ़ा रही है। जिससे अपात्रों को स्वयं नाम हटवाने का समय मिल सके। वहीं, दूसरी और प्रशासनिक जांच में दोषी पाए गए अपात्रों से वसूली कि जगह प्रशासन नोटिस नोटिस खेल कर खानापूत्र्ति कर रहा है। जिससे इस योजना में बड़ी संख्या में भरे पड़े फर्जी परिवारों के हौंसले भी बुलंद होते जा रहे है। कार्यवाही के अभाव में लोग मुफ्त के राशन का मोह को छोड़ नहीं पा रहे हैं।
क्या है मामला
अम्बरपुर निवासी एक व्यक्ति ने दो वर्ष पूर्व राजाखेड़ा के एक परिवार की शिकायत की थी कि उनके पुत्र की सरकारी शिक्षक के तौर पर नियुक्ति हो गई है और उसके बाद भी वे सामाजिक सुरक्षा के लाभ के साथ ही खाद्य सुरक्षा योजना का गलत लाभ उठा रहे हैं। कई माह पंचायत समिति, उपखंड अधिकारी, जिला कलक्टर तक को शिकायते देने के बाद भी जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो शिकायतकर्ता लोकायुक्त सचिवालय में की तब जाकर उपखंड़ प्रशाशन की तंद्रा भंग हो पाई ओर पंचायत समिति के विकास अधिकारी ने जांच में शिकायत को सही मानकर 1805 किलो गेहंू का उठान सरकार को भ्रमित करते हुए उठाने की रिपोर्ट उपखण्डाधिकारी को दे दी ओर इस गेहंू की 27.50 प्रति किलो की दर से वसूली की अभिशंषा कर दी। लेकिन वसूली नहीं की गई।
नोटिस पर नोटिस पर नहीं हुई वसूली
उपखण्डाधिकारी ने प्रकरण की जांच रिपोर्ट के आधार पर 15 अप्रेल 24 को वसूली नोटिस जारी किया। लेकिन उसपर कार्यवाही नहीं हुई। अगले माह मई में एसडीएम ने पुन: नोटिस जारी किया पर अब तक वसूली नहीं की जा सकी। जिसके बाद पीडि़त ने पुन: जिला कलक्टर को प्रकरण से अवगत करवाया। सारे प्रकरण को गंभीर मानते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने उक्त प्रकरण में वसूली के लिए उपखण्डाधिकारी को निर्देशित किया गया है। बता दें जिला कलक्टर श्रीनिधि बी टी तारीख बढ़ाने से नाखुश हैं। लेकिन उपखण्ड अधिकारी कार्य में सुस्ती दिखा रहे है। मामले में एसडीएम राजाखेड़ा से बात करनी चाहिए तो मोबाइल स्विच आफ था।
बड़ी संख्या में है अवैध लाभार्थी
राजाखेड़ा विधानसभा क्षेत्र सरकारी योजनाओं का गलत लाभ लेने के मामले में सबसे आगे दिखाई देता है। जहां ऐसे लाभार्थी बड़ी संख्या में हैं जो अपात्र होते हुए भी प्रशासनिक लापरवाही के चलते बड़ी मात्रा में गेहंू उठा रहे हैं। पर जांच के अभाव में ये सभी बेखौफ हैं। ऐसे में गिव-अप जैसी स्कीमों से उम्मीद रखना बेमानी है। प्रशासनिक लापरवाही ओर शिकायतों पर कार्यालय न होने से मुख्यालय पर पानी और बिजली के 6000 अवैध कोंनेक्शनों का प्रकरण भी नागरिक विधिक सेवा प्राधिकरण मे लेकर गए जिस पर सुनवाई जारी है। पर स्थानीय स्तर पर कार्यवाही न होने से लोगो मे नाराजगी है।