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स्कूल भूमि पर अतिक्रमण…बिना कार्रवाई चौथी बार भी बैरंग लौटी टीम

लिखा-पढ़ी, चिह्नीकरण पर नहीं हो रही तो जमीन अतिक्रमण मुक्त क्षेत्रीय लोगों में रोष, पालिका पर लगाए आरोप dholpur, राजाखेड़ा. उपखंड मुख्यालय के हाटमैदान मुख्य मार्ग पर स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की करीब 13 विस्वा बेशकीमती सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला अब प्रशासनिक उदासीनता की खुली मिसाल बन चुका है। 2002 में […]

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स्कूल भूमि पर अतिक्रमण...बिना कार्रवाई चौथी बार भी बैरंग लौटी टीम Encroachment on school land... The team returned empty-handed for the fourth time without taking any action

लिखा-पढ़ी, चिह्नीकरण पर नहीं हो रही तो जमीन अतिक्रमण मुक्त

क्षेत्रीय लोगों में रोष, पालिका पर लगाए आरोप

dholpur, राजाखेड़ा. उपखंड मुख्यालय के हाटमैदान मुख्य मार्ग पर स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की करीब 13 विस्वा बेशकीमती सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला अब प्रशासनिक उदासीनता की खुली मिसाल बन चुका है। 2002 में आवंटित जमीन को प्रशासन अब तक अतिक्रमण मुक्त नहीं करवा पाया है। अनुमानित 5 से 7 करोड़ रुपए कीमती जमीन पर दो वर्षों से कई दर्जन शिकायतें, आदेश, सीमांकन और निरीक्षणों की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं, लेकिन कब्जा हटाने के लिए जेसीबी लेकर पहुंचा प्रशासन का भारी भरकम दस्ता और पुलिस फोर्स शनिवार को भी बेरंग ही लौट आया।

शिकायतकर्ताओं की संघर्ष समिति के अनुसार भू-प्रबंधन विभाग का भरतपुर से आया दल इस वर्ष चार बार मौके पर पहुंच चुका है। जिसके साथ हर बार स्थानीय तहसीलदार व स्थानीय दस्ते के साथ दो बार विधिवत सीमांकन किया गया, तीसरी बार टीम एक पुराना सत्य लौटी और चौथी बार अतिक्रमण हटाने की जगह पुन: चिह्नीकरण हुआ, लेकिन नगर पालिका सब कुछ स्पष्ट होने के बाद भी अतिक्रमण न हटा सकी। नगर पालिका, तहसील और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। जमीन पर चूना डलवाया गया, दस्तावेज देखे गए, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी बुलडोजऱ नहीं चला और टीम बैरंग लौट गई।

क्या कानूनी गली देने की तैयारी

सारे प्रकरण में अब नगर पालिका की भूमिका भी संदिग्ध होने के आरोप बालिका विद्यालय बचाओ संघर्ष समिति के लोग लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जब स्पष्ट आदेश हैं कि सीमांकन में अतिक्रमण मिलने पर उसे ध्वस्त किया जाए और अतिक्रमण चिह्नित भी राजस्व विभाग ने कर दिया, नगर पालिका अपनी जेसीबी भी लेकर गई, उसके बाद भी अपनी बेशकीमती जमीन को मुक्त करवाने की जगह अतिक्रमणकर्ताओं को 7 दिन का समय क्यों दिया गया? जबकि अतिक्रमी न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर पुन: अतिक्रमण को बचाने का प्रयास कर सकते हैं। पूर्व में यह स्पष्ट भी हो चुका है। ऐसे में अब समिति में शामिल हुनर शक्ति फाउंडेशन, ओमप्रकाश, पवन, रामकिशोर व अन्य ने नगरपालिका के अधिकारियों की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।

सीएमओ से आदेश के बाद भी पालिका मौन

मामले में परिवाद संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री कार्यालय, शासन सचिव, जिला कलक्टर और संभागीय आयुक्त तक दिए गए। उच्च स्तर से निर्देश जारी हुए, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनका कोई असर दिखाई नहीं दिया। आदेशों की फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूमती रही। विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी स्थानांतरित कते रहे। बैठकें हुईं, रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन जमीन आज भी कब्जे में है जो कि प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सरकारी जमीन पर मुनाफे का कारोबार

संघर्ष समिति के सदस्यों का आरोप है कि उक्त सरकारी भूमि पर निजी मैरिज होम का संचालन किया जा रहा है। यानी सरकारी संपत्ति पर कब्जा कर मोटे मुनाफे का कारोबार वर्षों से जारी है। इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान तो हो ही रहा है, साथ ही अतिक्रमण माफिया मोटा मुनाफा कमा कर ताकतवर भी होता जा रहा है। वहीं कानून के शासन पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अब या तो कार्रवाई या आंदोलन

संघर्ष समिति के अनुसार इस बार फिर प्रशासन किन कारणों से वापस लौट गया यह सवाल का जवाब देना ही होगा। कहीं राजनीतिक दबाव या कोई अन्य दबाव तो काम नहीं कर रहा है। यदि शीघ्र अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो यह मुद्दा अब जनआंदोलन का रूप ले सकता है। जिसकी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

हमने और हमारी टीम ने अथक प्रयासों से जमीन का चिह्नीकरण के साथ अतिक्रमण को चिह्नित कर दिया । अब नगर पालिका को अतिक्रमण हटवाना है। उन्होंने किन कारणों से 7 दिन का समय दिया है, उनसे बात करेंगे।

-दीप्ति देव, तहसीलदार राजाखेड़ा