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शहर में 30 दिन में गोवंश को पकड़े, नहीं तो जुर्माना

– स्थायीय लोक अदालत ने सुनाया आदेश, पालना नहीं होने पर जिला कलक्टर व नगर परिषद पर प्रतिदिन संयुक्त रूप से 10 हजार का जुर्माना – शहर में निराश्रित गोवंशों का आतंक, वाहन चालक और राहगीरों का निकलना मुश्किल धौलपुर. जिला मुख्यालय से लेकर गांव-कस्बों से निराश्रित पशुओं आतंक बना हुआ है। इनकी चपेट में […]

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शहर में 30 दिन में गोवंश को पकड़े, नहीं तो जुर्माना Cattle in the city within 30 days, otherwise fine will be imposed

- स्थायीय लोक अदालत ने सुनाया आदेश, पालना नहीं होने पर जिला कलक्टर व नगर परिषद पर प्रतिदिन संयुक्त रूप से 10 हजार का जुर्माना

- शहर में निराश्रित गोवंशों का आतंक, वाहन चालक और राहगीरों का निकलना मुश्किल

धौलपुर. जिला मुख्यालय से लेकर गांव-कस्बों से निराश्रित पशुओं आतंक बना हुआ है। इनकी चपेट में आने से लोग जान तक गवा चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी इन निराश्रित पशुओं के आतंक से आमजन को राहत नहीं मिल पा रही है। लगातार बढ़ रही संख्या और हादसों को लेकर स्थायीय लोक अदालत धौलपुर ने एक प्रकरण में सख्त टिप्पणी करते हुए आदेश दिए हैं। कोर्ट ने एक परिवाद पर जिला कलक्टर धौलपुर और नगर परिषद आयुक्त को आदेश दिया कि उक्त निर्णय के बाद से 30 दिन में धौलपुर में निराश्रित घूम रहे गोवंश को पकड़ कर सुरक्षित रूप से गोशालाओं में भिजवाया जाए। यदि 30 दिन बाद निराश्रित गोवंश धौलपुर शहर में घूमता दिखा तो जिला कलक्टर व नगर परिषद को संयुक्तत रूप से 10 हजार रुपए प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा। उक्त जुर्माना जनकल्याण कोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं।

बता दें कि स्थायी लोक अदालत में प्रार्थी लोकेन्द्र सिंह जादौन ने शहर में निराश्रित गोवंशों को लेकर हो रही समस्या को लेकर साल 2024 में प्रार्थना पत्र देकर याचिका दायर की थी। प्रकरण में पक्षकारों के बीच समझौता वार्ता कराई लेकिन वह 25 अप्रेल 2025 को असफल रही। प्रार्थी खुद अधिवक्ता हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार 10 फीसदी टैक्स गौ संवर्धन के लिए आम स्टाम्प क्रेता से वसूल कर रहा है। इसके बावजूद भी गोवंशों को सरकार और नगर परिषद गोशालाओं में नहीं भेज पा रहे हैं। जिससे निराश्रित गोवंश आम व्यक्ति और वाहनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बहस के दौरान कहा कि जिला प्रशासन की ओर से 2 साल से इसमें कोई जवाब पेश नहीं किया गया, यह गैर जिम्मेदाराना रवैया बताता है। बहस सुनने के बाद कोर्ट ने उक्त आदेश दिया है। यह आदेश अध्यक्ष पीठासीन अधिकारी सुरेश प्रकाश भट्ट और सदस्य वीरेन्द्र उपाध्याय व रामदत्त श्रोती ने सुनाया।

बाजार से लेकर गलियों तक झुंड के झुंड

शहर में निराश्रित गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। हाल ये है कि पुरानी सब्जी मंडी इलाके से तो निकलना तक मुश्किल हो जाता है। इसी तरह स्टेशन रोड, कचहरी मोड, लाल बाजार, पुराना डाकघर बाजार, जगन चौराहा, भामतीपुरा, जनाना अस्पताल के पास और पुराना शहर इलाके में यह निराश्रित गोवंश घूमते नजर आ जाएंगे। अब यह धीरे-धीरे हिसंक हो रहे हैं। अगर इन्हें हटाया है तो यह दौडकऱ हमला करते हैं। जिससे कई दफा लोग चोटिल हो चुके हैं। साथ ही आपसी झगड़े के दौरान यह वाहनों को क्षति पहुंचाते हैं। हालांकि, गत फरवरी माह तक नगर परिषद की ओर से करीब 40 से अधिक निराश्रित गोवंश को पकड़ कर बिजौली गोशाला छुड़वाया था लेकिन इसके बाद से कार्रवाई ठप सी हो गई।

जिले में एक ही गोशाला को अनुदान

जिले में वर्तमान में केवल एक ही गोशाला को अनुदान मिल रहा है। यह गोशाला बाड़ी रोड स्थित बिजौली पर है। इसमें वर्तमान में करीब 535 गोवंश हैं। हाल में इसमें कुछ हिस्सा बढ़ाया है। धौलपुर नगर परिषद क्षेत्र पकड़े जाने वाले गोवंश को इसी गोशाला में छोड़ा जाता है। इसके अलावा जिले में सैंपऊ और बरखंडी धाम भैंसना में भी गोशाला संचालित है लेकिन अभी इन्हें अनुदान नहीं है। यहां पर क्रमश: करीब 300 और 150 से 200 गोवंश है।

ग्राम पंचायत स्तर पर अब 4 और खुलेंगी

उधर, पशु पालन विभाग ने बताया कि जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर जल्द चार और गोशाला खुलेंगी। इसमें बसई घीयाराम के दो साल पहले टेंडर हुए थे। जिसमें छह ने आवेदन किया। जिसमें कस्बा नगर, बागथर, घीयाराम, बरखंडी भैंसेना व सैंपऊ शामिल थी। जिसमें चार गोशाला का कार्य हो चुका है। इन्होंने 10 फीसदी राशि गोशाला में नियमों के तहत लगाई है। एसडीएम स्तर की कमेटी ने जांच की है। अब इस पर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में बनी समिति को निर्णय लेना है। जिसके बाद इन्हें भी अनुदान मिलना शुरू हो जाएगा।

- जिले में अभी एक ही गोशाला को अनुदान मिल रहा है। लेकिन इस दफा 4 और को स्वीकृति मिली है। जिले में अब पांच गोशाला हो जाएंगी। यहां पर नगर निकाय और अन्य एजेंसी की ओर से निराश्रित पशुओं को छोड़ जा सकेगा। जिससे जिले में निराश्रित घूम रहे जानवर सडक़ों पर कम दिखेंगे।

- संत सिंह, संयुक्त निदेशक पशुपालन धौलपुर

- शहर में पिछले दिनों निराश्रित पशुओं को पकड़ा था। लेकिन अभी श्रमिक नहीं मिलने से कार्य रुका हुआ है। खेतीबाड़ी का कार्य होने से श्रमिक नहीं आ रहे हैं। जल्द शहर में निराश्रित पशुओं को पकड़ कर गोशाला छुड़वाया जाएगा।

- प्रकाश श्रीवास्तव, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, नगर परिषद