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धौलपुर. चंबल नदी से बेहिसाब निकाली जा रही बजरी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब विशेषकर राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार और प्रशासन ने रोकथाम के लिए योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। दो दिन पहले धौलपुर के पड़ोसी मध्यप्रदेश के जिले मुरैना में गठित इंटर स्टेट टास्क फोर्स की बैठक हुई। जिसमें मुरैना, धौलपुर और यूपी के आगरा जिले के प्रशासन और पुलिस अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मुख्यतय अवैध बजरी परिवहन पर कड़ाई से रोक लगाने और संयुक्त रूप से संगठित बजरी माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने पर चर्चा हुई। साथ ही सूचना को तुरंत आदान-प्रदान करने पर जोर दिया, जिससे समय रहते ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जा सके। उधर, धौलपुर जिले के प्रशासनिक, पुलिस और वन विभाग के आला आधिकारियों ने कार्रवाई के लिए रणनीति बना कर कार्य करना शुरू कर दिया।चंबल किनारे के मुख्य घाट और रास्तों पर सर्विलांस को मजबूत करने के लिए जल्द यहां पर हाइ रिव्यूलोशन कैमरे लगेंगे। इसको लेकर जयपुर से सूचना प्रौद्योगिकी की टीम ने वन विभाग के आला अधिकारियों के साथ चंबल घाटों का दौरा किया है। फिलहाल करीब 4 से 5 लोकेशन पर कैमरे लगाने का निर्णय हुआ है। माना जा रहा है कि यह कैमरे मानसूनी बारिश से पहले लगने की संभावना है। उधर, पुलिस प्रशासन ने भी चंबल किनारे घाट और रास्तों पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि अवैध बजरी रोकने के लिए सरकार ने संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए गत दिनों करीब 65 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। जिसमें धौलपुर जिले को भी संसाधन मिलेंगे।
प्रदेश के 5 जिलों में 40 प्वाइंटों पर होगी निगरानी
राजस्थान में चंबल नदी के घाटों से प्रमुख रूप से पांच जिलों से अवैध रूप से बजरी निकासी हो रही है। इसमें कोटा, सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर और बूंदी जिला शामिल है। सुप्रीम कोर्ट कुछ समय पहले चंबल से अवैध बजरी परिवहन और जलीय जीवों को पहुंच रहे नुकसान पर खासी नाराजगी जता चुका है। जिस पर राजस्थन सरकार ने इन पांच जिलों में चंबल बजरी निकासी के प्रमुख घाट और रास्तों को चिह्नित किया। जिसमें इन जिलों में कुल 40 स्थान चिह्नित किए जिसमें 16 स्थान अति संवेदनशील हैं। धौलपुर में संवेदनशील स्थानों में मोरोली, तिर्घरा, बसई डांग, झिरी, कोतवाली थाना क्षेत्र समेत कई और स्थान शािमल है। जहां से पूर्व में लगातार अवैध बजरी का बड़े स्तर पर परिवहन होता रहा है।
लाइव फीड के लिए बिजली बनी समस्या...
चंबल की अवैध बजरी परिवहन के लिए वन विभाग और पुलिस की ओर से चिह्नित करीब 16 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यह कैमरे लाइट विजन और हाइ रिव्यूलीजन के होंगे। कुछ मुख्य कैमरे ह 360 डिग्री मूवमेंट कर सकेंगे और इनकी रेंज करीब 4 से 5 किलोमीटर तक होगी। लेकिन संकट यह है कि चंबल किनारे घाटों पर बिजली सप्लाई नहीं है। साथ ही बारिश और चंबल में बाढ़ के दौरान कैमरों को नुकसान भी पहुंच सकता है। ऐसे में डीओआईटी की टीम ने वन विभाग की टीम के साथ सर्वे कर कुछ स्थानों को फिलहाल पायलट प्रोजक्ट के तहत चिह्नित किया है। करीब 4 से 5 कैमरे लगाए जाएंगे। यह शहर और प्रमुख घाटों के रास्तों पर होंगे। जहां इनकी निगरानी भी हो सके और किसी तरह का नुकसान न हो। इसके लिए हट और सुरक्षाकर्मी भी लगेंगे। वहीं, बिजली समस्या को दूर करने के लिए वन विभाग की ओर से सोलर का सुझाव दिया है, जिससे कैमरों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति मिल सके। उधर, पड़ोसी जिले में मुरैना में भी कैमरे लगाने का कार्य शुरू हो गया है।
सूचना तुरंत हो शेयर...
बैठक के दौरान बजरी माफिया की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सूचना पर विशेष जोर दिया गया। चंबल संभाग प्रशासन के अधिकारियों ने सभी को अपनी-अपनी सूचनाएं समय पर शेयर करने के लिए कहा, जिससे संगठित बजरी निकासी पर कड़ाई से कार्रवाई हो सके। इसमें अधिकारियों के मोबाइल नम्बर शेयर करने, गु्रप बनाने और डेटा भी शेयर करने को कहा गया।
- मुरैना में तीन प्रदेशों के प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई थी। जिसमें चंबल की अवैध बजरी परिवहन पर कड़ी कार्रवाई करने और आपस में बजरी संबंधी सूचनाएं शेयर करने पर जोर दिया है। अवैध बजरी परिवहन पर निगाह रखने के लिए जल्द प्रमुख घाट और रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। वर्तमान में पेट्रोलिंग नियमित की जा रही है। साथ में अन्य विभागों का सहयोग लिया जा रहा है।
- चेतन वी.कुमार, डीएफओ धौलपुर
Published on:
26 Jun 2026 07:51 pm
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