नगर पालिका बसेड़ी में स्टॉफ की कमी अब विकास कार्यों में बाधा बन रही है। पालिका के सरकारी खजाने में करोड़ों की राशि होने के बावजूद भी विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया भी नहीं हो पा रहीं। हालात इतने बदतर हैं कि पालिका में एक लिपिक तक नहीं है। अन्य विभागों के अधिकारी कर्मचारी पर चार्ज के चलते क्षेत्र का विकास कार्य गर्त में जा रहा है। इसकी वजह से जनकल्याणकारी योजनाएं केंद्र राज्य की दम तोड़ते हुए नजर आ रही है। छोटे-छोटे कामों के लिए आम जन की कोई सुनने वाला नहीं है।
कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी से जूझ रही बसेड़ी नपा
पालिका के खाते में छह करोड़ का फंड जमा
चंद्र प्रकाश कौशिक
dholpur. नगर पालिका बसेड़ी में स्टॉफ की कमी अब विकास कार्यों में बाधा बन रही है। पालिका के सरकारी खजाने में करोड़ों की राशि होने के बावजूद भी विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया भी नहीं हो पा रहीं। हालात इतने बदतर हैं कि पालिका में एक लिपिक तक नहीं है। अन्य विभागों के अधिकारी कर्मचारी पर चार्ज के चलते क्षेत्र का विकास कार्य गर्त में जा रहा है। इसकी वजह से जनकल्याणकारी योजनाएं केंद्र राज्य की दम तोड़ते हुए नजर आ रही है। छोटे-छोटे कामों के लिए आम जन की कोई सुनने वाला नहीं है।
बसेड़ी ग्राम पंचायत से नगर पालिका बनने के बाद लगभग 5 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक एक बार ही विभागीय अधिशासी अधिकारी उपलब्ध नहीं हो सका है,वह भी कुछ समय तक ही रहा। इसके अलावा करीब दर्जन व से अधिशासी अधिकारी तथा कनिष्ठ लिपिक भरतपुर के नगर परिषद सहायक अभियंता तथा कनिष्ठ अभियंता पर पदवार रहा या फिर बसेड़ी तहसीलदार तथा पंचायत समिति के सहायक अभियंता पर नगर पालिका का अतिरिक्त चार्ज देकर नगर पालिका चलती रही। जिसकी वजह से न तो विकास हो सका नहीं जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित हो पाईं।
पालिका के खाते में छह करोड़ का बजट
जिला कलक्टर हमेशा बसेड़ी नगर पालिका की समस्याओं को लेकर काफी संवेदनशील रहे, फिर भी अन्य विभागों के अधिकारी कर्मचारियों के चार्ज होने की वजह से जो काम होना चाहिए था वह नहीं हो सका। आज हालात यह है कि 6 करोड़ का बजट नगर पालिका के खाते में पड़ा है। जिसका विकास कार्यों में कोई उपयोग नहीं हो पा रहा।
लिपिक लगाने कलक्टर को लिखा पत्र
अतिरिक्त नगर पालिका अधिशासी अधिकारी श्याम बिहारी की ओर से जिला कलक्टर को एक कनिष्ठ लिपिक लगाने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने नगर पालिका में आने वाली समस्याओं का भी जिक्र किया है। लोगों से बात करने पर बताया कि एक और जहां सरकार चुनाव कराने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर सरकार के पास स्थाई अधिकारी, कर्मचारी नगर पालिका के लिए मौजूद नहीं हैं ऐसे में जनकल्याणकारी योजनाएं आमजन की समस्याओं का किस तरह निस्तारण हो सकेगा।
तत्कालीन अध्यक्ष ने छोड़े थे सात करोड़यह समस्या पिछले कांग्रेस की सरकार से ही चली जा रही है। सरकार बदली तब लोगों ने सोचा कि भाजपा सरकार में स्थिति सुधारेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्थिति और बद से बदतरस हो गई। आलम यह कि आज कोई भी कर्मचारी स्वायत शासन विभाग का नहीं है। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। तत्कालीन अध्यक्ष चंद्रकला कुशवाहा से बात करने पर उन्होंने बताया कि हालात स्टाफ की कमी की समस्या तथाराजनीतिक दबाव बने रहना एवं सरकारी धन सही जगह पर लगे इसी के चलते 7 करोड़ का बजट छोडक़र आई थी।
नगर पालिका में स्टॉफ की लगातार कमी है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। कलक्टर को पत्र लिखकर लिपिक लगाने की मांग की गई है।
श्याम बिहारी, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी