धौलपुर

धौलपुर में भी लोट्स गार्डन, मुगल बादशाह बाबर ने करवाया था निर्माण

– हाउसिंग बोर्ड चौकी के सामने से जाता है रास्ता – मुगल बादशाह बाबर ने 1527 में करवाया था निर्माण धौलपुर. जिले में पर्यटन के लिहाज काफी समृद्ध है लेकिन जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की अनदेखी की वजह से कई ऐतिहासिक पर्यटन स्थल अभी आमजन और पर्यटकों से ओझल बने हुए हैं। जबकि इस […]

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- हाउसिंग बोर्ड चौकी के सामने से जाता है रास्ता

- मुगल बादशाह बाबर ने 1527 में करवाया था निर्माण

धौलपुर. जिले में पर्यटन के लिहाज काफी समृद्ध है लेकिन जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की अनदेखी की वजह से कई ऐतिहासिक पर्यटन स्थल अभी आमजन और पर्यटकों से ओझल बने हुए हैं। जबकि इस ऐतिहासिक स्थल की खोज तत्कालीन भारतीय राजदूत की पत्नी एलिजाबेथ मोयनिहान ने की थी। जो 1978 ईस्वीं मं हुई थी। लेकिन इस खोज के बाद से अभी तक खास बदलाव नहीं हुआ। केवल संरक्षित जगह घोषित कर दी गई और भारतीय पुरातत्व विभाग ने अपना एक बोर्ड लगा रखा है। बाकी यहां पहुंचने तक की रोड भी नहीं है।

उज्बेकिस्तान से पहुंची धौलपुर

मुगल शासक बाबर ने 1527 ईस्वी में धौलपुर शहर से कुछ दूरी पर झोर नामक छोटे से गांव ऐतिहासिक लोट्स गार्डन का निर्माण करवाया था। बाबर की आत्मकथा को मार्गदर्शक मानते हुए एलिजाबेथ ने उज्बेकिस्तान से धौलपुर तक के तथ्य और सुरागों के आधार पर पता लगाया। लेकिन वर्तमान में उक्त स्थान जर्जर हाल में है। चारों तरफ अतिक्रमण हो चुका है।

बाबर को पहाडिय़ों ने किया आकर्षित

बता दें कि धौलपुर की पहाडिय़ों की सुंदरता से मंत्रमुग्ध होकर बाबर ने उस्ताद शाह मोहम्मद को एक पहाड़ी को काटकर समतल करने और एक अष्टकोणीय जलकुंड खोदने का आदेश दिया था। इस जलकुंड का व्यास 8.8 मीटर है। इसके पास ही कमल के आकार के छोटे-छोटे तालाब भी हैं। एक ही चट्टान को काटकर जलकुंड और उससे जुड़े छोटे तालाबों को जलमार्गों के माध्यम से बनाया गया है। अन्य संरचनाओं में हमाम, एक अष्टकोणीय कुआं जिसमें जल की धाराएं फैली हुई हैं, एक संरचनात्मक परिसर और गांव के पश्चिम में स्थित जलाशय पर सिकंदर लोदी का बांध शामिल हैं। बाबर ने इस उद्यान का नाम बाग-ए-नीलूफर रखा था, जिसका अर्थ होता है कमल उद्यान...। पर आज यह अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।

Published on:
22 Feb 2026 06:29 pm
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