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Dholpur: अब आई कार्रवाई की याद, दो दिन में अतिक्रमण हटाने के आदेश

dholpur, राजाखेड़ा तहसील परिसर में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध कब्जों और आमजन से की जा रही वसूली के मामले में आखिरकार प्रशासन की निन्द्रा भंग हुई है और वह हरकत में आता दिख रहा है। तहसीलदार दीप्ति देव जारी आदेश में बिना अनुमति एवं बिना लाइसेंस परिसर में फड़ जमकर बैठे अनाधिकृत व्यक्तियों को दो दिवस के भीतर अपनी बैठक व्यवस्था हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है।

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Dholpur news

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dholpur, राजाखेड़ा तहसील परिसर में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध कब्जों और आमजन से की जा रही वसूली के मामले में आखिरकार प्रशासन की निन्द्रा भंग हुई है और वह हरकत में आता दिख रहा है। तहसीलदार दीप्ति देव जारी आदेश में बिना अनुमति एवं बिना लाइसेंस परिसर में फड़ जमकर बैठे अनाधिकृत व्यक्तियों को दो दिवस के भीतर अपनी बैठक व्यवस्था हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है।

जारी आदेश में तहसीलदार ने खुद माना है कि तहसील परिसर में कुछ व्यक्तियों ने अतिक्रमण कर स्थायी रूप से बैठने की भी व्यवस्था बना रखी थी। ये लोग मूल निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड संशोधन, नाम परिवर्तन सहित विभिन्न सरकारी कार्यों के नाम पर आम नागरिकों से मोटा धन वसूल रहे थे। बड़ी संख्या में आमजन से अवैध राशि लेने की शिकायतें लगातार तहसील कार्यालय को प्राप्त हो रही थीं।

अधिकारियों के नाम पर वसूली से धूमिल हुई छवि

सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि बड़ी संख्या में अनाधिकृत व्यक्ति सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम का उपयोग कर लोगों से पैसे वसूल रहे थे। इससे न केवल जनता आर्थिक शोषण का शिकार हो रही थी बल्कि सरकार और प्रशासन की साख भी प्रभावित हो रही थी। सूचना में यह भी कहा गया है कि कुछ टाइप सेंटर संचालकों, डीड राइटरों तथा अधिवक्ताओं ने भी अपने बोर्ड लगाकर खुद की जगह पर अनधिकृत व्यक्तियों को बैठाया गया था, जिनके माध्यम से वसूली का नेटवर्क संचालित होने की शिकायतें सामने आईं।

दो दिन का अल्टीमेटम, पुलिस को भी सूचना

तहसीलदार ने आदेश जारी करते हुए सभी अनाधिकृत व्यक्तियों को दो दिनों के भीतर तहसील परिसर से अपनी बैठक व्यवस्था हटाने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद इनके विरुद्ध पुलिस की मदद से कानूनी कार्रवाई और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

बड़ा सवाल है कि आखिर अब क्यों?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील परिसर में दलालों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं थी। लंबे समय से आम लोग सरकारी कार्य करवाने के लिए अतिरिक्त राशि देने को मजबूर थे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन को अब जाकर शिकायतों की गंभीरता का अहसास हुआ या फिर किसी उच्चस्तरीय दबाव के बाद कार्रवाई की गई। हालांकि यदि प्रशासन इस कार्रवाई को स्थायी रूप से लागू कर पाता है तो भी आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकारी सेवाओं तक सीधे पहुंच बढ़ेगी और बिचौलिया व्यवस्था पर रोक लगने की उम्मीद है, हालांकि लोगों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सख्त कार्रवाई, नियमित निगरानी और सख्त अमल ही वास्तविक बदलाव ला सकता है।