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Dholpur, सरमथुरा. सरकार की शिथिलता से शहर में पीएम आवास योजना सपना बनकर रह गई है। शहरवासियों के पास जमीन का ना तो पट्टा है ना ही रजिस्ट्री। केन्द्र सरकार की योजना के कानूनी दांव पेच में फंसने से लोगों को फायदा नहीं मिल रहा है।
दरअसल, योजना के तहत आवेदन करने के बाद भी लोगों को फायदा नहीं मिला है। नगर पालिका क्षेत्र में पुस्तैनी जमीन पर काबिज लोगों के पास भूमि के दस्तावेज नहीं होने के कारण अधरझूल में लटक गए हैं। वही स्वायत्तता शासन विभाग की गाइड लाइन के अनुसार निर्धारित राशि जमा कराने के बाद भी पट्टे नहीं मिल रहे हैं ना ही निर्माण एनओसी दी जा रही है। जिसके कारण धरातल पर सरकार की योजनाओं का लोगों को फायदा नहीं मिल रहा है।
नगर पालिका क्षेत्र में योजनाओं की बात की जाए तो आलम यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 के तहत स्वीकृत आवासों का निर्माण पूर्ण होने के बाद भी कई लाभार्थियों की अंतिम किस्त का भुगतान अटका हुआ है, जो कि नगर पालिका के चक्कर लगा कर थक चुके हैं।
विडंबना यह है कि शहरी सेवा शिविर सिर्फ सफाई, रोशनी, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, राशनकार्ड में शुद्धि आदि सुविधाओं तक सीमित हो गया है, जबकि शिविर में शिक्षा, महिला बाल विकास, राजस्व, पशुपालन, बिजली अन्य विभागों से संबंधित समस्याएं गौण हो गई है। लोगों को रुचि नहीं होने के कारण शिविर में दिनभर कार्मिक खाली बैठे गपशप मार रहे हैं।
पालिका में पूर्व पत्रावलियां फांक रही धूल
शहर के लोगों ने अपनी पुस्तैनी जमीन का मालिकाना हक पाने के लिए नगर पालिका में तीन-तीन साल से पत्रावलियां जमा कराई हैं, जबकि नगर पालिका प्रशासन ने तीन साल गुजरने के बाद भी पट्टे जारी नहीं किए हैं, जबकि कई लोगों ने नए नियमों के अनुसार राशि भी जमा कराई हुई है। पट्टे नहीं मिलने के कारण लोगों में रोष व्याप्त है।
पुस्तैनी संपत्तियों का मिल रहा मालिकाना अधिकार
ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तैनी संपत्तियों के मालिकाना अधिकार से वंचित लोगों के लिए ग्रामीण सेवा शिविर वरदान साबित हो रहे हैं। बीझौली स्थित मिनी सचिवालय पर मंगलवार को आयोजित शिविर में पंचायती राज विभाग ने सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को पट्टा वितरित किया गया, ताकि वे अपनी ही भूमि पर सुरक्षित और कानूनी रूप से अधिकार प्राप्त कर सकें।
एसडीएम अल्का श्रीवास्तव ने बताया कि शिविर में राजूलाल पुत्र भरोसी निवासी सुरारी खुर्द, हुकम सिंह पुत्र सुआलाल निवासी सुरारी खुर्द व अमरलाल पुत्र शिवचरन मीना निवासी मानपुरा को पट्टे जारी किए गए। इसी प्रकार जमीन के सरकारी रिकॉर्ड (जमाबंदी) में लिपिकीय त्रुटि के कारण दुष्यंत सिंह मीना पुत्र कुंवरलाल का नाम कानूनी रूप से दर्ज होना सुनिश्चित था। किंतु पूर्व में कंप्यूटरीकरण अथवा किसी मानवीय असावधानी के कारण रिकॉर्ड में उनके स्थान पर त्रुटिवश सतीश पुत्र कुंवरपाल नाम अंकित हो गया। शिविर में राजस्व विभाग ने दस्तावेजों की पड़ताल कर रिकॉर्ड में नाम को शुद्ध किया गया।
Published on:
24 Jun 2026 07:09 pm
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