धौलपुर

Dholpur: जिले में फर्जी सर्टिफिकेट बनवा…पात्र दिव्यांगों के हकों पर डांका

सरकार राजकीय सेवाओं में दिव्यांग कोटे से कर्मियों की नियुक्ति करती है। लेकिन कई लोग इसी कोटे का फायदा उठाते हुए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बना पात्र दिव्यांगों की नौकरी पर डांका डालने से नहीं चूक रहे।
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Dholpur news
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धौलपुर. जिले के 70 दिव्यांग शिक्षकों के हुए पुन: परीक्षण में 8 शिक्षक 40 प्रतिशत दिव्यांगता से कम यानी अपात्र पाए गए हैं। इनमें से एक-दो शिक्षकों की दिव्यांगता प्रतिशत तो शून्य है। जिन पर कार्रवाई को लेकर शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट जिला परिषद को भेजी है। जबकि इन शिक्षकों के अलावा 22 शिक्षक ऐसे भी हैं जो कोई न कोई बहाना बनाकर सरकार गठित मेडिकल बोर्ड के सामने अपनी दिव्यांगता की जांच कराने तक नहीं पहुंचे हैं।

सरकार राजकीय सेवाओं में दिव्यांग कोटे से कर्मियों की नियुक्ति करती है। इसके लिए बाकायदा दिव्यांगों का आरक्षण तय होता है, लेकिन कई लोग इसी कोटे का फायदा उठाते हुए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बना पात्र दिव्यांगों की नौकरी पर डांका डालने से नहीं चूक रहे। राज्य सरकार ने ऐसे ही शिक्षकों की दिव्यांगता जांच के लिए गत दिनों हर जिलों में मेडिकल बोर्ड का गठन कर शिक्षकों की दिव्यांगता को जांचा और परखा गया था। राज्य सरकार ने इस जांच प्रक्रिया में वर्ष 2016, 2018, 2021 और 2022 में नियुक्त होने वाले शिक्षकों को शामिल किया था। इस कड़ी में धौलपुर जिले के 70 दिव्यांग शिक्षकों की जांच की जानी थी, जिन्हें राजकीय बहादुर मैमोरियल चिकित्सालय भरतपुर में सीएमएचओ गठित मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होना था। जिला शिक्षा विभाग के आदेश के बाद इन 70 दिव्यांग शिक्षकों में से 48 शिक्षक अपनी दिव्यांगता की जांच कराने पहुंचे थे, जबकि 22 शिक्षकों ने कोई न कोई बहाना बनाकर जांच से दूरी बना ली। इन 22 शिक्षकों में से 6 महिला शिक्षक हैं तो 26 पुरुष शिक्षक। दिव्यांग शिक्षकों की यह जांच प्रक्रिया कार्मिक विभाग और एसओजी के अधीन कराई गई।

किसी की 10 तो किसी 15 प्रतिशत दिव्यांगता

सरकार गठित मेडिकल बोर्ड की यह जांच फरवरी-मार्च में की गई थी, जिसमें 48 दिव्यांग शिक्षकों की दिव्यांगता का सत्यापन किया गया। सत्यापन के बाद मेडिकल बोर्ड ने इन शिक्षकों दिव्यांगता रिपोर्ट जिला शिक्षा विभाग को भेजी। जिसमें कई चौकाने वाली बातें सामने आईं मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार इन 48 दिव्यांग शिक्षकों में 8 शिक्षक ऐसे पाए गए जिनकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम है। इनमें किसी शिक्षक की दिव्यांगता 10 प्रतिशत है तो किसी की 15 प्रतिशत। सबसे बड़ी बात यह है कि इन शिक्षकों में 1-2 शिक्षक ऐसे भी हैं जिनकी दिव्यांगता प्रतिशत शून्य है। यानी यह शिक्षक शरीरिक रूप से हष्ट और पुष्ट हैं।

पुन: परीक्षण पर शिक्षक ले आएं हैं स्टे

चोरी और ऊपर से सीना जोरी की कहावत...इन शिक्षकों में से कुछ शिक्षकों पर सटीक बैठती है। जानकारी के अनुसार दिव्यांगता की जांच से दूर रहने वाले 22 शिक्षकों में से कुछ शिक्षक इस जांच पर स्टे तक ले आए, जिससे इस जांच प्रक्रिया में ही शामिल नहीं होना पड़े, तो कोई बहाना बनाकर अपनी दिव्यांगता की जांच कराने नहीं पहुंचे। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि जो शिक्षक पुन: परीक्षण प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए हैं। उनकी जांच के लिए मेडिकल बोर्ड को पत्र लिखा गया है। मेडिकल बोर्ड के आदेश के बाद इन शिक्षकों को परीक्षण प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा जाएगा और अगर उसके बाद भी यह प्रक्रिया से दूर रहते हैं तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अन्य जिलों में भी सामने आए ऐसे मामले

दिव्यांग कोटे से सरकारी नौकरी पाने वाले फर्जी शिक्षकों के मामले सामने आने के बाद सरकार ने इनके पुन: परीक्षण कराने की कार्रवाई प्रारंभ की थी। जिसके बाद प्रमाणपत्रों की जांच और पुन: परीक्षण में फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आए हैं। हालिया जांच अभियानों में झालावाड़ सहित अन्य जिलों में मेडिकल बोर्ड ने पुन: परीक्षण किए जाने पर कई शिक्षकों की दिव्यांगता तय प्रतिशत से बहुत कम या सामान्य पाई गई है, जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त करने और कानूनी कार्रवाई करने के कदम उठाए गए।

पात्र दिव्यांगों के हकों पर डांका

देखा जाए तो राजकीय सेवा में दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने के लिए 40 प्रतिशत से ऊपर दिव्यांगता जरूरी है, लेकिन कई लोग सरकारी नौकरी पाने के चक्कर में 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता होने या फिर नहीं होने पर भी 40 प्रतिशत से ज्यादा का फर्जी सर्टिफिकेट बनवा पात्र दिव्यांग लोगों के हकों को छीन लेते हैं। इस जांच प्रक्रिया में हालांकि इस पुन: परीक्षण में नेत्रहीन और पूर्णरूस से दिव्यांग शिक्षकों को मिली थी।

दिव्यांग शिक्षकों के पुन: परीक्षण की रिपोर्ट जिला परिषद सीओ को भेज दी है। पर पर निर्णय जिला स्थापना समिति की बैठक में लिया जाएगा। जो शिक्षक पुन: परीक्षण कराने नहीं पहुंचे हैं उनको नोटिस जारी किए हैं और साथ ही मेडिकल बोर्ड को भी पत्र लिखा गया है।

-आरडी बंसल, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक)

Published on:
28 Jun 2026 08:14 pm