
जल भराव के बीच वोट मांगते एक प्रत्याशी के समर्थक
धौलपुर. चुनावी समर में शहर का हाल बेहाल है। मानसूनी बारिश और अव्यवस्थित जल निकासी के कारण दो दर्जन से ज्यादा कॉलोनियां जलमग्न हंै। नतीजा 80 हजार स्थानीय लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, लेकिन सबसे रोचक तस्वीरें चुनावी माहौल के दौरान इन इलाकों में देखने को मिल रही हैं, जहां वोट की चाह रखने वाले नेताजी गंदे पानी के भराव को पार कर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनके यह प्रयास लोगों के रोष के आगे नाकाफी दिखाई दे रहे हैं।
मानसूनी सीजन के दौरान शहर का एक हिस्सा तालाब बना हुआ है। पिछले कुछ सालों से उभरकर आई यह समस्या अब विकराल होती जा रही है। जिसका मुख्य कारण चौक नाले और सीवर के साथ शहर की दम तोड़ती जलनिकासी है जिसे नगर परिषद सहित जिला प्रशासन सालों बाद भी दुरुस्त नहीं कर सके हैं। जिसका खामियाजा शहर की लगभग तीन दर्जन से ज्यादा कॉलोनियों के 80 हजार लोग भुगत रहे हैं हालात यह हैं कि जलभराव के पिछले तीन सालों में लगभग एक दर्जन पक्के मकान धराशायी तक हो चुके है और न जाने कितने परिवार उक्त स्थानों से पलायन करने को मजबूर हो चुके हैं। शहर में भारी जलभराव का मामला राज्य सरकार से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंच चुका है, लेकिन आश्वासन के अलावा के धौलपुर शहर को कुछ मिलता दिखाई नहीं दे रहा।
पार्षद उम्मीदवारों पर फूट रहा गुस्सा
भारी जलभराव और चहुंओर फैली अव्यवस्था का असर नगर परिषद चुनावों में भी देखने को मिल रहा है। जहां जलभराव की समस्या ज्यादा है वहां पार्षद उम्मीदवारों को लोगों का भरोसा जीतने अच्छी-खासी मशक्कत करनी पड़ रही है, जो जलभराव से होकर मतदाताओं तक पहुंच मान-मनोव्वल कर बेहतर कार्य करने का वादा कर रह हैं। लेकिन गत सालों जलभराव से पीडि़त लोग उम्मीदवारों को आइना दिखा समस्याओं से रूबरू करा रहे हैं। तो वहीं कई जगह जलभराव और अन्य समस्याओं से त्रस्त लोगों ने चुनाव तक का बहिष्कार कर दिया है। लोगों का कहना है कि यह समस्या अभी से नहीं सालों से लेकिन इसे दूर करने के लिए किसी ने कोई कदम नहीं उठाए।
260 करोड़ का प्रस्ताव अभी भी अधर में
गत दो वर्षों से हालात बहुत भी बदहाल होते जा रहे हैं। नगर परिषद ने गत वर्ष शहर की जलनिकासी को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार को 260 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन वह अभी तक स्वीकृत नहीं हो सका है। पिछले दो वित्तीय वर्षों में बजट प्रावधान न होने से न तो बंद सीवर लाइनें खुल पाईं हैं और ना ही नालों की सफाई ठीक से की गई है, जबकि इनके टेण्डरों पर लाखों रुपए पानी की तरह बहाया जा रहा है। बदले में शहर के लोगों को सिर्फ और सिर्फ जलभराव, गंदगी और अन्य समस्याएं मिल रही हैं। तो वहीं साफ सफाई को लेकर भी परिषद की हालत पतली है। ना ही परिषद के पास संसाधन हैं और ना ही कर्मचारी जिस कारण जगह-जगह गंदगी के ढेर परिषद की कार्यप्रणाली को बयां करते नजर आते हैं।
फंस रहे वाहन, स्कूल बच्चे परेशान
एक ओर जहां जलभराव लोगों को दर्द दे रहा है तो सडक़ों पर खुले नाले दर्द को और बढ़ाने का काम कर रहे हैं। दरअसल आनंद नगर, जगदम्बा कॉलोनी, आनंद नगर के पीछे, पोखरा, गौशाला, मानसरोवर सहित कई कॉलोनियों की सडक़ों पर पानी बदस्तूर भरा है, जबकि दोनों ओर के जगह-जगह खुले नाले बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। क्योंकि जलभराव के बीच आवागमन करने वाले राहगीरों सहित वाहन चालकों को इन नालों का ठीक से जानकारी नहीं होने के कारण कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि सोमवार सुबह गौशाला क्षेत्र में हादसा होते-होते तब बचा जब जलभराव से निकलती स्कूल वैन सडक़ पर हो रहे गड्ढे में टेड़ी होकर फंस गई। गनीमत रही कि वैन पलटी नहीं। वैन फंसने के बाद स्थानीय लोगों ने बच्चों को निकाला और वैन को सीधा किया।
शहर की इन कॉलोनियों में हालत खराब
बारिश का दौर बंद हुए दो दिन हो चुके हैं, लेकिन शहर के निचले इलाकों की कई कॉलोनियां सहित सडक़ें पानी में डूबी हुई हैं। इन कॉलोनियों में चित्रांश विहार, न्यू आर्दश नगर, विनोद विहार, कृष्णा कालोनी, अयोध्याकुंज, रामकुंज, आनंद नगर, जगदम्बा कालोनी, दारासिंह नगर, शिव नगर पोखरा, मानसरोवर कालोनी, नारायण कालोनी, सीताराम कालोनी, गौशाला, उर्मिला विहार, हुण्डावाल नगर, लोंंगश्री कालोनी,अंबेडकर नगर, मास्टर मुरारीलाल कॉलोनी, राजा बिहार, भोगीराम नगर सहित अन्य लगभग तीन दर्जन कॉलोनियां शामिल हैं।
Updated on:
08 Sept 2026 07:03 pm
Published on:
08 Sept 2026 07:03 pm
