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Dholpur: 103 दिनों में 1 हजार 760 लोगों को लावारिस श्वानों ने बनाया शिकार

धौलपुर. राज्य से लेकर जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जमकर अवहेलना की जा रही है। सर्वोच्च अदालत के दो बार सुनवाई और हर बार आदेशों के बाद भी शासन प्रशासन लावारिस श्वानों को लेकर सख्त नहीं दिख रहा। यही कारण कि आए दिन यह श्वान बच्चे और बुजुर्गों को अपना शिकार बना रहे हैं।

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Dholpur news

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धौलपुर. राज्य से लेकर जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जमकर अवहेलना की जा रही है। सर्वोच्च अदालत के दो बार सुनवाई और हर बार आदेशों के बाद भी शासन प्रशासन लावारिस श्वानों को लेकर सख्त नहीं दिख रहा। यही कारण कि आए दिन यह श्वान बच्चे और बुजुर्गों को अपना शिकार बना रहे हैं। इन श्वानों का सार्वजनिक स्थलों से लेकर शिक्षा के मंदिरों तक में जमावड़ा बना हुआ है।

सार्वजनिक स्थलों पर लावारिस श्वानों का जमावड़ा और बच्चों को अपना शिकार बनान एक गंभीर समस्या बनकर सामने आई है। जिसको लेकर गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप करते हुए राजस्थान सहित देश के सभी राज्यों के निकायों को उनके लिए अलग से सेल्टर होम के साथ नसबंदी और खाने पीने की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन आदेशों के एक साल बाद भी सरकारों पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा। राजस्थान में आए दिन किसी न किसी जिले से श्वानों के बच्चों पर हमलों की खबर आ रही हैं। जिनमें बच्चे अपनी जान तक गंवा रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी सरकार निंद्रा में है। सुप्रीम कोर्ट ने अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से श्वानों को हटाकर शेल्टर होम्स में भेजने और नसबंदी के लिए पाबंद किया था। शहर से लेकर जिले भर में कई मामले ऐसे सामने आ चुके हैं जिनमें इन आवारा श्वानों के हमले बच्चे बुरी तरह घायल हुए हैं, तो कई अपनी जान तक गंवा चुके हैं।

जिले भर में बढ़ता श्वानों का आंकड़ा

धौलपुर उपखण्ड में भी लावारिस श्वानों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन माह और 14 दिनों यानी फरवरी से लेकर 14 मई तक 1 हजार 760 लोगों को लावारिस श्वान अपना शिकार बना चुके हैं। फरवरी माह में सबसे ज्यादा 677 लोगों को इन आवारा श्वानों ने अपना शिकार बनाया था। जिनमें से 488 पुरुष थे तो 189 महिलाएं। मार्च में आवारा श्वानों का 507 लोग शिकार बने। अपे्रल माह की बात करें तो इन लावारिस श्वानों ने 456 लोगों पर हमला बोल उन्हें घायल किया था। तो वहीं मई माह के इन 14 दिनों में ही यह श्वान 120 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। देखा जाए तो यह वह आंकड़ा है जो जिला अस्पताल में श्वानों का शिकार बनने के बाद इलाज कराने और वेक्सीन लगवाने पहुंचे। इसके अलावा न जानेंं कितने लोग ऐसे भी होंगे निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे होंगे।

तीन माह में बंदरों ने 53 लोगों को बनाया शिकार

आवारा श्वानों के अलावा शहर में बंदरों का भी आतंक मचा हुआ है। जो गली मोहल्लों से लेकर घर के अंदर तक उत्पाद मचा रखे हैं। जिन्हेें पकडऩे परिषद अभियान तो चलाती है, लेकिन वह सिर्फ दिखाना ही साबित होता है। पिछले तीन माह और 14 दिनों में यह बंदर 53 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। फरवरी माह में 26, मार्च में 9, अपे्रल में 8 और मई के 14 दिनों में ही 10 लोगों को यह बंदर घायल कर चुके हैं। बंदरों के आतंक से लोगों का हाल बेहाल है। शहर सहित राजाखेड़ा, बाड़ी में कई लोग अपनी जान तक इन बंदरों के कारण गंवा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी भूल अपनी नौकरियां पका रहे हैं। इसके अलावा इन तीन माहों में 15 मामले बिल्ली के काटने के भी सामने आए हैं।

अस्पतालों से लेकर स्कूलों में श्वानों का जमावड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सार्वजनिक स्थलों से लावारिस श्वानों को हटाने के आदेश के बाद भी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। रेलवे स्टेशन से लेकर, स्कूलों, जनाना अस्पताल और जिला अस्पताल परिसर में श्वानों का जमावड़ा लगा रहता है। यह श्वान कई बार लोगों पर हमला तक कर चुके हैं। गत माह ही जनाना अस्पताल परिषर में एक महिला को श्वान ने काट लिया था, लेकिन उसके बाद भी नगर परिषद और जिम्मेदार इन लावारिस श्वानों पकड़-धकड़ तक नहीं करते, शेल्टर होम बनाना तो दूर की बात। हां...माल कमाने के नाम पर परिषद के जिम्मेदार कागजों में जरूर श्वानों के पकड़े का अभियान दर्शा देते हैं और इस आड़ में लाखों के बारे-न्यारे भी कर लिए जाते हैं

सुप्रीम कोर्ट के आदेश

- सार्वजनिक स्थानों से हटाना

- नसबंदी और टीकाकरण करना

- पुनर्वास केन्द्र बनाना

- भोजन स्थल की अलग व्यवस्था

- श्वान पालने वालों की जिम्मेदारी

- लाइसेंस और मुआवजा