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धौलपुर. शहर में शिक्षा का केन्द्र बने लगभग 40 कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। इन संस्थानों पर ना फायर एनओसी है और ना ही यह भवन सुरक्षा मानकों का ध्यान रख रहे। इन संस्थानों में से अधिकों के पास तो कोचिंग संचालन का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। कई संस्थान बेसमेंट, पहली और दूसरी मंजिलों पर चल रहे हैं जहां आपात स्थिति में निकासी के नाम पर केवल एक संकरा रास्ता ही है।
गत दिनों लखनऊ में संचालित कोचिंग संस्थान में हुई आगजनी की घटना में 15 छात्रों की जान चली गई। जिसके बाद देश भर में संचालित कोचिंग संस्थानों की जांच पड़ताल प्रारंभ हुई और जो संस्थान अमानक पाए गए उनको सीज किया जा रहा है, लेकिन धौलपुर शहर में इस ओर प्रशासन का कभी ध्यान ही नहीं जाता। ऐसा नहीं है कि यहां कोचिंग संचालक नियमों का पालन कर रहे हों, बल्कि यहां सरे आम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राज्य सरकार सहित केन्द्र सरकार ने कोचिंग संचालन के लिए कड़े नियम तक बना रखे हैं, लेकिन शहर में संचालित लगभग 30 से 40 कोचिंग संस्थानों में से कोई भी सुरक्षा की दृष्टि और नियम पालना नहीं कर रहा। शिक्षा मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार कोचिंग सेंटर केवल सुरक्षित इमारतों में ही चल सकते हैं, जिनके पास कम से कम दो निकास मार्ग हों।
हाइवे किनारे संचालित कोचिंग संस्थान
राजस्थान पत्रिका ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों की जांच पड़ताल की तो भयाभय सत्यता सामने आई। यहां अधिकतर संस्थान हाइवे किनारे ही संचालित किए जा रहे हैं, जो कि किसी भी प्रकार के नियमों का पालन ही नहीं कर रहे। इन संस्थानों में एनओसी की बात करें तो नगर परिषद से केवल एक संस्थान ने ही फायर एनओसी ले रखी है, जबकि शेष संस्थानों का संचालन बगैर फायर एनओसी के ही किया जा रहा है, सबसे बड़ी बात यह है कि इन संस्थानों में से कई का संचालन बेसमेंट में तो कई का पहली और दूसरी मंजिल पर किया जा रहा है।
एक ही सीढ़ी..वह भी संकरी
कई कोचिंग संस्थानों का संचालन पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर किया जा रहा है। जिसके प्रवेश और निकासी के लिए अक्सर केवल एक संकरी सीढ़ी ( डेढ़ या दो फीट चौड़ी) होती है। जहां भीड़ होने पर भगदड़ का खतरा बढ़ जाता है। इनमें वेंटिलेशन न के बराबर होता है और अग्निशमन यंत्र या आपातकालीन खिड़कियां नहीं पाई जातीं। छात्रों की क्षमता से अधिक भीड़ होने और लकड़ी, प्लाई के पार्टीशन होने से आग तेजी से फैलती है। हाइवे किनारे संचालित एक कोचिंग सेंटर की बात करें तो उसकी क्लास बेसमेंट और दूसरी माले पर संचालित हो रही हैं। ऊपर जाने के लिए केवल 2 से2.5 फीट का संकरा रास्ता है। ऐसी स्थिति में आगजनी की घटना होती है तो बड़ी अनहोनी की संभावना बढऩा लाजिमी है।
छोटे से कमरे में 30 से 40 बच्चे बैठाते
सरकार ने कोचिंग संचालन के लिए नियम बनाया हुआ है जहां प्रत्येक छात्र के लिए कक्षा में न्यूनतम 1 वर्ग मीटर जगह उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन यहां ऐसा होता नहीं दिखता। यहां अधिकतर कोचिंग संस्थानों में छात्रों को पढ़ाने वाले कमरे 10 फीट चौड़े तो 12-15फीट लम्बे ही दिखाई दिए, जबकि इन कमरों में यह संचालक 30 से 40 बच्चों को बैठाने की व्यवस्था करते हैं। तो वहीं इन बच्चों को बैठाने के लिए संचालक लकड़ी की टेबल या फिर फाम की कुर्सियों को ही इस्तेमाल करते हैं, जो कि आगजनी की स्थिति को और बढ़ाने में मददगार होते हैं।
आंखें मूंदे प्रशासन सहित जिम्मेदा विभाग
शहर में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए संचालित होने वाली इन कोचिंग संस्थाओं के बारे में प्रशासन से लेकर सभी जिम्मेदारों विभाग को ज्ञात है, लेकिन जिम्मेदारी और कार्यशैली का अभाव होने के कारण आज तक इन कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण तक नहीं किया जाता, जो जगह-जगह शिक्षा को बेच बच्चों की जिंदगियों को खतरे में डाल रहे हैं। कहीं कोई अप्रिय घटना होती है तो हो हल्ला होकर सब शांत हो जाता है, लेकिन जवाब देही लेना वाला कोई नहीं आता। प्रशासन को भी आगे आगर ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो नियमों की अवहेलना कर रहे हैं।
कोचिंग संचालन को यह अनिवार्य
- स्थानीय प्राधिकरण या राज्य सरकार के नियमों के अनुसार कोचिंग का पंजीकरण अनिवार्य है।
- 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन प्रतिबंधित है।- शिक्षकों के पास न्यूनतम स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।
- संस्थान को भवन सुरक्षा मानकों और अग्नि सुरक्षा का पालन करना होगा तथा फायर एनओसी प्राप्त करनी होगी।
- प्रत्येक छात्र के लिए कक्षा में न्यूनतम 1 वर्ग मीटर जगह उपलब्ध होनी चाहिए।
- सीसीटीवी कैमरे, प्राथमिक चिकित्सा और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य है।
- कोचिंग संस्थानों में दो रास्ते होना जरूरी है एक आने और दूसरा जाने के लिए।
शहर में केवल एक ही कोचिंग संस्थान ने एनओसी ले रखी है। एनओसी नहीं लेने वाले संस्थानों को नोटिस जारी कर रखा है। अगर वह एनओसी नहीं लेते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
-वृषभान सिंह, अग्निशमन प्रभारी
Published on:
26 Jun 2026 08:14 pm
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