
धौलपुर. शहर से लेकर जिले भर में यूरिया की कालाबाजारी चरम पर है। सरकार द्वारा निर्धारित 267 रुपए प्रति 45 किलो बैग के दुकानदार 400 से 500 रुपए तक वसूल रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जब कोई दुकानों पर खाद लेने जाता है तो दुकानदार यूरिया देने से मना ही कर देते हैं, जिससे हताश और निराश किसान मजबूरन दोगुने दामों पर खरीदने को मजबूर हैं। यह सब जिम्मेदार विभाग और प्रशासन के नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन किसानों की भलाई का रट्टा पहाड़ा रटने वाला प्रशासन और सरकार सब देखकर भी आंखें बंद किए हैं।
राज्य या केन्द्र में किसी की भी सरकार हो वह किसानों के उत्थान और उन्नति के लिए तरह-तरह के दावे और वादे करती रहती हैं, मानो आने वाले दिनों में किसानों की सारी समस्याओं का हल सरकारें कर देंगी। लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी न होने से किसानों के हाल बेहाल हैं। इन दिनों खरीफ फसल के लिए किसान यूरिया को लेकर दर-दर की ठोकर खाता फिर रहा है, लेकिन फिर भी उसे यूरिया नहीं मिल रहा। कारण…डीलर और दुकानदारों का लालच। जो खाद को अपने गोदामों में स्टॉक कर बाजार में कृत्रिम खाद की कमी का आवरण बना दलालों के माध्यम से खाद की कालाबाजारी करते हैं। ऐसा नहीं है कि खाद की कमी हो। कृषि विभाग के अनुसार अभी तक जिले में १५ हजार मैट्रिक टन यूरिया आ चुका है, लेकिन खाद का गोरखधंधा करने वाले डीलर और दुकानदार आपसी मिली भगत कर किसानों का दोहन कर रहे हैं और कृषि विभाग की छवि को धूमिल करने में जुटे हैं। देखा जाए तो इन दिनों खेतों में खरीफ फसल खड़ी है जिसकी सिंचाई के समय खाद न मिलने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
400 से 500 में यूरिया का बैग
खाद की कालाबाजारी शहर नहीं अपितु जिले भर में धड़ल्ले से हो रही है। किसान समय पर खेतों में खाद डालने के लिए महंगे दाम चुकाने को विवश हैं, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई अब तक धरातल पर नहीं दिख रही है। सरकारी दर के अनुसार यूरिया की एक बोरी 26७ रुपए में उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन किसानों से यही बोरी 400 से 500 रुपए तक में बेची जा रही है। इसी तरह 1350 से 1650 रुपए के बीच निर्धारित मूल्य वाली डीएपी 2200 से 2400 रुपए तक में बेची जा रही है।
8 हजार मैट्रिक टन यूरिया का स्टॉक
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में खाद की कोई कमी नहीं हैं। जिले में इस सीजन लगभग 90 हजार हेक्टेयर से ज्यादा खरीफ फसल की खड़ी हुई है। जिसके लिए खाद की भी आपूर्ति लगातार की जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में अभी तक 15 हजार मैट्रिक टन यूरिया आ चुका है। जिसमें से लगभग 8 हजार मैट्रिक टन यूरिया का स्टॉक भी है। फिर भी जिले में खाद की किल्लत बनी हुई है। जिसकी सबसे बड़ी बात डीलरों से लेकर दुकानदार हैं। जो मोटी कमाई के चक्कर में अन्नदाताओं की जेबों को तराशने में लगे हैं। सरकार ने यूरिया 267, डीएपी 1350 और एनपीए के 2250 रुपए दाम तय कर रखे हैं, लेकिन यह तय दामों से भी अधिक में किसानों को दिए जा रहे हैं।
डीलर से लेकर विक्रेताओं की भूमिका पर प्रश्नचिह्न
शहर में आए दिन यूरिया की रैक देखी जाती हैं, जिन्हें ट्रैक्टरों के माध्यम से गादामों में रखवाया जाता है। तो फिर यह खाद जा कहां रहा है। देखा जाए तो इस खाद की कालाबाजारी में डीलर की भूमिका भी संदिग्ध है। नाम नहीं छापने पर खाद विक्रेता ने बताया कि वह डीलर से यूरिया तय दामों से ज्यादा दामों में खरीद रहे हैं। इसके अलावा नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, कैल्शियम समेत अन्य उत्पाद खरीदने की शर्त पर ही खाद उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में खुदरा विके्रताओं के लिए निर्धारित सरकारी दर पर खाद बेचना संभव नहीं रह जाता। इस स्थिति में कृषि विभाग और प्रशासन को डीलर सहित खाद की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
किसानों ने की जांच की मांग
दुकानों पर खाद लेने आए किसानों ने बताया कि खाद की समस्या हर साल आती है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता। किसानों ने कहा कि जो भी विके्रता निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया बेच रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जिले की डीलर से लेकर खाद विक्रेताओं सभी की जांच की जानी चाहिए। साथ ही किसानों ने पर्याप्त मात्रा में सरकारी दर पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि खेती का काम प्रभावित न हो और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
स्टॉक एवं मूल्य सूची पर नहीं लिखते भाव
शासना आदेश के तहत खाद का क्रय-विक्रय करने वाले दुकानदारों के लिए खाद का स्टॉक और उनके मूल्यों की सूची पट्टिका के माध्यम से दर्शानी होती है, लेकिन शहर में जितनी भी खाद की दुकानें हैं उनकी सूची पट्टिका में न तो दुकान में खाद का कितना स्टॉक है और किस खाद की कीमत कितनी है। यह अंकित ही नहीं होता। जिससे किसानों को खाद की कीमत का कोई अंदेशा नहीं होता और यह दुकानदार मनचाही कीमत वसूल करते हैं खाद की कमी को भी दर्शाते हैं।
यूरिया की समस्या हर बार आती है, दुकानों पर यूरिया लेने के लिए जाते हैं तो वह मना कर देते हैं। खाद की जमकर कालाबाजारी की जा रही है, चाहे हम जैसे किसान परेशान क्यों न होते फिरें।
परमजीत सिंह, किसान
जिले भर में यूरिया नहीं मिल रहा। डीलर से लेकर दुकानदार मनमर्जी कर रहे हैं। यूरिया नहीं मिलने की स्थिति में ज्यादा रुपए देकर खरीदना पड़ रहा है, प्रशासन को इस ओर देखना चाहिए।
महेश शर्मा, किसान
शहर सहित जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। अभी तक १५ हजार मैट्रिक टन के लगभग यूरिया आ चुका है। प्रति किसान को दो बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा है तो जल्द ही दुकानों का निरीक्षण करा किसानों को यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।
-डीपी शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग