
Dholpur, राजाखेड़ा. राजाखेड़ा से आगरा को जोडऩे वाला प्रमुख मार्ग पर हो रहे जानलेवा गड्ढे दर्जनों बड़े हादसों के बाद भी भरे नहीं जा सके। ऐसे में सार्वजनिक निर्माण विभाग की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वहीं स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है।
आगरा मार्ग क्षेत्र को उत्तरप्रदेश से जोडऩे का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसपर 24 घंटे भारी ट्रैफिक रहता है। खास तौर से मध्यप्रदेश से सिंध का रेता, के्रशर डस्ट, और गिट्टियों से भरे ओवरलोड ट्रोले तो दिन रात यहां से गुजरते हैं साथ ही आगरा बड़ा व्यापारिक केंद्र होने के कारण क्षेत्र का अधिकांश व्यापार भी इसी मार्ग से होता है। ऐसे में यहां वाहनों का आवागमन बहुत ज्यादा है। जिस कारण सिंघावली गांव पर 3 फीट गहरा गड्ढा और बिजलीघर के पास गहरे गड्ढों के साथ सभी ओर टूटी सडक़ विभाग की लापरवाही की कहानी स्वयं बयां कर रही है।
इसी मार्ग से आते जिम्मेदार अधिकारी
सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं कई अन्य विभागों के अधिकारी आगरा निवास करते हैं और प्रतिदिन इस मार्ग से अपने कार्यालयों को आते जाते हैं। ऐसे में जब उन्हें अपनी बड़ी गाडिय़ों में कोई समस्या नहीं आती तो वे आम आदमी की पीड़ा को क्यों और कैसे समझ पाएंगे। इसी मार्ग से अधिकांश बीमारों, दुर्घटनाग्रस्त लोगों को आगरा और जयपुर लेकर जाया जाता है जो पूरे रास्ते उछलते हुए और ज्यादा बीमार या घायल हो जाते हैं, लेकिन उनका दर्द किसी को दिखाई नहीं देता।
एक वर्ष में दर्जनों हादसे
सिंघावली गांव के इसी गड्ढे में पिछले वर्ष आधा दर्जन कार दुर्घटनाएं हो चुकी हंै, जिनमे एक दर्जन लोग गंभीर घायल हुए थे। इस वर्ष भी पिछले माह कई बार भारी भरकम डम्फर दो बार अनियंत्रित होकर भिड़ चुके हैं और दोनों ही बार बड़ी जनहानि बाल-बाल बची है। बाइक और तिपहिया ऑटो तो इन गड्ढों में दिन प्रतिदिन गिर रहे हैं और लोग चोटिल हो रहे हैं।
गड्ढों में गिरकर रोज लोग घायल हो रहे हैं। हम चीखने की आवाज सुनकर लोगों को उठाते हैं। अब तो कुछ लोग घरों के बाहर भी सोने लगे हैं, जिससे बार-बार गिरते चोटिल लोगों की मदद की जा सके।
मलखान सिंह, स्थानीय निवासी
सरकार संवेदनहीन है। विकास के दावे और वादे बस पोस्टरों में हैं। जमीनी हालात दुष्कर हंै।
- सतीश, स्थानीय ग्रामीण
आगरा की सीमा में बनी सडक़ 12 साल में नहीं टूटी और हमारी सीमा में बनी सडक़ 12 साल में दो बार बनकर भी गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
- उपेंद्र, नागरिक
दिन भर के बाद जब सुरक्षित लौटकर घर पहुंच जाते हैं, तो भगवान को प्रणाम करते हैं, कि प्रभु आज भी बच गए इन जानलेवा सडक़ों से।
- प्रशंसा, अध्यापिका