
धौलपुर. नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनावों को लेकर सोमवार को आरक्षण की स्थिति साफ हो गई। निर्वाचन अधिकारी की अगुवाई में सभी वार्डों की लॉटरी निकाली गई। लॉटरी में अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग की महिला सीटों के लिए वार्ड निर्धारित किए गए। जिसमें 38 वार्ड सामान्य के लिए , 12 वार्ड ओबीसी और 10 वार्ड एससी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए।नगर परिषद चुनाव की सरगर्मियों के बीच चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाना प्रारंभ हो गया है।
इस कड़ी में सोमवार को शहर के 60 वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया लॉटरी के माध्यम से पूरी की गई। जिसमें सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग के लिए वार्ड आरक्षित किए गए। इनमें सबसे ज्यादा 25 वार्ड सामान्य अनारक्षित वर्ग के लिए रखे गए तो 13 वार्ड सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षण किए गए। ओबीसी ओपन के लिए 8 तो ओबीसी महिला वर्ग के लिए 4 वार्ड लॉटरी के माध्यम से आरक्षित हुए। एससी ओपन के लिए 7 तो एससी महिला वर्ग के लिए 3 वार्डों का आरक्षण किया गया। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शहर की सरकार को लेकर सारे कयास खत्म हो चुके हैं। राजनीतिक दल भी वार्डवार सामाजिक समीकरणों और आरक्षण की स्थिति के आधार पर प्रत्याशियों का चयन करेंगे। गत दिनों सभापति पद के अनारक्षित होने से पार्षद चुनाव के साथ-साथ सभापति पद की दावेदारी को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है है।
गोटियां बैठाने में लगे संभावित प्रत्याशी
लॉटरी के बाद अब नगर परिषद के सभी 60 वार्डों की आरक्षण स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब संभावित उम्मीदवार वार्डों की स्थिति देखते हुए अपना समीकरण बैठाने के कार्य में जुट गए हैं। साथ ही संभावित दावेदारों के साथ अब राजनीतिक दलों की भी सक्रियता बढऩे की उम्मीद है। संबंधित वार्डों में चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे लोगों ने भी अपने समीकरणों को नए सिरे से देखना शुरू कर दिया है और अब केवल चुनावों की तारीख का संभावित प्रत्याशी इंतजार कर रहे हैं।
आरक्षण की स्थिति के आधार पर होंगे प्रत्याशी
नगर परिषद चुनाव को लेकर लॉटरी प्रक्रिया का आयोजन परिषद के ऑडिटोरियम सभागार में आयोजित किया गया। जिसमें जिला निर्वाचन अधिकारी जिला कलक्टर सहित एडीएम ने प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस दौरान संभावित प्रत्याशियों सहित पूर्व वार्ड पार्षद भी प्रक्रिया को देखने पहुंचे। जहां प्रक्रिया के दौरान वर्ग के समीकरणों के बदलने से कुछ लोगों में जहां निराशा देखी गई तो कुछ लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। दरअसल चुनावों को लेकर संभावित प्रत्याशी अपने गोटियां बैठाने की जुगाड़ में थे, लेकिन वर्गों के आरक्षण से बिगड़े समीकरणों ने उनकी ख्वाहिशों पर पानी फेर दिया। तो वहीं यह प्रक्रिया जिनके खाते में गई वह संभावित प्रत्याशी अपने वार्डों में चुनावी समीकरणों को लेकर सक्रिय हो गए है।