डाइट फिटनेस

हृदय रोग में सूखे मेवों से परहेज जरूरी

अनियमित दिनचर्या आैर असंतुलित आहार के कारण आजकल ज्यादातर लाेग दिल की बीमारी से पीड़ित पाए जाते हैं
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Feb 27, 2019
heart care
हृदय रोग में सूखे मेवों से परहेज जरूरी

अनियमित दिनचर्या आैर असंतुलित आहार के कारण आजकल ज्यादातर लाेग दिल की बीमारी से पीड़ित पाए जाते हैं। यदि हम इन दाेनाें चीजाें काे हैल्दी बना लें ताे हमें दिल के राेग से छुटकारा मिल सकता है। नेचूरल ताैर पर हम कोलेस्ट्रॉल का स्तर 130 मिलिग्राम/डीएल से कम और ट्रायग्लिसराइड्स का स्तर 100 मिलिग्राम/डीएल से नीचे बनाए रखते हैं तो हार्ट अटैक की आशंका नहीं रहती।आइए जाने दिल की बातें :-

जब हृदय रोग का पता हार्ट अटैक के बाद चले ताे क्या करना चाहिए ?
हार्ट अटैक की पहले से पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है जिससे हृदय की मांसपेशियों को बचाया जा सके। अधिकतर मामलों में रोगी को छाती में तेज दर्द या सांस फूलने की समस्या होती है। रोगी को तुरंत ही अस्पताल ले जाएं और डॉक्टरों को जितना शीघ्र हो सके ब्लॉकेज को कम करने का प्रयास करना चाहिए।

बिना तेल के खाना पकाने की अवधारणा क्या है?
ट्रायग्लिसराइड का दूसरा नाम तेल है जो धमनियों में अवरोध उत्पन्न करता है। तेल का कोई स्वाद नहीं होता लेकिन भोजन पकाने के लिए उसमें तेल मिलाया जाता है। वसा की हमारी आधारभूत आवश्यकताओं के लिए प्रकृति ने सभी खाद्य पदार्थ जैसे चावल, गेहूं, दालें, फल व सब्जियों को वसा यानी ट्रायग्लिसराइड से भरपूर बनाया है।

हृदय रोग मेें सूखे मेवे खाने चाहिए?
सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट, काजू और पिस्ता में 50 प्रतिशत से अधिक तेल होता है। नारियल और मूंगफली में 40त्न से अधिक तेल या ट्रायग्लिसराइड होता है। कई हृदय रोग विशेषज्ञ मरीजों को गलत सलाह देते हैं कि इनमें वसा नहीं होती है। कुछ इन्हें खाने की अनुमति यह कहकर देते हैं कि यह शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाते हैं या इनमें ओमेगा-3 ऑयल होता है लेकिन वे यह नहीं बताते कि सूखे मेवों में 40-64 प्रतिशत तक ट्रायग्लिसराइड भी होता है जिससे रक्त में इस तत्व का स्तर बढ़ जाता है। इसलिए हृदय रोगियों के लिए सभी सूखे मेवे प्रतिबंधित हैं। किशमिश, मुनक्का, खजूर और खुमानी में लगभग तेल की मात्रा शून्य होती है। हृदय रोगी इनका प्रयोग कर सकते हैं बशर्ते उन्हें डायबिटीज न हो।

Published on:
27 Feb 2019 08:00 am