
धौलपुर. देर आए दुरुस्त आए...आखिर नगर परिषद को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का ध्यान आ ही गया। परिषद ने सार्वजनिक स्थलों से आवारा श्वानों को पकडऩे का कार्य प्रारंभ कर दिया है। हालांकि आदेशों के तहत श्वानों के लिए सेल्टर होम की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि श्वानों को पकड़ उनका वेक्सीनेशन कर शहर से दूर डांग क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। जिस कारण श्वान वापस शहर की ओर रुख कर सकते हैं।
गत वर्ष राजस्थान हाइकोर्ट और देश की सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक जगहों पर घूमने वाले निराश्रित श्वानों को लेकर गंभीरता जताई थी। साथ ही निकायों को उन्हें पकडऩे और उनकी नशबंदी करा सेल्टर होम बनाने के आदेश दिए थे। जिसमें श्वानों को सुविधानुसार रखा जा सके, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद कई माहों तक नगर परिषद ने मामले की सुध तक नहीं ली। जिस कारण शहर में निराश्रित श्वानों का आतंक दिन प्रतिदिन बढऩे लगा। अस्पतालों से लेकर रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड सहित स्कूलों मेें भी आवारा श्वानों का जमावड़ा लगा रहता है। आखिर प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद नगर परिषद ने निराश्रित श्वानों को पकडऩे का कार्य प्रारंभ कर दिया है। यह कार्य ठेका पद्धति के तहत किया जा रहा है। जिसमें ठेकेदार को समयावधि के दौरान 1000 हजार श्वानों को पकडऩे का लक्ष्य दिया गया है। ठेकेदार ने भी श्वानों को पकडऩा प्रारंभ कर दिया है और बीते दो दिनों में जवाहर नवोदय विद्यालय और कोर्ट परिसर से 21 श्वानों को पकडकऱ उनका वेक्सीनेशन कर डांग क्षेत्र में छोड़े गए हैं।
ना सेल्टर होम और ना नसबंदी
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार श्वानों के लिए उपयुक्त स्थल पर सेल्टर होम बनाकर उसमें श्वानों को रखने के आदेश दिए गए थे साथ ही पशुपालन विभाग के माध्यम से श्वानों की नसबंदी कराने के आदेश कोर्ट ने दिए थे, लेकिन परिषद इन दोनों ही आदेशों को पूरा करती नहीं दिख रही। एक ओर जहां परिषद श्वानों के लिए सेल्टर होम की व्यवस्था नहीं कर सका है तो वहीं श्वानों को बगैर नसबंदी के ही डांग क्षेत्रों में शहर से दूर छोड़ा जा रहा है। जिससे श्वानों की जनसंख्या वृद्धि पर कुछ खास फर्क पडऩे की संभावना कतई नहीं होगी।
दो माह में श्वानों ने 800 से ज्यादा लोगों को बनाया शिकार
आप चाहे जिला अस्पताल चले जाएं या फिर जनाना, या फिर रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड और स्कूल आवारा श्वानों का झुण्ड आदमखोरी करता आपका मिल जाएगा। जो आए दिन लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को देखें तो जिला अस्पताल प्रतिदिन 30 से 40 मामले डॉग बाइट के आ रहे हैं। जिनमें से कई मामले तो बेहद ही गंभीर होते हैं। गत दो माहों के आंकड़ों पर गौर करें तो इन आवारा श्वानों ने 800 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया। जिसमें मई माह में 405 तो जून में यह बढकऱ 462 तक जा पहुंचे। यह तो वह मामले में जो जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
बंदर, निराश्रित गोवंश और बढ़ा रहे समस्या
शहर से लेकर जिले भर में आवारा श्वानों की ही समस्या प्रमुख नहीं है। बल्कि इस समस्या को बंदर और निराश्रित गोवंश और बढ़ा रहे हैं। शहर में जगह-जगह बंदरों की टोली धमाचौकड़ी मचाए रहती है। जिले भर में इन बंदरों का खौफ इस कदर है कि कई लोग इनके कारण हादसों का शिकार होकर अपनी जान तक गंवा चुके हैं तो न जाने कितने लोग घायल हो चुके हैं। यही हाल निराश्रित गोवंश का है। जिनके कारण हाइवों पर रोज हादसे हो रहे हैं और लोग अपनी जान तक गंवा रहे हैं। लेकिन गोवंश के नाम पर राजनीति करने वाली राजनीतिक पार्टियां और सरकारें उनके उत्थान का कारण बनने से सदा कतराती रहती हैं, जबकि देश की अदालतें सहित सर्वोच्च न्यायालय ने निीराश्रित श्वानों को पकडऩे के साथ निराश्रित गोवंश को पकड़ गौशालाओं और अन्यंत्र जगह रखने के भी आदेश दिए, लेकिन इस ओर विभाग का कोई ध्यान नहीं गया है और लोग इन निराश्रित पशुओं का शिकार हो रहे हैं। हां बंदर और निराश्रित गोवंश को पकडऩे के नाम पर नगरीय निकायें फर्जीवाड़ा जरूर करते दिख जाएंगे और इनको पकडऩे का काम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहता है।