
धौलपुर.रक्षाबंधन का त्योहार खत्म होने के बाद सोमवार को रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैण्ड पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान अपने कर्म स्थल को लौटने वाले और रक्षाबंधन का त्योहार मना घर वापसी करने वाली बहनों को बसों के इंतजार में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालात यह थे कई लोग थके हारे स्टैण्ड परिसर में ही बैठे रहे। तो वहीं रेलवे स्टेशन का भी नजारा भीड़भाड़ वाला रहा। धौलपुर स्टेशन पर रुकने वाली गाडिय़ों में सवार होने के लिए यात्रियों में होड़ दिखती रही।
भाई बहन के अटूट प्यार का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को मनाया गया। जिसको लेकर बाहर रहने और नौकरी करने वालों का हुजूम रेलवे स्टेशन सहित रोडवेज बस स्टैण्ड और निजी स्टैण्डों पर उमड़ पड़ा। बसों के इंतजार में यात्री काफी देर तक स्टेशन पर खड़े रहे। बस के पहुंचते ही उसमें सवार होने के लिए यात्रियों में होड़ मच गई। इससे स्टेशन पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति भी बनी रही। सोमवार सुबह से बस स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ बढऩे लगी। पर्व मनाने के बाद लोग अपने-अपने कार्यस्थलों और घरों की ओर लौट रहे थे। बस के स्टेशन पर पहुंचते ही यात्री सीट पाने के लिए तेजी से बस की ओर बढ़ रहे थे। भीड़ अधिक होने के कारण यात्रियों को बस में चढऩे के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान निजी वाहनों सहित डग्गेमार वाहनों की भी पौ बारह रही। जिन्होंने यात्रियों ने मनमाने दाम वसूले।
66 घंटे रही रोडवेज में नि:श्ुल्क यात्रा
रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर रोडवेज निगम ने महिलाओं को तोहफा देते हुए फ्री यात्रा की भी सेवा उपलब्ध करवाई। यह सेवा गुरुवार रात्रि रात्रि 12 बजे से लेकर शनिवार रात्रि 11.59 तक जारी रही। देखा जाए तो महिलाओं को रोडवेज बसों 66 घंटे नि:शुल्क यात्र करने की सुविधा दी गई। जिस कारण रोडवेज बसों में भी खासी भीड़ देखी गई और अन्य यात्री भी परेशान होते रहे, लेकिन रविवार सुबह से फिर बस स्टेण्ड पर यात्रियों की संख्या बढऩे लगी। बस आने पर यात्रियों की भीड़ एक साथ सवार होने के लिए उमड़ पड़ती थी।
तय से ज्यादा वसूले दाम
त्योहार के दिनों में यात्रियों की भीड़ होने का ज्यादा फायदा निजी वाहनों सहित डग्गेमारों ने सबसे ज्यादा उठाया। जिन्होंने गंतव्य स्थानों के तय दामों से अधिक दाम वसूले। इन वाहन संचालकों की मनमर्जी यहां तक देखने को मिली कि यात्रियों को तय स्थान से पहले ही उतार दिया गया जिस कारण यात्री अपने आपको ठगा सा महसूस किया। यात्रियों का कहना था कि पर्व के बाद एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के लौटने के कारण बसों में भीड़ बढ़ गई है। स्टेशन पर बस आते ही यात्रियों को बैठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जा रही थी।
ऑटो और ई-रिक्शा का लिया सहारा
एक ओर जहां शहरी क्षेत्रों में रोडवेज के अलावा निजी वाहनों से लोगों का आवागमन सुगम रहा तो वहीं ग्रामीण इलाकों में रहने वालों को भी अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ी। दरअसल रोडवेज बसों का संचालन हाइवे पर ही किया गया जिस कारण कस्बों और ग्रामीण क्षेत्र में जाने वाले को ऑटो सहित ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों का कहना था कि सरकार ने नि:शुल्क बस यात्रा की सुविधा तो दी, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए पर्याप्त साधन नहीं मिलने से परेशानी हुई।