धौलपुर

ओलावृष्टि, तेज हवा और बारिश से खेतों में बिछी गेहूं और सरसों की फसल

– 30 से 40 प्रतिशत नुकसान होने का अनुमान धौलपुर. वहीं हुआ जिसका डर था…आसमानी आफत से एक बार फिर किसान बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेज हवा, ओला और बारिश ने खेतों में खड़ी पकी रबी की फसल को नुकसान पहुंचाया है। बारिश से जहां खेतों में खड़ी फसल बिछ गई है तो खलियानों […]

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- 30 से 40 प्रतिशत नुकसान होने का अनुमान

धौलपुर. वहीं हुआ जिसका डर था...आसमानी आफत से एक बार फिर किसान बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेज हवा, ओला और बारिश ने खेतों में खड़ी पकी रबी की फसल को नुकसान पहुंचाया है। बारिश से जहां खेतों में खड़ी फसल बिछ गई है तो खलियानों में कटी रखी सरसों, गेहूं और मटर की फसल गीली हो गई। जिससे फसल के दानों पर विपरीत प्रभाव पडऩे की आशंका है।

गुरुवार शाम से प्रारंभ हुआ पश्चिमी विक्षोभ का असर शुक्रवार तक देखने को मिला, जिसने किसानों को फिर आफत में डाल दिया है। धौलपुर ब्लॉक के अलावा, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा, राजाखेड़ा में तेज बारिश से फसलों को 30 से 40 प्रतिशत नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। शुक्रवार अल सुबह से कडकड़़ाहट और तेज हवा के साथ प्रारंभ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी सरसों, गेहूं और चना की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है, हालांकि अधिकतर खेतों में सरसों फसल की कटाई लगभग हो चुकी है, लेकिन खलियानों में रखी फसल बारिश से गीली हो गई। ऐसी स्थिति में अगर मौसम साफ नहीं होता है तो फसल को ज्यादा नुकासन होने का अनुमान है। ग्रामीण क्षेत्रों से मिली सूचनाओं के अनुसार इस बेमौसम बारिश से कई किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। फसल की गुणवत्ता खराब होने पर बाजार में उचित दाम मिलने की संभावना भी कम हो जाती है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी।

तीन ब्लॉकों के इन गांवों में पड़े ओले

मौसम ने करवट गुरुवार शाम को ही ले थी। इस दौरान जिले भर में दस से पंद्रह मिनट तक तेज हवा के साथ बारिश का दौर चला। इसके अलावा जिले के कुछ ब्लॉकों में ओलावृष्टि भी देखने को मिली। जानकारी के अनुसार धौलपुर ब्लॉक के लोहारी, जाटोली सहित अन्य गांव और सरमथुरा ब्लॉक के घुड़ा बटीकरा और सोनी गांव तो मरैना और राजाखेड़ा ब्लॉक के कुछ गांवों में ओलावृष्टि भी देखने को मिली। हालांकि बताया जाता है ओला का आकार चना के ही बराबर था, जो कुछ देर बाद ही थम गए।

140 हेक्टेयर रकवा में गेहूं और सरसों

कृषि विभाग ने जिले भर में इस सीजन गेहूं का रकवा 60 हजार हेक्टेयर, सरसों का रकवा 80 हजार हेक्टेयर और चना का रकवा एक हजार हेक्टेयर रखा गया था। जिसमें से जिले भर में लगभग 70 प्रतिशत सरसों की कट चुकी है तो गेहूं की कटाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है। बारिश के कारण सबसे ज्यादा नुकसान लेट बुवाई वाले गेहूं की फसल पर पड़ेगा। तेज हवा, ओला और बारिश से फसल खेत में ही बिछ जाएगी। जिससे गेहूं का दाना विकसित न होते हुए छोटा और कमजोर रह जाएगा। जिसका बाजार मूल्य किसानों को उचित नहीं मिल पाएगा।

गीली फसल को सुखाएं किसान, न करें कटाई

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बेमौसम बारिश रबी फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि मौसम साफ होते ही फसल को जल्द से जल्द सुखाने की व्यवस्था करें, ताकि नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके। तो वहीं मौसम साफ होने तक किसान अभी फसल कटाई न करें। मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने एक बार फिर बदलती जलवायु परिस्थितियों और किसानों के लिए नई चुनौतियों की ओर संकेत किया है, जिनसे निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।

अधिकतम 8 तो न्यूनतम 5 डिग्री गिरा तापमान

दो दिन से हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने मौसम में फिर ठण्डक घोल दी और लोगों को सर्दी का अहसास करा दिया। दो दिन पहले जहां अधिकतम तापमान 35 डिग्री पहुंच चुका था वह शुक्रवार को 8 डिग्री गिरकर 27 डिग्री पर आ पहुंचा तो वहीं न्यूनतम तापमान में भी गुरुवार की अपेक्षा 5 डिग्री की गिरावट दर्ज करते हुए 14 डिग्री सेल्सियस पर आ पहुंचा। मौसम विभाग का कहना है कि दो दिन बारिश पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई। शनिवार से जहां मौसम साफ होगा तो वहीं अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी लगातार वृद्धि देखी जाएगी।

बारिश से फसल पर इतना ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। ओलावृष्टि और तेज हवा से जरूर कुछ क्षेत्रों में फसल गिर चुकी है। सरसों की फसल अधिकतर क्षेत्रों में कट चुकी है, अगर गीली हो गई है तो किसान फसलों को सुखा लें। किसान अपनी नुकसान की जानकारी किसान फसल बीमा पोर्टल पर दर्ज करा सकता है।

-पीडी शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग

Published on:
20 Mar 2026 07:53 pm
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