-अग्निशमन विभाग को अपग्रेड तो दूर मौजूदा हालातों को नहीं सुधारा जा रहा धौलपुर.समय के साथ-साथ नगर परिषद की कार्यप्रणाली पंगू होती जा रही है। जिसे न नागरिकों की समस्याओं का ध्यान है और न लोगों की जान का भान। यही कारण है कि अग्निशमन विभाग अपग्रेड होने के बजाय डिमोलाइजेशन की ओर जा रहा […]
-अग्निशमन विभाग को अपग्रेड तो दूर मौजूदा हालातों को नहीं सुधारा जा रहा
धौलपुर.समय के साथ-साथ नगर परिषद की कार्यप्रणाली पंगू होती जा रही है। जिसे न नागरिकों की समस्याओं का ध्यान है और न लोगों की जान का भान। यही कारण है कि अग्निशमन विभाग अपग्रेड होने के बजाय डिमोलाइजेशन की ओर जा रहा है। विभाग के पास आग बुझाने के लिए तीन गाडिय़ां हैं, जिनमें से दो गाडिय़ा चार माह से खराब पड़ी हैं। जिन्हें परिषद ठीक कराने तक की जहमत नहीं उठा रहा।
गर्मियां आते ही जगह-जगह आगजनी की घटनाएं सामने आती हैं। जिस पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग को अमल में लाया गया, लेकिन अग्निशमन विभाग जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण नाम का ही रह गया है। दरअसल अग्निशमन विभाग सीमित संसाधनों में ही सिमटकर रह गया है, जिसे अपग्रेड करना तो दूर जो मौजूदा आवश्यकताएं हैं उन्हें भी पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। विभाग के पास आग बुझाने के लिए तीन गाडिय़ां हैं, जिनमें से एक गाड़ी छह हजार लीटर और दो गाडिय़ां 45-45 हजार लीटर की शामिल हैं, लेकिन पिछले चार माह से मुख्य दमकल वाहन (छह हजार लीटर) और एक 45 हजार लीटर की गाड़ी खराब हालत में विभाग के परिसर में खड़ी कंडम हो रही हैं, लेकिन परिषद के उच्च अधिकारी इन्हें दुरुस्त कराने में कतई ध्यान नहीं दे रहे। गाडिय़ों को दुरुस्त कराने के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिख सूचित भी किया जा चुका है, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान न देते हुए, चैन की बंसी बजा रहे हैं। मौजूदा समय में विभाग के पास केवल ४५ हजार लीटर की एक ही गाड़ी है, अब अगर ऐसी स्थिति में दो जगह आगजनी की घटनाएं होती हैं तो जान और माल का नुकसान को कैसा रोका जाएगा और उसका जम्मेदार कौन होगा?
पांच साल से नहीं मिली फायर बाइकें
देखा जाए तो 50 हजार की आबादी पर एक फायर ब्रिगेड गाड़ी का होना आवश्यक होता है, जबकि धौलपुर शहर की आबादी लगभग 3लाख है, ऐसी स्थिति में 6 दमकल गाडिय़ां अनिवार्य रूप से होना चाहिए, लेकिन यहां केवल एक ही छोटी दमकल गाड़ी से ही काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा विभाग पांच सालों से पांच फायर बाइकों की भी मांग करता आ रहा है, लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी एक फायर बाइक विभाग को नहीं मिल पाई है।
खाली फायर सिलेंडर बने खिलोने
गर्मियों के समय में आगजनी की घटनाएं बढऩा अमूमन बात है, लेकिन इसके अलावा भी आगजनी की छोटी-मोटी घटनाएं सामने आती हैं। जिसको लेकर विभाग के पास 35 फायर सिलेंडर हैं। जिनमें से कुछ एसपी ऑफिस तो कुछ आईटीआई कॉलेज में लगा रखे हैं और शेष 15 सिलेंडर विभाग के कार्यालय में मौजूद हैं, लेकिन सबसे चौकानी वाली बात यह है कि यह सारे सिलेंडर खाली हो चुके हैं जिनमें गैस नाम की कोई चीज ही नहीं है। विभाग ने इन्हें भी भरवाने के लिए अर्जी लगा चुका है, लेकिन सुनवाई यहां भी नहीं हो रही।
संसाधनों सहित आधुनिक उपकरण नदारद
अग्निशमन विभाग जहां खराब दमकल गाडिय़ों की परेशानी से जूझ रहा है, वहीं आधुनिक उपकरण और अन्य संसाधनों की भी समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। विभाग के पास तीन गाडिय़ां हैं इस हिसाब से एल्युमिनियम के तीन फायर सूट होने चाहिए, लेकिन विभाग दो ही सूट से काम चला रह है। तो वहीं प्रत्येक फायर मैन के लिए कॉटन से निर्मित सूट होना अनिवार्य है, लेकिन यहां कॉटन सूटों का भी भारी अभाव है। जिस कारण कर्मियों को आगजनी के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
स्टॉफ की कमी फिर भी कर्मी बनाए बाबू
संसाधनों का अभाव अग्निशमन विभाग को जहां जख्म दे रहा है तो वहीं स्टॉफ की कमी जख्म में नमक लगाने का काम कर रहा है। ऊपर से रही सही कसर नगर परिषद विभाग के कुछ अधिकारियों को अपने निजी कामों में लगाकर पूरा कर रहा है। अग्निशमन विभाग में 9 चालकों की जरूरत है, लेकिन कार्यरत केवल 7 हैं उसमें से एक ड्राइवर को परिषद में कैशियर बना रखा है तो वहीं 18 फायर मैन विभाग में कार्यरत हैं जिनमें से चार फायर मैन परिषद में बाबूगिरी कर रहे हैं, यानी विभाग के पास केवल 18 फायर मैन ही हैं, जबकि आवश्यकता 27 फायरमैनों की है।
गर्मी में बढ़ती आगजनी की घटनाओं को देखते हुए विभाग पूरी तरह तैयार है। हमारे यहां तीन दमकल गाडिय़ां हैं, जिनमें दो खराब हालत में है और केवल एक 45 हजार लीटर की गाड़ी सही हालत में है। खराब गाडिय़ों को दुरुस्त कराने के लिए अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
-वृषभान सिंह, प्रभारी अग्निशमन विभाग