धौलपुर

Dholpur: कटते पेड़ों से बढ़ रही तपिश, पर्यावरण भी प्रभावित

धौलपुर. मई की भीषण गर्मी ने इस बार लोगों को समय से पहले ही बेहाल कर दिया है। सुबह निकलते ही तेज धूप चेहरे झुलसाने लगती हैए जबकि दोपहर में गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर रहे हैं। जिले में तापमान लगातार 43-44 डिग्री के बीच बना हुआ है।

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धौलपुर. मई की भीषण गर्मी ने इस बार लोगों को समय से पहले ही बेहाल कर दिया है। सुबह निकलते ही तेज धूप चेहरे झुलसाने लगती हैए जबकि दोपहर में गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर रहे हैं। जिले में तापमान लगातार 43-44 डिग्री के बीच बना हुआ है।

अब ग्रामीण क्षेत्र में हरियाली लगातार कम हो रही है। पहले जहां खेतों में पेड़ दिखते थे लेकिन अब वहां पर भी पेड़ कम हो रहे हैं। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग आगरा-मुंबई बनने से पहले धौलपुर से बरैठा तक दोनों तरफ घने पेड़ थे लेकिन हाइवे निर्माण के दौरान सैकड़ों पेड़ विकास की बलि चढ़ गए। इन पेड़ों के बदले जो लगाए गए वह कमी को आज तक पूरी नहीं कर पाए हैं। अब मनियां से धौलपुर जाते समय हाइवे पर कहीं खास हरियाली नजर नहीं आती है। हाल ये है कि कोई सडक़ किनारे खड़ा होकर सुस्ताने तक की जगह नहीं है। ऐसे हालात में एक बार फिर पर्यावरण और हरियाली का मुद्दा चर्चा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार घटती हरियाली और पेड़ों की कटाई के कारण मौसम का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है।

खेत और ग्रामीण रास्तों से कम हो रही हरियाली

मनियां, बसई नवाब समेत आसपास के इलाके में पहले खूब हरियाली होती थी लेकिन अब समय के साथ यह कम हो रही है। पहले ग्रामीण क्षेत्र में अच्छे संख्या में पेड़ होते थे लेकिन अब यहां भी कम हो रहे हैं। कई स्थानों पर तो खेतों में प्लाटिंग तक हो चुकी है। साथ ही कई जगह इण्डस्ट्रीज के चलते बड़े इलाके से हरियाली नदारद है। कुछ साल पहले तक शहर और गांवों में सडक़ किनारे बड़े-बड़े पेड़ लोगों को राहत देते थे। राहगीर पेड़ों की छांव में कुछ पल सुकून महसूस कर लेते थे, लेकिन अब कई स्थानों पर पेड़ों की जगह खाली मैदान और कंक्रीट ने ले ली है। नतीजा यह है कि गर्मी हर साल नए रेकॉर्ड बना रही है।

थैलियों में ही दम तोड़ रहे पौधे

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से पर्यावरण नहीं बचाया जा सकता। इसके लिए आमजन की भागीदारी भी जरूरी है। घर, खेत, सडक़ और सार्वजनिक स्थानों पर अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे और पुराने पेड़ों को बचाने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। राज्य सरकार हर साल जुलाई से पौधरोपण अभियान शुरू करती है और लाखों की संख्या में पौधे वितरित होते हैं लेकिन इसमें से कम ही जिंदा रह पाते हैं। कई स्थानों पर तो पौध थैलियों में ही पड़े पड़े दम तोड़ देते हैं। जिम्मेदार केवल रेकॉर्ड में पौधे ले आते हैं लेकिन उनमें से कुछ लगाकर ही इतिश्री कर दी जाती है।

- वन क्षेत्र में अवैध कटाई होने पर विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। वहीं राजस्व क्षेत्र में पेड़ कटाई के मामलों में तहसीलदार के अधीन है। यदि कहीं अवैध कटाई की सूचना मिलती है तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

- वी.चेतन कुमार, डीएफओ धौलपुर

Published on:
17 May 2026 06:38 pm
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