
विटामिन-ए वसा में घुलनशील होता है। यह त्वचा, हड्डियों व कोशिकाओं को मजबूत करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं। सूजन संबंधी समस्या को रोकता है। यह एंटी एजिंग है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। हृदय, फेफड़े, किडनी के कार्यों को सामान्य रखता है। आयरन का अवशोषण करता है। इसकी कमी से आंखों में सूखापन, रूखे बाल, सूखी त्वचा, डायरिया, बार-बार सर्दी-जुकाम, थकान-कमजोरी, अनिद्रा, रतौंधी होती है।
स्रोत : दूध, गाजर, पीले-नारंगी रंग व पत्तेदार सब्जियों, पपीते, अंडे, दूध, आलू, सोयाबीन में मिलता है। इसे बच्चों को 400 मिग्रा., युवाओं को 900 मिग्रा. व महिलाओं को 700 व स्तनपान कराने वाली महिला को 1,200 मिग्रा. प्रतिदिन लेना चाहिए।
कैल्सियम का स्तर
रक्त में कैल्सियम का स्तर बनाए रखने और हड्डियों के लिए आवश्यक है। हड्डियों, दांत, और ऊतकों के रख-रखाव के लिए आवश्यक है। ऊर्जा पैदा करने के लिए सभी कोशिकाओं को इसकी जरुरत पडती है। स्वस्थ रहने के लिए विटामिन ए के दोनों रूपों का सेवन करना चाहिए। कैरोटिनॉयड रूप विशेष परिस्थितियों में रेटिनॉयड रूप में परिवर्तित हो जाता है।
सावधानी
इसे अधिक लेने से हड्डियां कमजोर, लिवर संबंधी समस्या हो सकती है। गर्भनिरोधक गोलियां, कील मुंहासे की दवा का प्रभाव कम कर सकता है।
- डॉ. लीनेश्वर हर्षवर्धन, वरिष्ठ फिजिशियन, जयपुर