धौलपुर. जिले में बड़ी संख्या में वाहन विशेषकर ट्रेक्टर बिना नम्बर प्लेट के संचालित हो रहे हैं। इन वाहनों का उपयोग गैर कानूनी कार्यों में किया जाता है। अब इन वाहनों के संचालन पर जिला प्रशासन ने नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अब बिना रजिस्ट्रेशन वाले ट्रेक्टरों को डीजल या पेट्रोल नहीं मिलेगा। इसको लेकर आदेश जारी कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह सारी कसरत सुप्रीम कोर्ट में अवैध चंबल बजरी मामले में सख्त नाराजगी जताने और राजस्थान समेत एमपी व यूपी को बजरी रोकने के लिए उठाए कदमों को लेकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश के रूप में देखी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और सख्त कार्रवाई हो सकती है जिला कलक्टर (रसद) श्रीनिधि बी टी ने बताया कि बिना नम्बर प्लेट के ट्रेक्टर का उपयोग अवैध रूप से बजरी का खनन करने और उसका परिवहन करने में किया जाता है। अवैध बजरी खनन से पर्यावरण को बड़ी हानि हो रही है। साथ ही ये वाहन दुर्घटना का सबब भी बन रहे है। उन्होंने बताया कि बिना नम्बर प्लेट के वाहनों को डीजल, पेट्रोल की आपूर्ति नहीं करें। यदि किसी पम्प द्वारा बिना नम्बर प्लेट के वाहनों को डीजल, पेट्रोल की आपूर्ति करना पाया जाता है तो उसके आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के साथ ही आईपीसी धारा 188, बीएनएस की धारा 223 के तहत सरकारी आदेशों की अवहेलना करने पर पम्प संचालक के विरूद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब रहे कि जिला मुख्यालय पर हाल के समय में कई घटनाओं में अवैध बजरी लदे ट्रेक्टर-ट्रॉलियां शामिल रही हैं। गत दिनों सैंपऊ रोड और बाड़ी रोड पर पुलिस के पीछा करने पर चलते वाहन से बजरी को सडक़ पर फेंकने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
- जिले में बिना नम्बर प्लेट ट्रेक्टर को नहीं दे सकेंगे डीजल व पेट्रोल
- आदेश का उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
- सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद राजस्थान में चंबल इलाके में बढ़ी सख्ती
धौलपुर. जिले में बड़ी संख्या में वाहन विशेषकर ट्रेक्टर बिना नम्बर प्लेट के संचालित हो रहे हैं। इन वाहनों का उपयोग गैर कानूनी कार्यों में किया जाता है। अब इन वाहनों के संचालन पर जिला प्रशासन ने नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अब बिना रजिस्ट्रेशन वाले ट्रेक्टरों को डीजल या पेट्रोल नहीं मिलेगा। इसको लेकर आदेश जारी कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह सारी कसरत सुप्रीम कोर्ट में अवैध चंबल बजरी मामले में सख्त नाराजगी जताने और राजस्थान समेत एमपी व यूपी को बजरी रोकने के लिए उठाए कदमों को लेकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश के रूप में देखी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और सख्त कार्रवाई हो सकती है
जिला कलक्टर (रसद) श्रीनिधि बी टी ने बताया कि बिना नम्बर प्लेट के ट्रेक्टर का उपयोग अवैध रूप से बजरी का खनन करने और उसका परिवहन करने में किया जाता है। अवैध बजरी खनन से पर्यावरण को बड़ी हानि हो रही है। साथ ही ये वाहन दुर्घटना का सबब भी बन रहे है। उन्होंने बताया कि बिना नम्बर प्लेट के वाहनों को डीजल, पेट्रोल की आपूर्ति नहीं करें। यदि किसी पम्प द्वारा बिना नम्बर प्लेट के वाहनों को डीजल, पेट्रोल की आपूर्ति करना पाया जाता है तो उसके आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के साथ ही आईपीसी धारा 188, बीएनएस की धारा 223 के तहत सरकारी आदेशों की अवहेलना करने पर पम्प संचालक के विरूद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब रहे कि जिला मुख्यालय पर हाल के समय में कई घटनाओं में अवैध बजरी लदे ट्रेक्टर-ट्रॉलियां शामिल रही हैं। गत दिनों सैंपऊ रोड और बाड़ी रोड पर पुलिस के पीछा करने पर चलते वाहन से बजरी को सडक़ पर फेंकने की घटनाएं भी सामने आई हैं। उधर, पुलिस प्रशासन की ओर से एमपी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। यहां पर कुछ दिन पहले हाइट वाले वाहनों की जांच के लिए वॉच टावर लगाया है जिस पर हथियारबंद पुलिस कर्मी रात्रि के समय निगाह रखता है।
बजरी माफिया बेलगाम, दो वनकर्मियों की मौत
सूत्रों के अनुसार प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम के पीछे अवैध बजरी खनन बताया जा रहा है। हाल के दिनों में धौलपुर के सरमथुरा इलाके में झिरी नाके पर गत 8 जनवरी की रात वनकर्मी जितेन्द्र सिंह शेखावत बजरी माफिया ने ट्रेक्टर-ट्रॉली से कुचल गंभीर घायल कर दिया, जिसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वहीं, कुछ दिन पहले पड़ोसी जिले मुरैना के दिमनी क्षेत्र में भी बजरी माफिया के वन रक्षक हरकेश गुर्जर पर ट्रेक्टर-ट्रॉली चढ़ाने और फिर उसकी मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सर्वाच्च न्यायालय की कड़ी फटकार के बाद यूपी, एमपी और राजस्थान को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उक्त कार्रवाई भी इसी के मद्देनजर मानी जा रही है।
रजिस्ट्रेशन नम्बर नहीं होने से जुर्माना मुश्किल...
बजरी माफिया जिन ट्रेक्टर-ट्रॉलियां को अवैध चबल बजरी परिवहन में इस्तेमाल करता है, उन पर रजिस्ट्रेशन नम्बर (नम्बर प्लेट) नहीं होता है। ऐसे में उस पर जुर्माना की कार्रवाई नहीं हो पाती है। जिलेभर में अवैध बजरी खनन और पत्थर ढुलाई में लगे वाहन बेधडक़ दौड़ रहे हैं। इसी तरह हाइवे पर भी एमपी की तरफ से आने वाले कई डंपर और ट्रोला भी रजिस्ट्रेशन नम्बर को छुपाते हैं। नम्बर प्लेट्स पर मिट्टी, कालिख या फिर कपड़ा डाल देते हैं, जिससे उसका नम्बर ट्रेक नहीं हो पाता है। ऐसे में परिवहन और पुलिस को कार्रवाई करने में दिक्कत आती है।
ज्वाइंट ऑपरेशन चलाने पर हो सकता है निर्णय
सूत्रों के अनुसार चंबल की अवैध बजरी का खेल राजस्थान के साथ पड़ोसी मध्यप्रदेश और यूपी में समानांतर चल रहा है। माना जा रहा है कि अवैध बजरी माफिया पर सख्त कार्रवाई के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारें अब चंबल इलाके में कार्रवाई के लिए संयुक्त टीम का गठन कर सकते हैं। इसमें हथियारबंद पुलिस बल रहेगा। वहीं, एमपी के मुरैना में हुई घटना के बाद मध्यप्रदेश शासन ने चंबल इलाके में अस्थाई तौर पर हथियारबंद पुलिसबल तैनात किया है। अभी तक केवल हाइवे पर निगाह थी लेकिन अब बीहड़ क्षेत्र और कच्चे रास्तों पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है। इसमें जिले में डांग क्षेत्र भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार जिले में प्रशासन ने 16 स्थान चिह्नित किए हैं, जहां से अवैध बजरी परिवहन होता है।