-राज्य सरकार ने प्राथमिक स्तर पर लागू नो डिटेंशन पॉलिसी की खत्म – छात्रों को पढ़ाई और परीक्षा दोनों को लेना होगा गंभीरता से – परीक्षार्थियों को पूरक परीक्षा देने का भी मिलेगा अवसर – आदेश से प्रारंभिक कक्षाओं की पढ़ाई पर पड़ेगा असर धौलपुर. राज्य सरकार ने पांचवीं और कक्षा आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं […]
-राज्य सरकार ने प्राथमिक स्तर पर लागू नो डिटेंशन पॉलिसी की खत्म
- छात्रों को पढ़ाई और परीक्षा दोनों को लेना होगा गंभीरता से
- परीक्षार्थियों को पूरक परीक्षा देने का भी मिलेगा अवसर
- आदेश से प्रारंभिक कक्षाओं की पढ़ाई पर पड़ेगा असर
धौलपुर. राज्य सरकार ने पांचवीं और कक्षा आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने प्राथमिक स्तर पर लागू ‘नो डिटेंशन’ पॉलिसी को अब खत्म कर दिया है। यानी अब इन कक्षाओं में पढऩे वाले छात्र फेल भी हो सकेंगे। हालांकि उन्हें पूरक परीक्षा देने का मौका भी दिया जाएगा, लेकिन पूरक परीक्षा में भी फेल होने पर परीक्षार्थी संबंधित कक्षाओं में ही रह जाएगा। परीक्षाओं में यह व्यवस्था इस सत्र नहीं बल्कि अगले सत्र से लागू की जाएगी।
कक्षा आठवीं और पांचवीं परीक्षा में परीक्षार्थी अब अनुत्तीर्ण भी होंगे। राज्य सरकार ने प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों कक्षाओं की परीक्षाओं में नई व्यवस्था लागू की है। सरकार ने प्राथमिक स्तर पर लागू ‘नो-डिटेंशन’ यानी किसी को फेल न करने की व्यवस्था को खत्म कर दिया है, हालांकि यह नई व्यवस्था अगले साल से लागू की जाएगी। जिसका नोटिफिकेशन शिक्षा विभाग ने मंगलवार को जारी किया। शिक्षा विभाग ने अभी तक कक्षा पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को अनुत्तीर्ण नहीं करने की व्यवस्था कर रखी थी और परीक्षार्थियों के पूरक परीक्षा में भी फेल होने पर उन्हें आगे के लिए प्रमोट कर दिया जाता था। लेकिन अब राज्य सरकार ने इसमें बदलाव किया है। नए प्रावधान के दौरान अब परीक्षार्थियों को पूरक परीक्षा में भी न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य होगा। अन्यथा बच्चे को उसी कक्षा में रोक दिया जाएगा।
पढ़ाई और परीक्षाओं को लेंगे गंभीरता से
सरकार और शिक्षा विभाग के इस आदेश से पांचवीं और आठवीं कक्षाओं की शिक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दोनों ही कक्षाओं में नो डिटेंशन लागू होने से पहले जहां परीक्षार्थी इन दोनों ही परीक्षाओं को गंभीरता से नहीं लेते थे, और प्राथमिक स्तर पर परीक्षा का भी दबाव अपेक्षाकृत कम होता था, लेकिन नो डिटेंशन की पॉलिसी खत्म करने के बाद छात्रों को इन पढ़ाई और परीक्षाओं को गंभीरता के साथ लेना होगा। तो वहीं शिक्षकों को भी छात्रों की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देना होगा, क्योंकि अब परिणाम सीधे बच्चे के अगले क्लास में जाने को प्रभावित करेगा। इससे पहले इसी तरह का प्रावधान आठवीं बोर्ड परीक्षा में लागू किया जा चुका है। अब सरकार ने इसे पांचवीं तक लागू कर दिया है, जिससे प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर ही बुनियादी सीखने के परिणाम सुधारने की कोशिश मानी जा रही है।
सरकार को अब याद आया गिरता शिक्षा का स्तर
नो डिटेंशन यानी किसी को फेल न करने की व्यवस्था सालों से लागू है। जिसे केन्द्र सरकार ने खत्म भी कर दिया था। जिसका अनुसरण करते हुए देश के 16 से अधिक राज्यों में इसे पहले ही संशोधित किया जा चुका है, लेकिन राजस्थान सरकार ने इस संशोधन को लागू करना उचित नहीं समझा और यह बदस्तूर जारी रहा, लेकिन अब सरकार ने इस व्यवस्था में संशोधन कर दिया है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे बच्चों के सीखने का स्तर गिर रहा है। बच्चे पढ़ाई को लेकर लापरवाह हो गए हैं, क्योंकि उनको फेल होने का डर ही नहीं रहता है।
इस साल यह रहा कक्षा पांचवीं रिजल्ट
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 5वीं कक्षा का रिजल्ट इस सत्र में 97.75 फीसदी रहा। 5वीं में 13,68,947 में से 13,33,936 स्टूडेंट पास हुए। 74 हजार छात्र और छात्राओं की सप्लीमेंट्री आई है। साथ ही साढे 6 हजार बच्चों के परिणाम रोके भी गए हैं। पर जो बच्चे इस परीक्षा में पास नहीं हुए है वो निराश न हों उन्हें परीक्षा पास करने का एक और मौका मिलेगा।
अब यह होगी नहीं व्यवस्था
शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए यदि छात्र वार्षिक परीक्षा में असफल होते हैं, तो उन्हें 45 दिनों या 2 महीने के भीतर पुन: परीक्षा का मौका मिलेगा। यदि छात्र इस परीक्षा में भी असफल रहते हैं, तो उन्हें उसी कक्षा में रोका जा सकता है। अब तक व्यवस्था यह थी कि पांचवीं में किसी विद्यार्थी को अनुत्तीर्ण नहीं किया जाता था। कमजोर छात्रों को पूरक घोषित कर दूसरी परीक्षा में बैठाया जाता और अंतत: सभी को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था।
राज्य सरकार ने कक्षा पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं में संशोधन किया है। अभी तक परीक्षार्थियों के फेल होने पर उन्हें आगे प्रमोट कर दिया जाता था, लेकिन अब पूरक परीक्षा में भी फेल होने पर छात्रा उसी कक्षा में ही रोक दिया जाएगा।
-पप्पू सिंह सिकरवार, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक