राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में धौलपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां एसीबी की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक घूसखोर पटवारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनाई गई 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का असर धरातल पर दिखने लगा है। धौलपुर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पटवारी वीरेंद्र शर्मा को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब आरोपी पटवारी नामांतरण खोलने की एवज में रिश्वत की राशि स्वीकार कर रहा था।
जानकारी के अनुसार, परिवादी (शिकायतकर्ता) ने एसीबी के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी जमीन का नामांतरण (Mutation) खोलने के बदले संबंधित हल्का पटवारी वीरेंद्र शर्मा उससे पैसों की मांग कर रहा है। पटवारी ने काम करने के बदले भारी-भरकम रिश्वत की शर्त रखी थी, जिससे परेशान होकर पीड़ित ने कानून की मदद लेने का फैसला किया।
शिकायत मिलते ही एसीबी मुख्यालय के निर्देशानुसार DIG डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। कार्रवाई का नेतृत्व DSP ज्ञानचंद मीणा ने किया। टीम ने पहले शिकायत का गोपनीय सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। पुष्टि होने के बाद, पटवारी को पकड़ने के लिए एक सटीक 'ट्रैप' (जाल) बिछाया गया।
जैसे ही परिवादी ने आरोपी पटवारी वीरेंद्र शर्मा को रिश्वत के 50,000 रुपये थमाए, आसपास सादा वर्दी में तैनात एसीबी की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। टीम ने आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली है। एसीबी की इस अचानक हुई कार्रवाई से राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
एसीबी की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यालयों में आम जनता को परेशान करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की अब खैर नहीं है। डीएसपी ज्ञानचंद मीणा ने बताया कि आरोपी पटवारी से पूछताछ की जा रही है और उसके आवास तथा अन्य ठिकानों पर भी तलाशी ली जा सकती है ताकि भ्रष्टाचार से अर्जित अन्य संपत्तियों का पता लगाया जा सके।
एसीबी के अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी जायज काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो डरे नहीं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत इसकी सूचना दें ताकि भ्रष्टाचारियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया जा सके।